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स्ट्रिंगर ने इस्तीफा देने के बाद अपने ब्यूरो चीफ की पोलपट्टी खोल दी

साधना न्‍यूज, लखनऊ से आशीष शर्मा ऋषि ने इस्‍तीफा दे दिया है. वे यहां पर स्ट्रिंगर थे. उन्‍होंने इस्‍तीफा देने का कारण यूपी हेड प्रमोद वर्मा का खराब बर्ताव बताया है. उन्‍होंने चैनल के संपादक एनके सिंह एवं भड़ास को पत्र भेजा है जिसमें पंकज वर्मा पर कई आरोप लगाए हैं. इस संदर्भ में जब साधना यूपी-उत्‍तराखंड हेड पंकज वर्मा से बात की गई तो उन्‍होंने कहा कि आशीष को दूसरी जगह काम मिलने के बाद यहां से रिलीव किया गया.

साधना न्‍यूज, लखनऊ से आशीष शर्मा ऋषि ने इस्‍तीफा दे दिया है. वे यहां पर स्ट्रिंगर थे. उन्‍होंने इस्‍तीफा देने का कारण यूपी हेड प्रमोद वर्मा का खराब बर्ताव बताया है. उन्‍होंने चैनल के संपादक एनके सिंह एवं भड़ास को पत्र भेजा है जिसमें पंकज वर्मा पर कई आरोप लगाए हैं. इस संदर्भ में जब साधना यूपी-उत्‍तराखंड हेड पंकज वर्मा से बात की गई तो उन्‍होंने कहा कि आशीष को दूसरी जगह काम मिलने के बाद यहां से रिलीव किया गया.

पंकज वर्मा ने कहा कि आशीष काम से ज्‍यादा छुट्टी पर रहते थे. उनके पास अपना कैमरा और दो पहिया वाहन भी नहीं था, जिसके चलते काम प्रभावित हो रहा था. आशीष ने खुद मेरे पास आकर बताया कि उन्‍हें एक सर्वे का एसाइनमेंट मिल गया है, इसलिए वो जाना चाहते हैं, लिहाजा हमने उनके काम के दिनों की सेलरी देकर रिलीव कर दिया. किसी को भी बेहतर अवसर मिलने पर निर्णय लेने का अधिकार है, लिहाजा आशीष ने अपना निर्णय ले लिया.

आशीष ने पंकज वर्मा पर कई आरोप लगाते हुए भड़ास तथा चैनल के ग्रुप एडिटर एनके सिंह को जो पत्र भेजा है, उसे हूबहू नीचे प्रकाशित किया जा रहा है –


 

सेवा में यशवंत जी

संपादक

भड़ास4मीडिया

आपको बताना चाहता हूं साधना यूपी हेड पंकज वर्मा के तानाशाही रवैये से साधना न्‍यूज से इस्‍तीफा देने का क्रम जारी है। आपको बता दूं कि अपने आप को मीडिया का बड़ा नाम बताने वाले पंकज वर्मा के तानाशाही रवैया से आजिज आ चुके लोगों का साधना न्यूज चैनल छोड़ना जारी है। हमेशा लोगों से गाली की भाषा में बात करने वाले पंकज वर्मा अपने आप को देश के सर्वश्रेष्ठ सम्पादकों की श्रेणी मे गिनते हैं, मगर उनका व्यवहार किसी तानाशाह से कम नहीं है। पंकज वर्मा के गाली वाले व्यवहार से तंग आकर चैनल से पहले महीने विशाल नामक आफिस व्बाय दूसरे महीने आफिस मे गार्ड का काम करने वाले रिटायर्ड फौजी सोहनलाल तथा दूसरे महीने मैं स्वयं इस्तीफा देना उचित समझा क्योंकि यह सभी लोगों के सामने गाली देकर बात करते हैं।

