गलतियां करना इंसान की फितरत होती है. हर कोई गलती करता है. पर जब यह गलती आदत बन जाए तब स्थितियां दुखदाई हो जाती है. कुछ ऐसा ही हिंदुस्तान, बरेली में हो रहा है. अमूमन हर अखबार में गलतियां होती हैं क्योंकि वहां इंसान काम करते हैं. कभी मात्रा छूट जाता है तो कभी शब्द बदल जाते हैं, पर आजकल सभी अखबार इस तरह की गलतियां करने लगे हैं और हिंदुस्तान इस मामले में तेजी से इनका लीडर बनता जा रहा है.
पहले भी अखबारों में गलतियां होती रही होंगी, पर शायद उनकी संख्या नगण्य होंगी या फिर अब पाठक वर्ग ही ज्यादा जागरुक हो गया है, जो तमाम अखबारों की गलतियों को नोट करके

हिंदुस्तान, बरेली की खबर
अभी दो दिन पहले हिंदुस्तान, बरेली से जुड़े बदायू संस्करण में तो रामायण का पूरा सार ही बदल दिया गया था. रामलीला को ‘सत्य

दैनिक जागरण
अभी दो दिन पहले ही एक पाठक ने जागरण पर हिंदुस्तान की खबर से कॉपी करके खबर लिखने की सूचना भेजी थी. उसे भी अभी ज्यादा दिन नहीं हुए हैं कि जागरण ने एक बार फिर ब्लंडर कर दिया है. भाजपा के पूर्व अध्यक्ष राजनाथ सिंह की खबर में राजनाथ की जगह कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह की फोटो प्रकाशित कर दी गई है, जबकि उस खबर में दिग्विजय सिंह के नाम का कहीं जिक्र भी नहीं है. गलत नाम प्रकाशित करने की ऐसी ही कुछ गलती अमर उजाला आगरा ने तीन-चार दिन पहले की थी.
खबरों को देखकर तो यही लग रहा है कि अब इन अखबारों के पास स्तरीय पत्रकार नहीं रहे या फिर बड़े पदों पर बैठे लोगों ने अपने नाकाबिल भाई-भतीजों, रिश्तेदारों को पत्रकार बनाकर नौकरी का अस्तूरा बांट दिया है, जो इधर-उधर हाथ चलाकर पत्रकारिता को काट-छील रहे हैं, घायल कर रहे हैं. अब इन बड़े मीडिया हाउसों को यह भी समझना चाहिए कि आज का पाठक अब इतना मूर्ख नहीं रहा कि आप जो भी परोस देंगे वो पढ़ लेगा.

हिंदुस्तान, बरेली में छपी खबर

हिंदुस्तान, बरेली












amitgupta
October 13, 2011 at 2:50 pm
Hindustan mei bhai bhatija waad chal raha hai, ye sab patrakarita k dushman hain.
raja
October 13, 2011 at 4:21 pm
भैया हिंदुस्तान की नौकरी को सरकारी नौकरी कहा जाता है अगर गलती करदी तो क्या बात हैं नौकरी तो सरकारी हैं जाएगी थोड़े ही ना फिर घबरा ना किस बात का कोई बात नहीं जमकर गलती करो मेरे हिन्दुस्तानी शेर । क्योंकि नौकरी सरकारी हैं।
kumarkalpit
October 13, 2011 at 10:14 pm
RAJA BHAI WO DIN GAYE JAB WALE MIYAN FHAKTA MARA KARTE THEYEE..AAJ KI TARIKH ME HINDUSHTAN ME KOI KARMCHAREE HAI KAYA. THEKE PAR PATRAKARITA HO RAHEE HAI..SAMPADAK SE LEKAR JUNIYAR SAB EDITOR TAK THEKE PAR HAI.RAHEE BAAT GALTIYON KI TVO ISH MAMLE ME RASHTRIYA SAHARA KA DEHRADUN SANSHKARAN SAB KA BAAP HAI.MAJAL HAI KI KISEE DIN KOI GALTEE NA HO.. :);)
Amit sharma
October 14, 2011 at 6:50 am
गनीमत है कि हिंदुस्तान ने गांड फिलाने ही लिखा है कही गांड फैलाने का कम्पटीशन नहीं बना दिया नहीं तो सीधा सीधा खबर का मतलब हो जाता कि जो महिला सबसे ज्यादा गांड फैलाएगी उसे दस हज़ार रूपए दिए जायेंगे. आखिरकार कम्पटीशन महिलाओं का है. हिंदुस्तान बरेली जो कर दे वह कम है बरेली में चूतिये बैठे है जो सम्पादक के खुट्टे साधकर नौकरी कर रहे है. एनई, डीएनई जैसे बड़े पदों पर चूतिये बैठा दिए गए है, ब्यूरो चीफ भी सम्पादक को पैसा दे रहे है तभी उनकी नौकरी चल रही है
s.k.singh
October 14, 2011 at 7:32 am
sabse pahle news editor rawat phir d.n.e. mayank ko laat maarkar baahar kiya jay. jo ki desk ke logon ko sirf pareshan kar ungli karte rahte hai aur kaam nahi karne dete hai.
Indu
October 15, 2011 at 9:26 am
ये खबरें भडास के पास कोई पाठक नहीं जागरण वाले ही भेज रहे हैं, आज कल जागरण में समाचारों के कम्पैरिजन का काम और कर्मचारियों पर हंटर बरसाने का काम बहुत तेजी से हो रहा है, इस पर पूरी डिटेल मैं आपको जल्द ही भेजूंगी