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राजस्‍थान पत्रिका को जोधपुर में कोठारी के रिश्‍तेदारों ने बरबाद कर डाला

राजस्थान पत्रिका का जोधपुर संस्करण इन दिनों बहुत बुरे दौर से गुजर रहा है। राजस्थान के दूसरे बड़े शहर का यह महत्वपूर्ण संस्करण इतने संकट में कभी नहीं रहा। इस संस्करण को कभी गुलाब कोठारी के विद्वान भाई मिलाप कोठारी ने संभाला था और भुवनेश जैन समेत अनेक बड़े नाम वाले पत्रकारों ने यहां काम किया। लेकिन पत्रिका के मालिकों की घर के लोगों को ही महत्वपूर्ण पदों पर लगाने की नीति ने इसे बरबाद कर दिया।

राजस्थान पत्रिका का जोधपुर संस्करण इन दिनों बहुत बुरे दौर से गुजर रहा है। राजस्थान के दूसरे बड़े शहर का यह महत्वपूर्ण संस्करण इतने संकट में कभी नहीं रहा। इस संस्करण को कभी गुलाब कोठारी के विद्वान भाई मिलाप कोठारी ने संभाला था और भुवनेश जैन समेत अनेक बड़े नाम वाले पत्रकारों ने यहां काम किया। लेकिन पत्रिका के मालिकों की घर के लोगों को ही महत्वपूर्ण पदों पर लगाने की नीति ने इसे बरबाद कर दिया।

मिलाप कोठारी ने तो पूरी काबिलियत से काम किया, लेकिन उनके बाद जोधपुर का जिम्मा मिला प्रशांत कोठारी को जो गुलाब कोठारी के साले के बेटे हैं। नाकाबिल प्रशांत कोठारी ने इस संस्करण को बनिये की दुकान की तरह चलाया और वाट लगा दी। उन्होंने अपनी कमजोरियां छिपाने के लिए चापलूसों को प्रश्रय दिया और चपरासियों से जासूसी कराई। वे हमेशा सम्पादकीय विभाग को अपने अनुसार चलने के लिए मजबूर करते रहे। प्रशांत कोठारी हमेशा खुद को पत्रिका के मालिक के रूप में प्रचारित करते रहे। कोठारी सरनेम होने के कारण जोधपुर जनता भी इस झूठ पर विश्वास करती रही।

गुलाब कोठारी के बेटों निहार और सिद्धार्थ ने जब सत्ता संभाली तो उन्हें अपने ममेरे भाई प्रशांत की पोल पट्टी पता लगी। अब प्रशांत के बुरे दिन शुरू हुए। उन्हें घर बिठा कर वेतन चालू रखा गया। खैर बात वर्तमान हालात की हो रही है। पत्रिका के जोधपुर संस्करण का खराब दौर दैनिक भास्कर के पदार्पण के साथ शुरू हो गया। शाहिद मिर्जा जैसे सम्पादक को प्रशांत कोठारी ने टिकने नहीं दिया था। इसके बाद कमल श्रीमाली को अपनी अंगुलियों पर नचाया। कमल श्रीमाली ने एक-एक करके सभी अच्छे पत्रकारों का तबादला करा करा कर अपने चहेते सुरेश व्यास को रिपोर्टिंग की पूरी जिम्मेदारी दे दी। इसके बाद डेस्क के आदमी दिनेश रामावत सम्पादक बने जिनकों रिपोर्टिंग का कोई अनुभव नहीं था। वे भी अपने चेहतों के हाथ में खेलते रहे। फिर दौलतसिंह चौहान आए सम्पादक बनकर और हैरतअंगेज रूप से सात साल तक टिके रहे। लेखन और समाचार की समझ की दृष्टि से वे सबसे ज्यादा नाकारा हैं। लेकिन किस्मत उनके साथ है।

