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राहुल श्रीवास्‍तव का हिंदुस्‍तान से नाता टूटा, संपादक ने किया इनकार

ये खबर बनारस हिंदुस्‍तान की है. सोनभद्र ब्यूरो की जिम्‍मेदारी संभाल रहे राहुल श्रीवास्‍तव से अखबार का नाता टूट गया है. खबर है कि उन्‍हें बर्खास्‍त कर दिया गया है. यह कार्रवाई लखनऊ और दिल्‍ली में की गई शिकायतों के आधार पर हाईकमान ने किया है. राहुल पिछले पन्‍द्रह सालों से अखबार को अपनी सेवाएं दे रहे थे. राहुल की बनारस ऑफिस में तूती बोलती थी, वहां सब लोग उनकी ओबलाइज करने की नीति से खुश रहते थे.

ये खबर बनारस हिंदुस्‍तान की है. सोनभद्र ब्यूरो की जिम्‍मेदारी संभाल रहे राहुल श्रीवास्‍तव से अखबार का नाता टूट गया है. खबर है कि उन्‍हें बर्खास्‍त कर दिया गया है. यह कार्रवाई लखनऊ और दिल्‍ली में की गई शिकायतों के आधार पर हाईकमान ने किया है. राहुल पिछले पन्‍द्रह सालों से अखबार को अपनी सेवाएं दे रहे थे. राहुल की बनारस ऑफिस में तूती बोलती थी, वहां सब लोग उनकी ओबलाइज करने की नीति से खुश रहते थे.

लिहाजा उनपर हुई कार्रवाई में भी पारदर्शिता नहीं बनाए रखा गया है. राहुल श्रीवास्‍तव से जब हिंदुस्‍तान से नाता टूटने के बारे में बात की गई तो उन्‍होंने स्‍वीकार करते हुए कहा कि वे इस्‍तीफा दे चुके हैं. काम करते लम्‍बा अरसा हो गया था इसलिए बदलाव जरूरी था. उन्‍होंने ओबरा से कांग्रेस का टिकट मिलने पर चुनाव लड़ने की अपनी योजना भी बताई. राहुल ने माना कि पन्‍द्रह सालों तक काम करने के बाद उन्‍होंने तीन महीने पहले ही इस्‍तीफा देने की बात बनारस के अपने वरिष्‍ठों को बता दी थी. उन्‍होंने दूसरे किसी अखबार के साथ जुड़ने की भी संभावना जताई.

अब बनारस कार्यालय में राहुल श्रीवास्‍तव की हनक देखिए.जब राहुल के बाबत संपादक अनिल भास्‍कर से बर्खास्‍तगी या इस्‍तीफे की बात की गई तो उन्‍होंने कहा ऐसी कोई बात नहीं है. इस संदर्भ में एचआर मैनेजर लोकनाथ सिंह से जानने की कोशिश की गई तो उन्‍होंने भी इससे इनकार किया. अब यह कैसे संभव है कि राहुल ने इस्‍तीफा दिया या बर्खास्‍त हो गए और यूनिट के दो वरिष्‍ठों को इसकी जानकारी ना हो. अब किसे सच माना जाए राहुल को या फिर संपादक को. अब बताते हैं आपको इस इनकार की असली कहानी. पिछले सत्‍ताइस साल से सोनभद्र में पत्रकारिता कर रहे राहुल श्रीवास्‍तव ने अच्‍छा खासा आर्थिक साम्राज्‍य स्‍थापित कर लिया है, जिसकी बदौलत वे चुनाव लड़ने की भी तैयारी कर रहे हैं.

बीते 11 सितम्‍बर को उन्‍होंने अपने संपादक के लिए चंदौली स्थित पर्यटन स्‍थल राजदरी और देवदरी में घुमाने का पूरा कार्यक्रम भी आयोजित किया था. राहुल की खूबी रही है कि वो लोगों को जोड़ने में विश्‍वास रखते हैं, और जोड़ने के लिए पद के हिसाब से ओबलाइज किया जाता रहा है. सूत्रों का कहना है कि संपादक ने दो-तीन बार राहुल को हिंदुस्‍तान में परमानेंट करने के लिए संस्‍तुति भी की, परन्‍तु बात नहीं बन पाई. इसी बीच उच्‍च स्‍तर पर तमाम शिकायतों के बाद राहुल को हटा दिया गया. राहुल श्रीवास्‍तव हिंदुस्‍तान से पहले सन्‍मार्ग, पायनीयर, स्‍वतंत्र भारत को भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं. वे हिंदुस्‍तान से उस दौर से जुड़े हुए थे जब अखबार लखनऊ से प्रिंट होकर आता था.

