पुलिस मुझे झूठे केस में फंसाना चाह रही है

मैं मनोज कुमार चौरसिया पुत्र स्व0 ओम प्रकाश गुप्ता ग्राम काजी मुहल्ला, पत्रालय मनेर, थाना मनेर, जिला पटना, बिहार का रहने वाला हूं। मेरा मोबाइल क्रमांक 09334876391 तथा 09973934724 व ईमेल आइडी manojchourasiya2011@gmail.com है। मेरा जन्म 15 जनवरी 1976 ई0 को हुआ है। मैं तेरह वर्षों से शिक्षण कार्य में लगा हूं तथा पिछले पांच वर्षों से पत्राकारिता कर रहा हूं।

यूपी के दो आईपीएस अफसरों ब्रजलाल और मनोज कुमार पर मुकदमा दर्ज करने के आदेश

: पुलिस कल्‍याण के नाम पर वसूली का मामला : गाजीपुर जिले के सीजेएम ने दिया आदेश : पूर्वी उत्तर प्रदेश के एक छोटे जिले गाजीपुर से बड़ी खबर आई है. यहां के ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट कोर्ट ने उ.प्र के एक सिपाही ब्रिजेन्द्र यादव की याचिका पर उत्तर प्रदेश स्पेशल डीजी (कानून व्यवस्था) बृजलाल व गाजीपुर के एसपी मनोज कुमार व अन्य के खिलाफ 156/3 के तहत मुकदमा दर्ज करने का आदेश दे दिया है.

मिल गया मेरा पुत्र, आप सभी का आभार

एक पिता! आज आप सभी के प्यार स्नेह और सहयोग का जीवनभर के लिए ऋणी हो गया.. मैं आप लोगो का यह अहसान जीवन में कभी भी उतार नहीं पाऊंगा.. क्योंकि आप सभी लोगों की दुवाओं.. प्रार्थनाओं.. और सहयोग की वजह से ही मेरा खोया हुआ बेटा शिखर आज मुझे वापस मिल गया है.. ख़ास तौर पर मैं यशवंत जी.. भड़ास4मीडिया.. और भड़ास के हज़ारों व्‍यूवर का शुक्रिया अदा करता हूँ,  जिन्होंने मेरे जीवन के इस सबसे अँधेरे अध्याय में मेरा सहयोग किया..

‘आज के पत्रकार मनोज कुमार से पीडि़त हूं’

आदरणीय सम्पादक जी, भडास4मीडिया, महोदय, मैं एक शिक्षक हूं और झारखंड के झुमरी तिलैया में रहता हूं। यहां दैनिक आज के पत्रकार मनोज कुमार झुन्नू से पीडित हूं और इस संबंध में मैंने सनहा भी दर्ज कराया था।

क्‍यों नहीं किसी ने अरुण शौरी से सवाल किया!

मनोज कुमार: महात्मा की पत्रकारिता दिल्ली से देहात के बीच : महात्मा गांधी की पत्रकारिता और वर्तमान समय को लेकर विमर्श हो रहा है और यह कहा जा रहा है कि महात्मा की पत्रकारिता का लोप हो चुका है। बात शायद गलत नहीं है किन्तु पूरी तरह ठीक भी नहीं। महात्मा की पत्रकारिता को एक अलग दृष्टि से देखने और समझने की जरूरत है। महात्मा की पत्रकारिता दिल्ली से देहात तक अलग-अलग मायने रखती है। पत्रकारिता का जो बिगड़ा चेहरा दिख रहा है वह महानगरीय पत्रकारिता का है। वहां की पत्रकारिता का है जिन्हें एयरकंडीशन कमरों में रहने और इसी हैसियत की गाड़ियों में घूमने का शौक है।

मीडिया शोध पत्रिका के रूप में प्रकाशित होगा समागम

मीडिया पर एकाग्र मासिक पत्रिका समागम का प्रकाशन अब शोध पत्रिका के रूप में किया जाएगा। यह शोध पत्रिका द्विभाषी होगी। इस आशय की जानकारी समागम के सम्पादक मनोज कुमार ने दी। मीडिया का विस्तार हो रहा है और मीडिया शोध का कैनवास भी बड़ा हुआ है किन्तु शोध पत्रिकाओं का प्रकाशन अभी भी नगण्य है। इस कमी को पूरा करने की दृष्टि से एक विनम्र प्रयास विगत दस वर्षों से प्रकाशित हो रही मीडिया पर एकाग्र मासिक पत्रिका समागम करने जा रहा है। पत्रिका का जनवरी 2011 का अंक महात्मा गांधी की पत्रकारिता पर केन्द्रित है।

गया में बम विस्‍फोट, तीन पत्रकार घायल

: पुलिस के दो जवानों की मौत : बिहार विधानसभा चुनाव के छठे एवं अंतिम चरण में गया जिला में एक बम विस्‍फोट में दो पुलिसकर्मियों की मौत हो गई, जबकि इलेक्‍ट्रानिक मीडिया के तीन पत्रकारों समेत सात लोग घायल हो गए. घायलों को इलाज के लिए विभिन्‍न चिकित्‍सालयों में भर्ती कराया गया है.

वो जनसत्ता के दिन, ये आई-नेक्स्ट के दिन

मनोज कुमारहिंदी भाषा और हिंदी अखबार : कोई कहे कि हिन्दी अखबार हिन्दी से दूर हो रहे हैं तो आप चौंकेंगे। मैं भी चौंका था जब एक दर्जन समाचार पत्रों का छह महीने तक अध्ययन करता रहा। हिन्दी अखबारों द्वारा हिन्दी का मटियामेट इन छह महीनों में नहीं हुआ बल्कि इसकी शुरुआत तो डेढ़ दशक पहले शुरू हो गयी थी।