पत्रिका के युवराज निहार कोठारी ने उदयपुर से ट्रेनिंग की थी तब दौलतसिंह वहां के सम्पादक थे। बस इसी बात का फायदा वे अब तक उठा रहे हैं। दौलतसिंह के जोधपुर सम्पादक रहते हुए कई अच्छे व ईमानदार रिपोर्टरों ने पत्रिका छोड़ दी। कारण दौलतसिंह का खराब व्यवहार। दौलतसिंह को जब लगने लगा कि उनका ट्रांसफर होने वाला तो उन्होंने हालात खराब होने दिए ताकि उन्हें संभालने के लिए उनका ट्रांसफर नहीं किया जाए। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। दौलतसिंह ने मैनेजेर विधान भंडारी के साथ जोड़ी बना ली थी। विधान भंडारी भी गुलाब कोठारी के रिश्तेदार होने के कारण ही मैनेजरी कर रहे हैं और सर्वथा अक्षम हैं। अब निहार के खास समझे जाने वाले प्रदीप शेखावत को सम्पादक बनाया गया है जिनको आगे मैनजर का जिम्मा भी दिया जाना है। विधान भंडारी को जयपुर भेजा जाएगा। विधान जानते हैं कि जयपुर में उनकी पोल खुल जाएगी। इसलिए वे प्रदीप शेखावत को फेल करने में जुट गए हैं ताकि उनके जोड़ीदार दौलतसिंह को फिर से जोधपुर लाया जा सके। इन हालात में सम्पादकीय विभाग के लोगों की हालत खराब है। सीनियर व सिंसियर रिपोर्टर प्रवीण धींगरा पत्रिका छोड़ कर भास्कर जा चुके हैं और अन्य कई जाने की तैयारी में हैं।

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

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0 Comments

  1. rohit krishna nandam

    August 3, 2011 at 12:51 pm

    andheri nagri choupat raja vala haal ho raha hai g

  2. bal krishna pandey

    August 4, 2011 at 5:34 am

    yah nahee hona caaheyae.

  3. xyz

    August 5, 2011 at 1:12 pm

    sab bakvas

  4. mk

    August 5, 2011 at 2:47 pm

    [b]अरे साहब पत्रिका में आजकल के रिपोर्टर लौंडे सम्पादकों को आसानी से सीएच बना रहे हैं। सम्पादकों को ज्यादा एक्सपीरियंस है नहीं। ऐसे में कटिंगबाज रिपोर्टरों की बन आई है। इन कलियुगी रिपोर्टरों की खासियत एक ही है कि उनके पास पुरानी खबरों की कटिंगों का रिच बैंक हैं। वे इन कटिंगों को टीप कर कर रोज दो-चार खबरे बना देते हैं और सम्पादक उनके भाषा कौशल की तारीफ करते हुए बाईलाइन दे देता है। ऐसे ही एक रिपोर्टर आजकल बीकानेर में हैं जो पहले जोधपुर और पाली में अपनी इन कटिंगों के बूते धूम मचा चुके है। यह अलग बात है कि उनकी हर बार पोल खुल गई थी और जोरदार किरकिरी हुई थी। इनके नाम के प्रथमाक्षर हैं रो.पा.।[/b]