भडास4मीडिया के माध्यम से मैं यह भी बताने जा रहा हूं कि पंकज वर्मा के गाली वाले व्यवहार से आजिज आ चुके अभी कई और लोग साधना न्यूज छोड़ने वाले हैं। कभी टाइम्स आफ इंडिया में बडे़ पद पर काम करने वाले पंकज वर्मा के इसी व्यवहार ने उन्हें आसमान से जमीन पर पटक दिया। टाइम्स आफ इंडिया में बडे़ पद पर काम करने वाला व्यक्ति अपनी कार्यगुजारियों के चलते कहीं भी एक साल से ज्यादा नहीं टिक पाए। मूल रूप से मार्केटिंग के आदमी पंकज वर्मा अपने आप को सम्पादक कहलाने में गर्व महसूस करते हैं, जबकि एक पन्ना खबर लिखने में इनको छींके आ जाती है। हिन्दुस्तान टाइम्स के बाद बसपा सांसद अखिलेश दास ने लखनऊ में जनसत्ता एक्सप्रेस की फ्रेन्चाइजी ली और पंकज वर्मा दंद भंग करके इस अखबार के संपादक बन गये, पर ज्यादा दिन यहां नहीं टिक पाये।

फिर गये इलाहाबाद से निकलने वाले यूनाइटेड भारत समाचार पत्र में वहां भी इनकी दाल ज्यादा दिन नहीं गल पायी। इसके बाद पंकज वर्मा लखनऊ से निकलने वाले राहत टाइम्स को राहत पहुंचाने पहुंच गये,  मगर इनका राहत का काम बहुत ज्यादा दिन नहीं हो पाया। टाइम्स आफ इंडिया, जनसत्ता एक्सप्रेस, यूनाइटेड भारत, राहत टाइम्स के बाद यह पहुंच गये जैन टीवी, जिसको पंकज वर्मा देश का नम्बर वन चैनल बताते थे और अब इनकी दुकान साधना न्यूज में सज चुकी है। फर्जी तरीके से 1 राजभवन का मकान आबंटन कराने वाले पंकज वर्मा अपने सभी जानने वाले लोगों को इस मकान का पता बताकर यहां पर बडे़ बडे़ अधिकारियों का मजमा लगाते हैं और इसकी आड़ में ट्रान्सफर-पोस्टिंग कराते हैं,  जबकि पंकज वर्मा का अपना स्वयं का मकान गोमती नगर के विनय खंड में 4/ 59 है,  जिसको यह किडजी स्कूल को चालीस हजार रुपये किराये पर दे रखे हैं।

उत्तर प्रदेश राज्य सम्पत्ति विभाग को जब यह पता चला कि पंकज वर्मा के पास लखनऊ के विनय खण्‍ड में 4/ 59 स्‍वयं का मकान है तो राज्य सम्पत्ति विभाग ने राजभवन का इनका मकान कैंसिल कर दिया,  तब पंकज वर्मा पहुंच गये अदालत वहां पर गलत तथ्यों का सहारा लेकर स्टे ले आये फिर तबसे उसी स्टे के सहारे उसी मकान पर काबिज है। पंकज वर्मा की एक और खासियत है कि यह हाजिरी रजिस्टर पर लोगों के आफिस आने के बाद भी उसको गैर हाजिर कर देते हैं यानी इनको अटेन्डेंस रजिस्टर पर क्रास बनाने का शौक है।

धन्यवाद।

आपका

आशीष शर्मा ऋषि

मोबाइल नम्‍बर 09161306768


 

