एक पिता! आज आप सभी के प्यार स्नेह और सहयोग का जीवनभर के लिए ऋणी हो गया.. मैं आप लोगो का यह अहसान जीवन में कभी भी उतार नहीं पाऊंगा.. क्योंकि आप सभी लोगों की दुवाओं.. प्रार्थनाओं.. और सहयोग की वजह से ही मेरा खोया हुआ बेटा शिखर आज मुझे वापस मिल गया है.. ख़ास तौर पर मैं यशवंत जी.. भड़ास4मीडिया.. और भड़ास के हज़ारों व्यूवर का शुक्रिया अदा करता हूँ, जिन्होंने मेरे जीवन के इस सबसे अँधेरे अध्याय में मेरा सहयोग किया..
यह भड़ास के सहयोग का ही परिणाम था कि मेरे पास एक हज़ार से भी ज्यादा उन लोगों के फोन और मैसेज आये जो भड़ास के व्यूवर हैं, हालांकि मेरे द्वारा भड़ास को भेजी गयी बेटे शिखर की फोटो शायद किसी कारण छप न सकी थी फिर भी उन व्यूवर्स ने ना केवल मेरे बेटे की फोटो और जानकारियाँ मुझसे हासिल की बल्कि हम बेबस माँ-बाप को हौसला भी दिया.. मैं जानता हूँ कि आप जैसे हज़ारों लोगों के भगवान की तरफ उठे एक साथ लाखों हाथों और हज़ारों दिलों से निकली दुवाओं.. प्रार्थनाओं ने भगवान को भी रुला दिया होगा.. और उन्हीं दुवाओं ने मेरे बेटे को मुझसे मिला दिया.. वर्ना यह कतई संभव नहीं था.. क्योंकि मैं और मेरा परिवार पूरी तरह से निःसहाय-असहाय हो चुका था और हम भूसे में सुई तलाश कर रहे थे..
आप सभी लोगों ने इस मुश्किल की घड़ी में मुझे और मेरे परिवार को जो सहयोग.. धैर्य.. और भरोसा दिया है यह उसी का नतीजा है कि एक माँ को उसका बिछड़ा हुआ बेटा और एक पिता को उसके जिगर का टुकड़ा वापस मिला.. और वह भी मुम्बई जैसी भागमभाग और भीड़ भाड़ वाली जगह से.. जहां की अनजानी गलियों में कोई भी समझदार इंसान गुम हो सकता है.. तो एक 14 साल के बच्चे की क्या बिसात थी.. एक दुखियारी माँ की ममता और एक बेबस पिता की आत्मा आप सभी को शत शत नमन करती है और कोटि कोटि धन्यवाद देती है, इस माँ-बाप की आँखों से निकला हर एक आंसू आज आप सभी को दिल से दुवाएं दे रहा है कि आप लोग जहां भी रहें हमेशा खुशहाल और पल्लवित रहें.. क्योंकि आपने जो भी किया है उसकी कोई कीमत नहीं है वह अनमोल है और हम माँ बाप कभी भी यह ऋण उतार नहीं सकते.. केवल दुआएं दे सकते हैं..
इसके साथ ही मैं आज अपने 14 साल के बेटे शिखर से भी माफ़ी मांग रहा हूँ कि “मुझे माफ़ कर दो मेरे बेटे.! मैं अपने व्यस्त समय में कुछ पल तुम्हारे लिए न निकाल पाया.. तुम्हारे मासूम दिल और दिमाग की भावनाओं को समझ नहीं सका.. इसलिए मैं आज सबके सामने तुमसे माफ़ी मांग रहा हूँ और एक पिता होने के नाते सभी माता-पिता से यह भी कह रहा हूँ कि जो गलती मैंने की वह कभी भी अपने बच्चों के साथ न करें.. मुझे यह कहने और मानने में कोई गुरेज नहीं कि “मैंने गलती की”.. मेरे बेटे शिखर को “डांस” का बहुत शौक है.. अपने इसी शौक की वजह से उसने मुझसे बहुत बार टीवी पर आने वाले “डांस शोज” और “डांस कम्पटीशन” में भाग लेने की इच्छा जाहिर की.. हालांकि मीडिया में होने की वजह से मैं उसकी यह इच्छा आसानी से पूरी कर सकता था लेकिन मैं अपने व्यस्त समय से न तो उसके लिए दो पल निकाल पाया और न ही उसकी इच्छा को पूरा कर पाया..