  5. sanjay

    August 5, 2011 at 2:48 pm

    [b]यशवंतजी, इस राइट अप ने सारे जख्म हरे कर दिए। जिस किसी भाई ने यह हकीकत बयां की है उससे मैं पूछना चाहता हूं कि वह इतने दिन कहां था। न जानने कितने नौजवां पत्रकारिता में भविष्य के सपने देखते हुए आए और इन सितमगरों के हाथों लुट कर बरबाद हो गए। मैं जोधपुर संस्करण नहीं सम्पूर्ण पत्रिका का हाल बता रहा हूं जो बेहाल है। श्रीमान निहार कोठारी साहब आपसे एक इल्तिजा है। आप एक महान पत्रकार कर्पूरचन्द कुलिश की विरासत को संभाले हुए हो। आप युवा और ऊर्जावान हो, आप अपने संस्थान और कर्मचारियों का भला चाहते हो, लेकिन आपको पता ही नहीं चलता कि आपके यहां क्या-क्या खेल चल रहे हैं। स्वार्थी और चापलूस लोग आपके कई गलत डिसीजन करा देते हैं। पिछले सालों में पत्रिका में बूढे लोगों को नाकारा और कम काम करने वाला मान कर उन्हें इस्तीफा देने के लिए मजबूर करने का अभियान चला था। ऐसे लोगों को कलकत्ता, बंगलुरू, चैन्नई ट्रांसफऱ किया गया जिससे वे इस्तीफा देकर चले गए। इस सफाई अभियान में पत्रिका के कई काम के लोग भी चले गए जो अब भास्कर को अपनी सेवाओं से फायदा पहुंचा रहे हैं। आप सोचिए इन लोगों को 15,20,25 सालों तक काम सिखाया, तराशा और अनुभव दिया पत्रिका ने और अब उनकी कुशलता और अनुभव का लाभ मिल रहा है प्रतिद्वन्दी को। अन लोगों की यदि कोई ग्रीवेन्सिज थीं तो उन्हें सॉल्व किया जा सकता था।लेकिन आपके यहां तो सुनने वाला कोई है ही नहीं। देखिए लायक आदमी में एक-दो तो खराबियां मिलेंगी। निहारजी सही बात तो यह है कि आपको पता ही नहीं चलता कि कौन आदमी कितने काम का है और किसे किस तरह बढि़या काम कराया जा सकता है। पत्रिका में तो गधे-धोड़े सब एक समान है। नहीं आजकल तो गधों यानि लिखना नहीं जानने वालों और निकम्मों व बहानेबाजों के पौ-बारह हैं। वे बढ़िया तन्ख्वाह और पोस्ट एन्जॉय कर रहे हैं। निहारजी आप अपने सारे संस्करणों व विभागों में इंटैलीजेंस सिस्टम डेवलप कीजिए तो असली सूरतेहाल आप तक पहुंचेगा। साथ ही एक बार अपने सारे सम्पादकों व चीफ रिपोर्टरों का सरप्राइज टेस्ट लीजिए। चुपके से दिल्ली जाकर वरिष्ठ पत्रकारों से प्रश्नपत्र बनवा कर लाइए और बिना सूचना के सम्पादकों व चीप ऱिपोर्टरों का टेस्ट लीजिए। साहब मेरी गांरटी है आपके ज्यादातर सम्पादक व चीफ रिपोर्टर फेल हो जाएंगे। आधे लोग तो साधारण समाचार ही सही ढंग से नहीं लिख पाएंगे। और आधे लोग किसी घटना या आयोजन की सही कवरेज नहीं कर पाएंगे। अगर ऐसा नहीं हो तो निहारजी आपका जूता और मेरा सिर। मैं हाजिर हो जाउँगा, जयपुर में पत्रिका कार्यालय के सामने भरी सड़क पर जूते मारिएगा जो मेरी बात गलत निकल जाए। निहार ऐसे लोग जो खुद पूरा नहीं जानते अपने अधीनस्थों को क्या सिखाएंगे। हालात यह हैं कि ये सम्पादक व चीफ रिपोर्टर किसी जानकार आदमी को अपने पास बर्दाश्त नहीं कर पाते। ये उसके पीछे पड़ जाते हैं और उसकी नौकरी खराब करके ही दम लेते हैं। मुझे उम्मीद नहीं है निहार जी कि मेरी यह बात आप तक पहुंचेगी, क्योंकि आप बहुत व्यस्त रहते हैं। लेकिन मेरी भड़ास के पाठकों और पत्रिका के शुभचिंतकों से गुजारिश है कि वे किसी तरह मेरी यह बात निहारजी तक पहुंचाएं।[/b]