सेवा में

श्री एन.के. सिंह

मुख्य सम्पादक साधना न्यूज

विषय.. साधना न्यूज से इस्तीफा के सम्बन्ध में।

महोदय

मैं आशीष शर्मा ऋषि साधना न्यूज चैनल लखनऊ में स्ट्रिंगर के पद पर दिंनाक 4 मई से कार्यरत था। 14 मई से 19 मई तक अपनी एकलौती बहन की शादी के लिए मैं ने पंकज वर्मा जी से छुट्टी ली थी,  उसके बाद 20 मई को आफिस आने पर पकज वर्मा जी ने मुझसे काम लेने से मना करते हुए 8 जून को मुझसे आईडी और टेप लेकर मुझे होल्ड पर रखा है। 8 जून के बाद आज एक महीने से अधिक का समय बीत गया है पर पंकज वर्मा जी मुझसे काम नही ले रहे और न ही मुझे स्पष्ट रूप से मना कर रहे हैं। जिसके कारण मेरा जीवन दोराहे पर आ गया है लिहाजा मैं ने स्‍वयं यह सोचकर कि ज्यादा दिन फील्ड से बाहर रखकर पंकज वर्मा जी मुझको एकदम से पैदल करना चाह रहे हैं,  लिहाजा मैं ने स्‍वयं इस्तीफा देने की बात सोची है। इस्तीफा देने के साथ लखनऊ आफिस में क्या हो रहा है उस पर मैं आपका ध्यान आर्कषण कराना चाहूंगा। कृपया मेरा इस्तीफा स्वीकार करने का कष्ट करें। धन्यवाद।

अब पंकज जी की कहानी बताता हूं। मैं टीवी 100 में बतौर संवाददाता लखनऊ में काम कर रहा था। मुझे पंकज वर्मा जी ने साधना न्यूज चैनल में काम करने को कहा। पहले मुझे यहां संवाददाता बनाने की बात कही गयी पर बाद में मुझे स्ट्रिंगर बना दिया। उस वक्त पंकज वर्मा जी ने कहा कि आपको सिर्फ कागज स्ट्रिंगर का मिला है,  आप काम संवाददाता का ही करेंगे जैसे अन्य लोग करेंगे। आपको जब कहीं खबर करने जाना होगा तो कैमरामैन आपके साथ जायेगा तथा आपको एक महीने बाद संवाददाता बना दिया जायेगा। यह सोचकर मैंने काम करना शुरू कर दिया एक हफ्ते तक पंकज वर्मा जी मेरे साथ एक कैमरामैन भेजते रहे लेकिन एक हफ्ते बाद मुझसे कैमरा खरीदने को कहा तथा बाद में यह भी कहा कि आप मोटरसाइकिल भी खरीद लीजिए।

मैं ने उनसे जब पूछा तो उन्होंने कहा कि आपको स्ट्रिंगर के पद पर रखा गया है लिहाजा आप कैमरा भी चलाइये तथा अपने मोटरसाइकिल से जाइये। मैं ने उनसे यह कहा कि सर आपने तो ऐसा कुछ भी पहले नहीं कहा था तो उन्होंने कहा कि यहा रोज नियम कानून बदलते रहते हैं। मैं ने उनसे यह भी कहा कि सर मेरी बहन की अभी शादी हुई है और उसमे मेरे पापा के उपर लाखों का कर्ज हो गया है तो उन्होंने कहा कि जब तक आपके पास मोटरसाइकिल और कैमरा नहीं आ जाता तब तक आप आफिस मत आइये। मैंने अपने पापा को यह बात बतायी तो उन्होंने कहीं से कर्ज लेकर मुझे कैमरा और मोटरसाइकिल खरीदवा दी,  लेकिन उसके बाद भी कभी मुझसे काम लिया जाता तो कभी काम नहीं लिया जाता। बाद में अब मुझसे एकदम से काम करने को मना कर दिया गया,  लेकिन मैं रोज आफिस आता हूं। मुझसे हाजिरी रजिस्टर पर अब हाजिरी भी नहीं लगाने दिया जाता है।

पंकज वर्मा

चार मई से मुझे चैनल में कार्य करने को कहा गया। मैं ने तन मन लगन से अपने काम को करता रहा। मगर पंकज वर्मा जी कार्यालय में लोगों को दो नजरों से देखा करते हैं। लखनऊ ब्यूरो में दोहरा मापदंड अपनाया जा रहा है,  अगर आप पंकज वर्मा जी के खास हैं तो बिना किसी को बताये पन्द्रह-पन्द्रह दिन की छुट्टी पर चले जाइये,  अगर आप काम करने वाले व्यक्ति हैं तो आप को एक दिन की भी छुट्टी नहीं मिल सकती। जैसा कि मेरे साथ हुआ। मैं ने पंकज वर्मा जी से अपनी बहन की शादी के लिए छह दिन की छुट्टी मांगी थी उन्होंने मुझको छुट्टी का आश्वासन दे दिया,  बाद में जब मैं छुट्टी चला गया और बाद में काम पर आया तो उन्होंने मुझे मुंहजुबानी काम करने से मना कर दिया।