मेरे दिमाग में था कि उसकी इच्छा को पूरा करने के लिए मुझे कुछ न कुछ वक़्त गंवाना होगा जिससे मेरी नौकरी और उसकी जिम्मेदारियां प्रभावित होंगी.. लिहाजा मैंने अपने बेटे को या तो कभी प्यार से टाल दिया या झिड़क दिया.. मैंने यह भी नहीं सोचा कि इसका मेरे बेटे के मासूम मन पर क्या प्रभाव पड़ेगा? इधर जब “जस्ट डांस” का शो शुरू हुआ तो भी मेरे बच्चे ने मुझे उसमे हिस्सा लेने की इच्छा जताई, उसने मुझसे यहाँ तक कहा कि मैं उसे मुम्बई उसकी “बुआ माँ” के पास भेज दूं वह उसे शो तक ले जायेंगी, पर मैं इस बार भी गलती कर बैठा मैंने सोचा कि बच्चे को मुम्बई ले जाने के लिए मुझे कम से कम 48 घंटों का समय गंवाना पड़ेगा और मेरा काम प्रभावित होगा.. पर मैं यह न सोच सका कि मैं जो कर रहा हूँ उससे तो मेरा छोटा सा परिवार.. मेरा बच्चा प्रभावित हो जाएगा.. मेरा आशियाना बिखर जाएगा.. मेरे बच्चे की इच्छा बहुत छोटी सी थी.. उसे केवल उसकी बुआ माँ के पास ही तो भेजना था, पर मैंने इस छोटी सी इच्छा को पूरी ना करके बहुत बड़ी गलती कर दी.. और जो न होना था वह हो गया..
मेरा बेटा डांस के जुनून में बिना पैसे के ही घर से मुम्बई के लिए निकल गया.. बुआ माँ के घर पहुँचने के लिए उसने जिस कागज के टुकड़े पर उनका पता लिखा था वह भी बारिश में भीग कर मुम्बई पहुँचते पहुँचते लुग्दी बन गया.. और मेरा बच्चा मुम्बई की भीड़ में भटक गया.. शायद हमारा बच्चा हमें कभी मिल नहीं पाता अगर आप लोगों की दुआएं, प्रार्थनाएं और भगवान का आशीर्वाद न होता, जिनकी बदौलत एक फ़रिश्ता मेरे बेटे से टकरा गया और उसने हमारे बच्चे को हम तक पहुंचाया.. हम उस देवता सामान, नेक दिल इंसान के भी अपनी आत्मा.. अपने हृदय से शुक्रगुजार हैं, जो हमारे लिए भगवान बन गया.. ईश्वर हमेशा उस नेक इंसान को सुखी और संपन्न रखें.. इसलिए मेरा हमारे जैसे हर माता-पिता से अनुरोध है कि वह अपने बच्चों की इच्छाओं का भरपूर ख्याल रखें और उनकी भावनाओं को ठेस न लगने दें.. और अपने व्यस्त समय से कुछ पल अपने बच्चों के लिए ज़रूर निकाले.. यह एक पिता की आप सभी से विनती है.. क्योंकि फ़रिश्ते हर बार नहीं आते..! इसके साथ ही आप सभी का एक बार फिर हृदय से धन्यवाद..! और अपने बेटे से भी एक बार और क्षमा -याचना..!
मनोज कुमार
महुआ न्यूज
कानपुर
मोबाइल – 09956065018












jagdeep yadav
July 7, 2011 at 3:46 pm
Badhai ho bhai sahab……………..
sunil navprabhat
July 7, 2011 at 4:36 pm
bdhai ho manoj ji……..
raja
July 7, 2011 at 6:00 pm
bhai sahab aap ke bachhey ko ddodvaney mein bhadas ka accha khasa role hain.
ashwini sharma
July 7, 2011 at 8:18 pm
wakai aapke bete ke milne ki khabar sukhad hai..nahi to mumbai ki bheed mai gayab bachche asani se nahi milte…har din mayanagari se jaane kitne bachhe sada ke liya lapta ho jate hain..aur ma bap tadpte rah jate hai…apne bete ko pyar se samjayen samay ka intizar kare aur dance ke liye jamkar sadhna kare taki jab mauka mile sikka jamkar rakh de..
ashwini sharma
crime journalist
tv9 news mumbai
ajay nagar
July 8, 2011 at 3:58 am
bdhai ho manoj ji ko or yashwant ji ko bhi……..
sandhydeep
July 8, 2011 at 8:44 am
मनोज जी जो हुआ उसे भूल कर अपने बेटे को नया मुक्त आकाश दे ताकि वो जीवन पथ पर आगे बढ सके
vikas pandey
September 2, 2011 at 2:19 pm
बेटे के मिलने की बधाई…
suresh mishra
September 16, 2011 at 7:00 am
मनोज जी नमस्कार ,
आपका बेटा मिल गया , इसके लिए परमपिता परमेश्वर का सुक्रिया / पत्रकार गरीबों और बेसहारों का सहारा होता है / जो इस सोच के साथ पत्रकारिता करते हैं उनकी मदद परमपिता करता है / जीवन में आपने भी तो यही किया है / दूसरों के खातिर ही तो अपनों को समय नहीं दे पाए / एक पुत्र के बिछुड़ने का दर्द हर पिता समझ सकता है / मेरे भाई आप और हम सिध्दांतवादी पत्रकार हैं / दुनिया कि दौड़ में हम बहुत पीछे हैं , इसलिए आपसे निवेदन है कि थोडा समय उनके लिए भी निकाले जो हमारे बुढापे का सहारा हैं / बेटे को ढेर सारा आशीर्वाद / उसके उज्जवल भविष्य कि कामना के साथ ………..
सुरेश मिश्र
औरैया , ९४५७६७९२९२