  6. n m jain,jodhpur

    August 5, 2011 at 3:16 pm

    [b]सही बात है। मैं पत्रिका का नियमित पाठक हूं। कभी हमारा पूरा परिवार पत्रिका चाव से पढ़ता था। पत्रिका की क्या लैंग्वैज थी। खबरों पर भरोसा होता था। किन्तु अब दो-तीन साल से पत्रिका में रोज अनगिनत गलतियां छपती हैं। न्यूज भी अटपटी सी होती है। कहें तो किसे कहें। पहले तो मेरे पिताजी एक पोस्टकार्ड भी डाल देते थे कुलिशजी के नाम पर तो जवाब आता था। मेने कई बार चिट्ठी पत्री की मगर कोई जबाव आया ना कोई सुधार हुआ। भगवान पार्श्वनाथ ही जानते हैं कि किसी को हमारी चिट्ठियां पढ़ने की फुर्सत है या नहीं है। बोत दुख होता है यह हालत देख कर। हमारी दुकान पर आने वाले आसपास के दुकानदार कहते हैं कि नैनो पत्रिका ब्लैकमेलिंग का माध्यम है। भाई गुलाब जी आजकल आप अखबार नहीं देखते क्या। हमारा भरोसा तो मत तोड़ो। जय जिनेन्द्र।[/b]

  7. gk

    August 5, 2011 at 3:24 pm

    [i]दौलतसिंह चौहान अभी पूरी तरह गए नहीं हैं। उनके कुछ अवशेष अभी जोधपुर में बचे हुए हैं यानि उनके पिट्ठू जो पत्रिका जोधपुर संस्कारण की एक-एक खबर प्रतिदिन दौलतसिंह को पहुंचा रहे हैं। ये पिट्ठू दोहरी नीति अपनाए हुए हैं। एक तरफ तो दौलतसिंह के जासूस बने हुए हैं और दूसरी तरफ प्रदीप शेखावत की चमचागिरी कर उनकी गुडबुक में जगह बनाने की कोशिश में हैं। प्रदीपजी सचेत रहना, नहीं आपको ये लोग काळी धार डूबा देंगे। [/i]:);;D

  8. सरीन चन्द्र गोयल मंडीदीप (भोपाल)

    August 8, 2011 at 2:17 pm

    गुलाब कोठारी जी की भोपाल में रूचि बढ गई है और उन्हें अपने घर में लगी आग दिखाई नहीं दे रही है .भोपाल की टीम सिर्फ दैनिक भास्कर पर कीचड़ उछालने का कोई भी मोका छोड़ना चाहती है
    मैं ऐसा मानना है कि हमाम मैं सब नंगे है इसलिए यह मानसिकता त्याग कर कि मेरी कमीज उससे चमकदार क्यों नहीं आपको अपनी कमीज अच्छी ख़बरों से चमकदार बनानी होगी

  9. raj

    August 13, 2011 at 4:56 pm

    It is a bad thing that Patrika is now fully commericial News Paper. It is not covering many important News. One live example of the same is – Jodhpur University had rganised an International Conferene in Mathematics & Statistics Department in July 28-30, 2011. It was a very big event and there were 15-20 delegates present from USA, canada, France and other countries. That news must be publish with a good coverage an photograph but….. no it was just a formality done by patrika for that

  10. manoj kamra

    May 6, 2012 at 6:16 am

    राजस्थान पत्रिका बीकानेर दिनांक 29-4-2012 का आखिरी पन्ने पर छपी स्थानीय बेसिरपैर की खबर तथा 4-5-2012 को जोधपुर भास्कर के मुख्य पृष्ठ पर चार कॉलम की समस्त संस्करणों में छपी खबर —————तकनीकी शिक्षा विभाग के मेरे द्वारा दिए गए एक समान तथ्यों पर आधारित खबर
    दोनों की तुलना करने के बाद आपके पास शायद शब्दों की कमी हो जायेगी.

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