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0 Comments

  1. sanjay

    September 23, 2011 at 5:18 pm

    नमस्कार यशवंत जी
    यशवंत जी आपने भड़ास निकालने की परिभाषा ही बदल दी.पत्रकारिता में भाषा शैली का जो महत्व होता है कम से कम उसे बचाए रहने की आवश्यकता और जिम्मेदारी आपके मंच की रहनी चाहिए थी.लेकिन जिस भाषा में आपके यहाँ खबरों पर कमेन्ट हो रहे है यह आपके द्वारा कथित रूप से नम्बर वन कहे जाने वाले पोर्टल के चरित्र को परिभाषित करता है.यह आपके अधिकार क्षेत्र में है की किस तरह के समाचार और कमेन्ट प्रकाशित किये जाएँ.यशवंत जी यह आपके और आपके मंच के लिए निहायत शर्मनाक है.इसी तरह आप कार्य करते रहे तो जो आपको दूर दूर से भी नहीं जानता है वह भी आपके और आपके अपनों का झूठा चरित्र परिभाषित कर सकता है,क्या तब भी आप उसे प्रकाशित कर
    अपने पोर्टल की जिम्मेदारियों का बखान करेंगे.नंबर वन होने की मर्यादा कायम रखे.

  2. amit singh

    September 23, 2011 at 9:07 am

    rahul karporet jagat ke bde dalal hai. unhe aage barane me unki vivi ka hath hai. khanan ki pahari ka ptta aur parmit ki kalabajari se karoro rupay kmaya, lekin ijjat nahi. hindustan ke sr. manager rahe yadvesh se lekar tmam smpadko ko sonbhsdra aur varanasi me daru-larki uplbd karata raha hai.

  3. monu

    September 23, 2011 at 3:29 pm

    bhai yaswant, sirph rahul par kichar uchalna kahi se jayaj nahi hai. awes ko bhale hero bana rahe hon. schhai yah hai ki awes awadg khanan men gahre dube huye hain. unke upa obra men awadh kanan. chopan me awath wasuli jaise kaie mamle drj hai. esko bhi ujagar karen taki emandari ka dhong rachme wale awes ka sahi chwhra bwnkab ho sake

  4. pradeep verma

    September 23, 2011 at 10:25 pm

    Hindustan bareilly me bhi Pilibhit ka bureau incharge sandeep singh bhi 1no. ka chor hai. usne ek reportar tarik qureshi ko rakh liya jo ki taskar hai.reportar ram nivash sharma randibaji karta hai.amar ujala wale rajesh ke sang yes saala bhi lene gaya tha police chape se 5minute pahle hi lekar nikal bhaga tha varna ram nivash sharma bhi rajesh ke saath jail me hota. reporter furkan hashmi NGO chalane walo ka dalal hai. puranpur ka patrakar satish mishara tel mafiya hai aur khule aam dalali karta hai. bisalpur ka patrakar patiram gangwar to dalali kar kar ke kuch din pahle motorcycle khareed laya hai. sandeep singh khud hi doo kaudi ka inshan hai. saale ke pass se badboo aati hai. choron ka sargana bana baitha hai. in sabko bareilly me baitha NEWS EDITOR Yogendra singh rawat paise khakar paal raha hai. ashish vyas ji jaag jaiye varna yeh saale aapko barbad kar denge.

  5. PRAVEEN RAINA

    September 24, 2011 at 6:20 am

    न तो आप लोग राहुल के बारे में जानते हैं न हिंदुस्तान के सम्पादक अनिल भास्कर जी के बारे में ,सिर्फ उसूलों के लिए सहारा जैसे प्रतिष्ठित अखबार से इस्तीफा देकर हिंदुस्तान में काम करने वाले अनिल भास्कर अपनी ईमानदारी और काम करने के तौर -तरीकों से हर जगह प्रतिष्ठित हैं |जहाँ तक राहुल का सवाल है ,भाषाई पत्रकारिता को अपने बहुमूल्य सत्ताईस साल देने वाले राहुल श्रीवास्तव उन गिने चुने लोगों में से एक है जिन्होंने सोनभद्र के आम आदमी कि आवाज को अपनी कलम की स्याही दी है चाहे वो सीमेंट कर्मियों का मामला हो चाहे भूख से मौत का ,चाहे आदिवासी कन्याओं के विवाह का |जहाँ तक उनकी आर्थिक स्थिति का सवाल है वो खानदानी रईस रहे हैं कोई माई का लाल साबित नहीं कर सकता कि उन्होंने कभी किसी से एक पैसा लिया हो या किसी को दिया हो ,राहुल ज़ी की पत्नी पिछले दो दशकों से स्वतंत्र भारत की ब्यूरो प्रमुख हैं और जनता गवाह है , दोनों पत्रकार युगलों ने कभी भी कह्बरों के साथ समझौता नहीं किया है |इस सम्मानित पोर्टल पर इस तरह की ख़बरें छापा जाना बेहद शर्मनाक है ,हम इसकी भर्त्सना करते हैं |