मगर इसी चैनल में कैमरामैन राहुल सिंह जो पंकज वर्मा जी के खासमखास हैं,  वह जब चाहे बिना मेल किये बिना बताये पन्द्रह-पन्द्रह दिन की छुट्टी पर चले जाते हैं। जून की पहली तारीख को राहुल सिंह ने लखनऊ में ज्वाइन किया और दूसरे दिन से छुट्टी पर चले गये। लेकिन उनको पंकज वर्मा जी ने एक बार भी कुछ नहीं कहा। जबकि राहुल सिंह ने छुट्टी के बाबत किसी को कोई मेल भी नहीं किया। राहुल सिंह जून 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 12, 13, 14, 15, 16, 17 यानी 13 दिन छुट्टी पर थे बिना मेल या प्रार्थना पत्र दिये या फिर बिना नोएडा आफिस को बताये।

पंकज वर्मा जी का व्यवहार किसी तानाशाह की तरह है। हमेशा वह काम में खोट निकालते रहे,  कई एसे मौके आये जब हम लोगों को रातभर काम करना पड़ा। कुछ एसे मौके आये जब कैमरामैन नफीस,  प्रमोद सर और हम पॉच-पॉच बजे सुबह तक काम करते रहे,  उसके बाद भी पंकज वर्मा जी को हम लोगों का काम कभी पसन्द नहीं आया। एक दिन नोएडा आफिस की एफटीपी खराब होने की वजह से लखनऊ ब्यूरो से रात ग्यारह बजे तक हम लोग फीड भेजने का काम करते रहे,  तभी पंकज वर्मा जी का फोन आया और हम लोगों को गाली देते हुए आफिस तत्काल बन्द करने को कहा गया। हम लोगों ने कहा कि सर अभी फीड जा रही तो उन्होंने गाली देते हुए तुरन्त फीड कैंसिल करने को कहा। पंकज वर्मा जी के व्यवहार से आफिस मे कोई भी चपरासी और गार्ड एक महीने से ज्यादा नहीं टिक पाता हैं क्योंकि यह सबको गाली देकर बात करते हैं। पहले महीने काम करने वाला आफिस ब्वाय विशाल इनकी गालियों से तंग आकर नौकरी छोड़कर चला गया।

हमारे गार्ड साहब जिनकी उम्र 60 साल के उपर है, रिटायर्ट फौजी हैं। उनको अपने घर बुलाकर नौकर चाकरों के सामने इतना डांटे कि उनकी तबीयत खराब हो गयी। पंकज वर्मा जी गार्ड साहब को अपने घर मे प्रयोग होने वाले सामानों की नई नई लिस्ट पकड़ाकर मिलिट्री कैंटीन से सामान लाने को कहते थे। इन सामानों के साथ-साथ गार्ड साहब से मिलिट्री कैंटीन से चावल और दाल भी मंगाया जाता। मेरे कैरियर में ऐसे ये पहले बॉस मिले जो गालियों से लोगों का स्वागत करते हैं। हमारे आफिस में न्यूज कवर करने के लिए एक इंडिका कार लगी है,  उस कार से न्यूज कवर कम होता है पंकज वर्मा जी का काम ज्यादा होता है। संडे को तो कार पूरे दिन पंकज वर्मा के परिवार की सेवा में लगी रहती है।

