: नवज्योति ने 917 दस्तावेज पेश किए थे और 18 हजार रुपए कोर्ट फीस दी थी : अदालत के एक फैसले से दैनिक नवज्योति को जोरदार झटका लगा है। बगैर किसी लिखित अनुबंध या नियुक्ति पत्र के संवाददाताओं से समाचारों के साथ विज्ञापन, सर्कुलेशन आदि काम लेने का अखबारों का मनमाना रवैया भी इस फैसले से अदालत के रिकॉर्ड पर उजागर हुआ है।
अजमेर की एक अदालत ने दैनिक नवज्योति का वह दावा खारिज कर दिया है, जो उसने अपने जोधपुर संस्करण के पूर्व ब्यूरो और पूर्व उपमहाप्रबंधक रजनीश छंगाणी से 3 लाख 65 हजार 885 रुपए की वसूली के लिए दायर किया था। नवज्योति प्रबंधन ने मैसर्स नवज्योति प्रिंटिंग प्रेस के नाम से दायर किए इस दावे में रजनीश छंगाणी के खिलाफ अदालत में 917 दस्तावेज पेश किए थे और 18 हजार 366 रूपए की कोर्ट फीस अदा की थी। नवज्योति ने अपने पूर्व प्रतिनिधियों के खिलाफ ऐसे ही कई और दावे अदालतों में दायर किए हुए हैं।
रजनीश छंगाणी दैनिक नवज्योति जोधपुर के डाक संस्करण के संवाददाता थे। जून 2004 में जब नवज्योति जोधपुर से छपना शुरू हुआ तो छंगाणी को उस संस्करण का उप महाप्रबंधक बना दिया गया। छंगाणी तब भी समाचारों का ही काम देखते थे। बाद में नवज्योति ने छंगाणी को हटा दिया और जोधपुर संस्करण में इसकी आम सूचना भी विज्ञापन के रूप में प्रकाशित की। नवज्योति के भागीदार और प्रधान संपादक दीनबंधु चौधरी ने बाद में अजमेर की अदालत में दावा दायर कर रजनीश छंगाणी पर आरोप लगाया कि उन्होंने विज्ञापन बुक कराए और विज्ञापन राशि के 2 लाख 76 हजार 471 रुपए जमा नहीं कराए। इस मूल रकम और इस पर 89 हजार 454 रुपए के ब्याज समेत कुल 3 लाख 65 हजार 885 रुपए छंगाणी से दिलाने की प्रार्थना अदालत से की गई।
गवाही के दौरान दीनबंधु चौधरी अदालत को यह बताने में नाकाम रहे कि रजनीश छंगाणी किसी छंगाणी न्यूज सर्विस नामक फर्म के मालिक, एजेंट या प्रतिनिधि थे। चौधरी से जब अदालत में सवाल किए गए कि रजनीश छंगाणी या छंगाणी न्यूज सर्विस से उनका कोई लिखित अनुबंध विज्ञापन भेजने बाबत हुआ था या नहीं या रजनीश छंगाणी को उन्होंने कोई नियुक्ति पत्र बतौर संवाददाता या उप महाप्रबंधक दिया था या नहीं तो चौधरी हर सवाल का जवाब ‘बता नहीं सकता’, ‘याद नहीं है’ कहकर टाल गए। चौधरी एक ही बात पर कायम रहे कि न्यूज सर्विस का काम विज्ञापन भेजना होता है और रजनीश छंगाणी भी विज्ञापन भेजने और उनकी रकम वसूली का काम करते थे और उनके बुक करवाए गए विज्ञापनों की रकम उन्होंने जमा नहीं करवाई।
रजनीश छंगाणी ने अपनी गवाही और जवाब में अदालत को बताया कि जो विज्ञापन जोधपुर कार्यालय में आते थे उन्हें वे अजमेर कार्यालय को भेज दिया करते थे, परंतु उनकी बुकिंग, बिलिंग, वसूली से उनका कोई लेना-देना नहीं था। उनका काम समाचार भेजने तक ही सीमित था। उपमहाप्रबंधक बनाए जाने के बाद भी उनका विज्ञापन काम से नाता नहीं रहा।
अपर जिला न्यायाधीश उमाशंकर व्यास ने फैसले में कहा कि नवज्योति की ओर से रजनीश छंगाणी को उप महाप्रबंधक नियुक्त किए जाने का कोई लिखित आदेश नहीं है और ना ही ऐसा कोई लिखित अनुबंध है, जिससे दोनों पक्षों के बीच विज्ञापन प्रकाशन आदि की शर्तों का खुलासा होता हो। नवज्योति यह साबित नहीं कर पाया है कि रजनीश छंगाणी का स्वतंत्र हैसियत से प्रकाशित विज्ञापनों की बकाया राशि एकत्रित करने और भिजवाने का दायित्व रहा हो।
अदालत ने नवज्योति की कार्यप्रणाली पर टिप्पणी करते हुए कहा, ‘नवज्योति संस्थान एक बड़ा व्यावसायिक प्रतिष्ठान है तथा स्वाभाविक रूप से अनुबंध की शर्तें, नियुक्ति पत्र आदि दस्तावेज का लिखित में होना अपेक्षित है। उपरोक्त दस्तावेज प्रस्तुत नहीं होने से विपरीत उपधारणा नवज्योति के विपरीत निकलती है। नवज्योति को अपना मामला प्रमाणित करना था, वह रजनीश छंगाणी की कमजोरी का लाभ नहीं ले सकता है।’
अदालत ने कहा कि अनुबंध के अभाव में विज्ञापनदाता की बकाया राशि के लिए रजनीश छंगाणी को दायित्वाधीन नहीं माना जा सकता। रजनीश छंगाणी ने विज्ञापनदाता से यह राशि प्राप्त कर ली ऐसी भी सामग्री या साक्ष्य पत्रावली पर नहीं है। यद्यपि साक्ष्य से यह प्रमाणित है कि तत्समय रजनीश छंगाणी नवज्योति के नियोजन व नियंत्रण में था अतः उसे नवज्योति का एजेंट होना नहीं माना जा सकता। विकल्प में एक बार यह माना भी जाए कि रजनीश छंगाणी नवज्योति का एजेंट था तब भी एजेंसी की शर्तों के विपरीत एजेंट द्वारा कार्य करने पर उसका व्यक्तिगत दायित्व बनता है, ऐसी कोई शर्त मौखिक या लिखित होना प्रमाणित नहीं हुआ है।
अदालत ने इसी आधार पर रजनीश छंगाणी पर नवज्योति की कोई रकम बकाया नहीं होने का फैसला सुनाया और रकम तथा उस पर ब्याज का वसूली का मामला नहीं बनना पाते हुए दावा खारिज कर दिया। मालूम हो कि रजनीश छंगाणी वर्तमान में जोधपुर से प्रकाशित दैनिक तरूण राजस्थान के संपादक एवं प्रकाशक हैं। रजनीश छंगाणी की ओर से अदालत में पैरवी एडवोकेट राजेंद्र हाड़ा ने की।