  6. PRAVEEN RAINA

    September 24, 2011 at 6:20 am

    न तो आप लोग राहुल के बारे में जानते हैं न हिंदुस्तान के सम्पादक अनिल भास्कर जी के बारे में ,सिर्फ उसूलों के लिए सहारा जैसे प्रतिष्ठित अखबार से इस्तीफा देकर हिंदुस्तान में काम करने वाले अनिल भास्कर अपनी ईमानदारी और काम करने के तौर -तरीकों से हर जगह प्रतिष्ठित हैं |जहाँ तक राहुल का सवाल है ,भाषाई पत्रकारिता को अपने बहुमूल्य सत्ताईस साल देने वाले राहुल श्रीवास्तव उन गिने चुने लोगों में से एक है जिन्होंने सोनभद्र के आम आदमी कि आवाज को अपनी कलम की स्याही दी है चाहे वो सीमेंट कर्मियों का मामला हो चाहे भूख से मौत का ,चाहे आदिवासी कन्याओं के विवाह का |जहाँ तक उनकी आर्थिक स्थिति का सवाल है वो खानदानी रईस रहे हैं कोई माई का लाल साबित नहीं कर सकता कि उन्होंने कभी किसी से एक पैसा लिया हो या किसी को दिया हो ,राहुल ज़ी की पत्नी पिछले दो दशकों से स्वतंत्र भारत की ब्यूरो प्रमुख हैं और जनता गवाह है , दोनों पत्रकार युगलों ने कभी भी कह्बरों के साथ समझौता नहीं किया है |इस सम्मानित पोर्टल पर इस तरह की ख़बरें छापा जाना बेहद शर्मनाक है ,हम इसकी भर्त्सना करते हैं |

  7. Rahul

    September 24, 2011 at 8:37 am

    श्री मोनू जी ये आपसे किसने कहा की आवेश पर ओबरा में अवैध खनन और चोपन में अवैध वसूली को लेकर मुक़दमा दर्ज है| आप द्वारा कही गयी बातों से साफ़ जाहिर होता है की आपको आवेश से या तो कोई व्यक्तिगत दुश्मनी है या तो आप विकृत दिमाग के इंसान हैं और बात रही अमित सिंह जी आपकी आप तो मोनू जी से भी दो हाथ आगे निकले | कोई किसी व्यक्ति को बदनाम करने के लिए उसे ही नहीं उसके पुरे परिवार को भी बदनाम करे ये न्यायोचित नहीं है | बात रही राहुल श्रीवास्तव की तो उन्होंने अपने पत्रकारिता काल में कभी भी दूसरों की बुराई नहीं की | हाँ भले ही उन्होंने अपने पत्रकारिता के साथ अपने काम को भी ज्यादा से ज्यादा महत्व दिया | जिसके बदौलत आज वो इंसान तरक्की की इतनी सीढियाँ चढ़ा न की आप द्वारा बताई गयी बातों के बदौलत | कृपया किसी भी व्यक्ति के सम्मान को ठेस न पहुंचाए

  8. Rahul

    September 24, 2011 at 3:12 pm

    श्री मोनू जी ये आपसे किसने कहा की आवेश पर ओबरा में अवैध खनन और चोपन में अवैध वसूली को लेकर मुक़दमा दर्ज है| आप द्वारा कही गयी बातों से साफ़ जाहिर होता है की आपको आवेश से या तो कोई व्यक्तिगत दुश्मनी है या तो आप विकृत दिमाग के इंसान हैं और बात रही अमित सिंह जी आपकी आप तो मोनू जी से भी दो हाथ आगे निकले | कोई किसी व्यक्ति को बदनाम करने के लिए उसे ही नहीं उसके पुरे परिवार को भी बदनाम करे ये न्यायोचित नहीं है | बात रही राहुल श्रीवास्तव की तो उन्होंने अपने पत्रकारिता काल में कभी भी दूसरों की बुराई नहीं की | हाँ भले ही उन्होंने अपने पत्रकारिता के साथ अपने काम को भी ज्यादा से ज्यादा महत्व दिया | जिसके बदौलत आज वो इंसान तरक्की की इतनी सीढियाँ चढ़ा न की आप द्वारा बताई गयी बातों के बदौलत | कृपया किसी भी व्यक्ति के सम्मान को ठेस न पहुंचाए |

  9. monu

    September 26, 2011 at 7:59 am

    rahul ji, chikni-chupri bato sw sach chip nahi jata. jo sachhai thi wahi hamne samne rakhi. lagata hai sayad apko apna koi hit prabhawit hone laga tabhi to ap awes ke galat kamo ko emandari ka chola pahnane lage hain.

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