पंकज वर्मा

जून माह से उन्होंने अपनी कार भी ऑफिस लानी बन्द कर दी। अब वह आफिस में लगी कार से ही रोजाना आफिस आते है और घर जाते हैं। एक दिन इंडिका कार का ड्राइवर गाड़ी उनके राजभवन स्थित मकान पर खड़ी करके उनके घर में बताकर गाड़ी में आकर बैठ गया। ड्राइवर को घर के अन्दर बुलाकर पंकज वर्मा जी इतना गाली दिया कि दूसरे दिन से वह ड्राइवर नहीं आया। गाड़ी मालिक को ड्राइवर ने सारी बातें बतायी तो गाड़ी मालिक ने दूसरे दिन से गाड़ी भेजनी बन्द कर दी। दो दिन आफिस में गाड़ी नहीं रही। दो दिन बाद पंकज वर्मा जी ने गाड़ी मालिक को आश्वस्त किया कि आइंदा से ऐसा नहीं होगा तो गाड़ी मालिक ने गाड़ी भेजी मगर उस ड्राइवर ने हमारे यहां गाड़ी चलाने से मना कर दिया।

पंकज वर्मा जी ने लखनऊ आफिस में साधना न्यूज का एक ग्लोसाइन बोर्ड बनवाये हैं, जिस पर कुल 2500 रुपये खर्च आये लेकिन पंकज वर्मा जी ने उसका फर्जी बिल 5200 रुपये का बनवाया है। उस बोर्ड में सिर्फ उपर से ग्लोसाइन लगा दिया गया है जबकि जो नीचे का हिस्सा टीन का चद्दर और टयूब बल्ब पुराने वाले किरायेदार रिलाएन्स का था,  जो अपना बोर्ड यहीं पर छोड़ कर चला गया। मुझको यहां रखा गया था न्यूज कवर करने के लिए मगर मुझसे पंकज वर्मा जी न्यूज के साथ अन्य काम भी, जो मेरा नही होता था, वह भी कराते थे मसलन मुझसे रोज दस-दस बैंक का खाता देकर उनपर एंट्री कराने को कहा जाता। उसके बाद अगर एक भी खाते में एंट्री नहीं हो पाती तो डांटा जाता।

करोड़ों की सम्पत्ति के मालिक पंकज वर्मा जी का लखनऊ के लगभग सभी बैकों में खाते हैं। पंकज वर्मा जी तीन कार के मालिक है। ड्राइवर एक है लेकिन सेवा उसको तीनों गाडियों की करनी पड़ती है। इसलिए एक महीना से ज्यादा कोई ड्राइवर इनके यहां टिक नहीं पाता। पंकज वर्मा जी अटेन्डेन्स रजिस्टर पर क्रास बनाने के शौकिन हैं। कब कहां इनको मौका मिल जाय बस क्रास का निशान बनते देर नहीं लगेगी,  उस दिन चाहे आप काम भी क्यों न किये हों। मुझको यहां संवाददाता बनाने का लालीपाप देकर पंकज वर्मा जी ले आये,  बाद में स्ट्रिंगर बना दिये। मैं 4 मई से 13 मई तक काम किया चूंकि मेरी एकलौती छोटी बहन की शादी 17 मई को थी,  लिहाजा मैं पंकज वर्मा जी से छुट्टी लेकर 14 मई से 19 मई तक नहीं आया,  बाद में 20 मई से मैं फिर से काम पर लौट आया मगर पंकज वर्मा जी ने 20 मई से पहले आये हुए मेरे सभी अटेन्डेन्स पर क्रास का निशान लगाकर मुझको गैरहाजिर कर दिया।

पंकज वर्मा जी गलत दस्तावेजों का सहारा लेकर लखनऊ के राजभवन में एक सरकारी आवास 1, राजभवन आंवटित करा रखे हैं। पंकज वर्मा जी का लखनऊ के गोमती नगर के विनय खन्ड में एक आलीशान कोठी है, जिसका नम्बर 4/59 है। इस मकान को पंकज वर्मा जी ने 2005 में खरीदा था और इस वक्त इसे किडजी स्कूल को किराये पर दे रखा है। सरकारी आवास में रहने वाले लोगों के उपर यह नियम लागू होता है कि अगर उनके पास अपना स्वयं का मकान होगा तो सरकारी मकान कैंसिल कर दिया जायेगा। इसी को आधार बनाकर सरकार ने पंकज वर्मा जी का मकान एक बार कैंसिल कर दिया था,  लिहाजा पंकज वर्मा जी हाईकोर्ट से गलत हलफनामे के आधार पर स्टे ले आये। तब से उसी स्टे के आधार पर रह रहे हैं। मकान का फोटोग्राफ भेजा जा रहा है। साथ ही रोजाना अपने किसी न किसी दोस्त का टिकट कन्‍फर्म कराने को हमको पकड़ा देते हैं।

