हिंदुस्तान, लखीमपुर अखबार किसी को जीते जी मार सकता है, किसी से संवेदना व्यक्त करवा सकता है. अभी तक कुछेक खबरों के रिपीटेशन का दौर ही हिंदुस्तान, लखीमपुर में देखने को मिल रहा था, पर अब उससे भी दो कदम आगे बढ़ते हुए अखबार ने विधायक को जीते जी मार डाला तथा उनके निधन का संवेदना संदेश सांसद के मुंह से कहवा दिया. इसे लेकर अखबार की खूब छिछालेदर हुई.
हिंदुस्तान, लखीमपुर के 27 जुलाई के अंक में तीन नम्बर पेज पर कांग्रेस के सांसद जफर अली नकवी की तरफ से सदर विधायक उत्कर्ष वर्मा के मरने पर शोक संवेदना प्रकाशित किया गया
था, जिसमें सांसद ने विधायक के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया तथा उनके परिवार को इस दुख की घड़ी को सहने की क्षमता देने का भगवान से प्रार्थना किया है. जबकि वास्तविकता यह है कि सदर विधायक उत्कर्ष वर्मा न जीवित हैं बल्कि स्वथ्य भी हैं.
इस खबर के प्रकाशन के बाद अखबार पर खूब थू-थू हुई. बताया जा रहा है कि आजकल हिंदुस्तान, लखीमपुर में लगातार गलतियां हो रही हैं. पिछले दिनों बंदरों के आतंक पर छपी खबर को रिपीट कर दिया गया था. इसके अलावा भी कई छोटी-मोटी गल्तियां हुई पर इस गलती के बाद तो विधायक भी खासे दुखी हैं. विवेक सेंगर की जगह ब्यूरोचीफ की जिम्मेदारी निभा रहे उपेंद्र द्विवेदी भी लगातार हो रही गल्तियों का कारण समझ नहीं पा रहे हैं. इसका असर है कि हिंदुस्तान का सर्कुलेशन भी घट गया है.












RAHUL KUMAR THAKUR
August 3, 2011 at 1:16 pm
ye sab yellow journalism aur netaon ki chamchagiri ka asr hai,please Hindustan walon is terah patrakarita ko badnaam mat kiya karo.
amit sharma
August 3, 2011 at 4:58 pm
अरे भय्या अभी ३० जुलाई को हिंदुस्तान बदायू ने ये कारनामा किया था जिसमे एक स्कूल के मरे हुए मैनेजेर का बयान छाप दिया था और वो भी फोटो सहित यानी हिंदुस्तान वाले आत्माओं से भी बात कर सकते है, और स्वर्ग से उनका बयान लाकर छाप सकते है. जब बदायूं के हिन्दुस्तानी ऐसा कर सकते है तो लखीमपुर वाले पीछे क्यों रहे/ लेकिन लखीमपुर वालो रहोगे बदायूं वालो से पीछे ही क्योकि जिन्दा को तो कोई भी मार सकता है लेकिन मरे को जिन्दा कर पाना हर एक के बस की बात नहीं ये कमाल तो बदायूं वाले ही कर सकते है, हा……..हा….हा……..