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शशि शेखर जी, क्या मेरे साथ इंसाफ होगा

: अब तो जी में आता है कि आत्महत्या कर लूं : आदरणीय प्रधान संपादक जी, प्रणाम! मैं धनंजय कुमार पिछले दो वर्षों से हिन्दुस्तान, मोतिहारी में बतौर स्ट्रिंगर कार्यरत रहा हूं. आप हिन्दुस्तान परिवार के सर्वोच्च अभिभावक हैं इसलिए मेरे साथ जो कुछ घटित हुआ है, उस मामले में आपको पूरी जानकारी देने के साथ इंसाफ की आस में आपसे गुहार भी लगा रहा हूं.

: अब तो जी में आता है कि आत्महत्या कर लूं : आदरणीय प्रधान संपादक जी, प्रणाम! मैं धनंजय कुमार पिछले दो वर्षों से हिन्दुस्तान, मोतिहारी में बतौर स्ट्रिंगर कार्यरत रहा हूं. आप हिन्दुस्तान परिवार के सर्वोच्च अभिभावक हैं इसलिए मेरे साथ जो कुछ घटित हुआ है, उस मामले में आपको पूरी जानकारी देने के साथ इंसाफ की आस में आपसे गुहार भी लगा रहा हूं.

साथ ही इस सच्चाई से भी अवगत कराना चाहता हूं कि कैसे अपराधिक प्रवृति वाले छुटभैये जनप्रतिनिधि के आवेदन पर मेरा डेट लाइन बंद कर दिया गया. क्योंकि एडिटोरियल में उसके स्वजातीय बैठे हैं. मैंने बीते सप्ताह शहर के एक मोहल्ले में घटिया नाला निर्माण को लेकर खबर लिखी थी. खबर छपने के बाद प्रशासन ने निर्माण की जांच कराई तथा अनियमितता पाए जाने पर काम रोक दिया. इसके चलते नाली निर्माण करा रहे वार्ड पार्षद मणिभूषण श्रीवास्तव अपने गुर्गों के साथ अखबार के कार्यालय में घुसकर हम पत्रकारों के साथ तू-तू मैं-मैं करने लगा. उसने ऊपरी पहुंच के बल पर देख लेने की धमकी भी दी.

और देखिए उसकी धमकी सच भी निकली क्योंकि वो पटना जाकर कार्यकारी संपादक अकु श्रीवास्तव से मेरी झूठी शिकायत की. इस प्रकरण की जांच के लिए मुजफ्परपुर यूनिट के एनई विवेक श्रीवास्तव आए, पर जाँच के नाम पर महज खानापूर्ति हुई और पक्षपात करते हुए मेरा डेट लाइन बंद कर दिया गया. यहां आपको बता दूं कि वार्ड पार्षद मणिभूषण श्रीवास्तव अपराधिक प्रवृति का है. इस सच्चाई से शहर का जर्रा-जर्रा वाकिफ है. अभी भी स्थानीय थाने में उस पर कई संगीन मामले दर्ज हैं, जिनका मुकदमा कोर्ट मे चल रहा है. इतना ही नहीं उससे मेरी जान को भी खतरा हो गया है. इस पूरे प्रकरण में मेरा बस इतना ही कसूर है कि मैंने सच लिखा. दूसरा यह कि मैं जाति से ब्राह्मण (भूमिहार) हूं और अखबार में मेरे बचाव के लिए ऊपर से नीचे तक कोई सगा-संबंधी नहीं है. मैं इस घटना को लेकर फैलाई गई झूठी अफवाहों से भी काफी आहत हूं और जी में आता है कि आत्महत्या कर लूं.

धनंजय कुमार

मोतिहारी

मोबाइल – 09431053219

[email protected]

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0 Comments

  1. Amit kumar

    September 26, 2011 at 6:34 am

    bhaya galat jagah fariyaad ki hai shashi se jyada harami to aur koi hi nahi hai

  2. Babloo

    September 26, 2011 at 7:40 am

    are bhai aap kisase nayaay ki ummid kar rahe ho jo khud bhi jatiwad ka poshak hai yah sahab jab amar ujala me they tab isi prakar ki ghatana up ke siddharth nagar jiley me eak reporter ke saath ho gaya tha bus reporter ko akhbar se na keval nikala gaya balki uske virudh gaman ka ultey kesh kar diya aur eak sapa neta ko bansi tahsil prabhari banaya gaya kyonki siddharth nagar ka jila prabhari srivastav tha aur gorakhpur unit me news editor uska relative upar se sashishekar sinha……………… aub yahi hal hindustan ka ho raha hai…………