आशीष शर्मा ऋषि

साधना न्यूज चैनल

लखनऊ

मोबाइल नम्‍बर 09161306768

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0 Comments

  1. sanjay

    July 18, 2011 at 8:35 pm

    isi tarah ke ek mahapurush dehradoon me hai …dhirendra singh..hai to beuwro chief …lekin din bhar suchana nidesalay me baithe rahte hai …kam ke name per kuchh nahi hai ….inke yaha do logo ne isi liye chhod diya hai ..inka bhi dhyan kam nahi rahta hai ..bus jouniouro se kam kara lete hai …maje ki baat yah hai ki office me hi inka parivar bhi rahata hai …pahle ek inke yaha ek reporter the santosh pandey jee …unke rahne se ek baar agency ka market bada tha ..lekin lagta hai unhone bhi inke tanasahi ravaiye se chhod diya hai …agency ko sarkari vigyapan mil jata hai usko bhi koi samsya nahi hai …hasi aati hai …aise logo ko agency ne chief bana rakha hai jiske pass 4 saal ka bhi anobhav nahi hai ….jai hindusthan samachar agency ki ….

  2. media

    July 18, 2011 at 6:48 pm

    jiyo ashish badiya hai tum lado media tumhare sath hai waise bhi ye kaunsi naye baat hai media matlab shosan aur jisko sahi se tail malish karni ati hogi usi ki jeet hoti hai isliye yato patrkarita chor do aur ya to phir jee hajoori karna shuru kardo……kyoki is field ki yehi vidambana hai….

  3. k c jha

    July 18, 2011 at 4:15 pm

    good bhai…….

  4. vijay

    July 18, 2011 at 3:53 pm

    rishi bhayi aapjaisa jahin aadami kaise fas gaya ye to aise log hai jinaka kaam hi dalali karana hai rahi baat sadhana news ki to n k singh to bada intrvew lekar logo ko rakhate hai inse kya liya?????

  5. raja

    July 18, 2011 at 4:03 pm

    guru maja aa gaya kya pol kholi hain aur iskaa maaalik bhi kam badnaam nahi hain bjp kaa gulaam hain. ek baar raghuvaanshi sahab uma bharti kee band baja rahet they tab uma bharti boli ki tun kuch bhi kar lo mein abhi guptaa ji se baat karti hoon.raghuvansi nahi maney aur khabar laganey chaley gaye magar guptaa ji ney mana kar diya aur raghuvansi sahab vahan se chod ker chaley aayey.

  6. OMPRAKASH

    July 20, 2011 at 10:30 am

    pankaj verma jaise log ke karan hi stringer ijjat ke saath saath bhukhe marne ko majboor hain.

  7. A.chandra

    July 29, 2011 at 11:37 am

    Gud job Rishi.
    I like this type of reporting market ki nahi to boss ki he sahi.Talk with me

    Gud & god bless you

  8. EK DOST

    August 2, 2011 at 8:39 pm

    भाई ऋषि ये आपके अकेले की परेशानी नहीं है ये हाल अमूमन सभी जगह का है चाहे वो साधना हो या फिर कोई अन्य चेन्नल स्ट्रिंगर इन जेसे ब्यूरो और चेन्नल मालिको के लिए कोई हेसियत नहीं रखता फिर आप और हम किस खेत की मुली है ! रही भाई भतीजा वाद की बात तो राज निति से लेकर अब पत्रकारिता मैं भी इस का चलन जोर शोर से होने लगा है हम राज नेताओ को कोसते है की वो भ्रष्टाचारी होते है लेकिन ये बड़े पद पर बेठे लोग कम है क्या अब पत्रकार बनने से तो अच्छा है की कोई खुद का काम कर लो !

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