अब तक वीआईपी लोगों के कार्यक्रम और प्रेस कांफ्रेंस में जूता-चप्पल चलने की ख़बरें आती थी. लेकिन इस बार एक प्रेस कांफ्रेंस में पत्रकार का जूता ही चोर उड़ा ले गए. यह कारनामा तब हुआ जब झारखण्ड के उपमुख्यमंत्री सुदेश महतो चक्रधरपुर में पत्रकार सम्मलेन को संबोधित कर रहे थे. सभी दैनिक अख़बार के प्रतिनिधि सुदेश महतो से सवाल करने पहुंचे थे.
उपमुख्यमंत्री से सवाल-जवाब करना था, लिहाजा यह दिन अंचल के पत्रकारों के लिए खास था. पत्रकार दुल्हे की तरह बन संवरकर प्रेस कांफ्रेंस में पहुंचे थे. पत्रकारों की इस जमात में दैनिक भास्कर का एक पत्रकार बबलू मंडल भी शामिल था. करीब आधे घंटे तक प्रेस कांफ्रेंस चला. शाम ढल चुका था, लिहाजा पत्रकार खबर भेजने की होड़ में हड़बड़ा कर बाहर निकले. दैनिक भास्कर के पत्रकार बबलू मंडल भी कमरे से बाहर निकले. बाहर निकलते ही बबलू मंडल की परेशानी बढ़ गयी.
दरअसल बबलू मंडल ने शिष्टाचार का परिचय देते हुए अपने जूते कमरे के बाहर उतार दिए थे, वापस लौटने के क्रम में उसे नहीं मिल रहे थे. शाम ढलने के साथ पीक आवर शुरू हो चुका था. समय घोड़े की रफ्तार से दौड़ रहा था. पत्रकार बबलू मंडल बदहवास होकर कमरे के बाहर यहाँ-वहाँ जूते की खोज में लग गए. आधा घंटा बीत गया लेकिन उनको जूता नहीं मिला. बबलू मंडल समझ गए कि अब उनका जूता उन्हें वापस मिलने से रहा. आख़िरकार वे मायूस होकर नंगे पैर वापस अपने दैनिक भास्कर कार्यालय लौट आये. बबलू मंडल ने अपनी छोटी सी कमाई से 800 रुपये खर्च कर हफ्ते भर पहले जूता ख़रीदा था. एक पत्रकार की इस तरह उपमुख्यमंत्री के दरबार में जूता चोरी होने की खबर को लोग चौक-चौराहों पर चुटीले अंदाज में एक दूसरे के साथ बाँट रहे हैं. कुछ लोग तो अब यह भी कहने लगे हैं कि मंदिर से भगाए जूता चोर शायद अब उपमुख्यमंत्री सुदेश महतो के साथ रहने लगे हैं.
एक पत्रकार द्वारा भेजा गया पत्र.












कुमारसौवीर, लखनऊ
September 27, 2011 at 6:07 pm
बी4एम जी,
आपने यह नहीं बताया कि अपना यह जूता उन्होंने आखिर उस प्रेस कांफेंस में उतारा ही क्यों था।
मुंतजिर अली बनने की ख्वाहिश थी उनमें या फिर चिंदबरम जैसा कोई नया हादसा टालने की गरज