  3. nishikant

    September 26, 2011 at 10:22 am

    Bilkul mangadhant baat hai Babloo ji. Tathyon ki jankari kar le uske baad hi likhen. Aaku ji Amar Ujala me kabhi bhi Gorakhpur nahin dekhte the. Meerut, Jalandhar ke baad unhone keval Allahabad aur Varanasi ki unit hi dekhi. Gorakhpur se unka koi sambandh kabhi nahi raha ye baat Amar Ujala ka har aadmi janta hai. Gorakhpur launch ke baad to Aaku ji ne Amar Ujala chod hi diya aur Hindustan Chandigarh join kar liya tha. Dusri baat ki Gorakhpur Amar Ujala me koi bhi Sampadak kayastha nahi raha aur Yashoda Srivastava vaha ke bahut purane patrakar hain. Pahle Sampadak the Manoj Tiwari fir aaye K.K.Upadhyay aur uske baad Mrityunjay jo ki abhi bhi hain. Aapki jankari ke liye bata du ki Shashi Shekhar ji bhi Kayastha nahin hain. Likhna hai to tathyon ke saath likhen sirf likhne ke liye kya likhna.

  4. RUPAK

    September 26, 2011 at 1:58 pm

    भाई अक्कु तो पैसा का भूखा है. उसे भी कुछ मिल गया होगा. एक स्टर्ीगंर का उसके लिए महत्व ही क्या है, शशिशेखर आज बहुत बड़े पत्रकार है, मगर उन्हें भी सुनिल दूबे से सबक लेनी चाहिए.

  5. BIJAY SINGH

    September 26, 2011 at 5:50 pm

    ye upar baithe kya jane…niche walo par kya gujari hai…
    shashi ji se koyi ummid mat rakhiye.. nirnay
    nahi le pate hain…

  6. puran chand

    September 27, 2011 at 9:53 am

    धनंजय जी,

    बहुत कमज़ोर कैरेक्टर के आदमी लगते हो तुम .

    मरना ही है , तो दो-चार को मार कर मरो .

    देह में आग लगा कर , या विस्फोटक बाँध कर अकू श्रीवास्तव से लिपट जाओ .

    नया इतिहास बनेगा .

    लेकिन आप जैसे लोग ऐसा कर नहीं सकते , इसके लिए बहुत बड़ा जिगरा चाहिए .

    अरे भाई , बड़े- बड़े दिग्गज अखबार , टीवी से हटा दिये जाते हैं , पर वे आत्महत्या नहीं करते .

    एक दरवाज़ा बंद होता है , तो दस दरवाज़े खुलते हैं .

    बस अपने काम के प्रति इमानदार रहें .

    ब्राह्मन-भूमिहार का प्रलाप ना हीं करें , तो अच्छा है .

    बिहार -यूपी में यह भयंकर बीमारी है .

    तुरंत जात से जोड़ने की बीमारी .

    शशि शेखर , जात से ब्राह्मन ज़रूर हैं , पर वे जहाँ बैठे हैं, वहां उनके खास सलाहकार कायस्थ हैं .

    शाम को उनके दारु का पेग दक्षिण भारतीय और अन्य जाति-धर्म के लोग बनाते हैं .

    अर्थात, एक मुकाम पर पहुँचने के बाद बड़े लोग जाति -धर्म से ऊपर उठ जाते हैं .

    जिससे उनका स्वार्थ सिद्ध होता है, वही उनकी जाति है .

    इसलिए, जाति-वाती का रोना छोड़ो, और नए रास्ते की तलाश करो .

  7. shreeram

    October 3, 2011 at 7:46 am

    dhanu yeh tumhare ghar parosh ka mamla hai. tum to mani ke khilaph chunav bhi lad chuke ho. usme bhi tum votkatva hi rahe. uske khilaph khabar chhapa to uska paksh kyon nahi likha. jab tumko itni bhi patrakarita nahi aati hai to koi kya bachaiga. tum pahle bolna, chalna aur likhna sikho fir koi tumhari pairvi karega – bhumir samaj sangthan se juda shreeram

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