जबलपुर में पत्रकारिता के क्षेत्र में वर्षों से चल रहे स्थायित्व का दौर खत्म होने वाला है। शहर में सिर्फ दो या तीन समाचार पत्रों के ही होने से पत्रकारों के पास विकल्प नहीं थे। अब तीन बड़े पत्र समूहों के जबलपुर में आने की चर्चा से यहां के पत्रकारों में हलचल मची है। जबलपुर से राज एक्सप्रेस, हरिभूमि और पत्रिका के शुरू होने की चर्चाओं ने मीडिया जगत में हलचल पैदा कर दी है। पत्रकारों के लिए यह आईपीएल (इंड़ियन प्रेस लीग) काफी उत्तेजक है। पुरानी जंग लगी तलवारें भी बाजार में चमकने लगी हैं। हरिभूमि और राज एक्सप्रेस के दफ़्जर शुरू हो गये है। राज ने जबलपुर के चर्चित पत्रकार चैतन्य भट्ट को स्थानीय संम्पादक बनाया है।
हरिभूमि भी स्थानीय पत्रकार को संपादक बनाने के प्रयास में है। उनका एक प्रयास असफल हो गया। सुशील तिवारी से भास्कर, जबलपुर के अंतिम दौर की बातचीत असफल होने की चर्चा गर्म है। इससे पहले सांध्य दैनिक यश भारत ने कदम रखा था तब कुछ लोगों को आस बंधी थी। नई दुनिया जब जबलपुर आया तो शहर के साथ-साथ प्रदेश और प्रदेश के बाहर के पत्रकारों को मौका मिला। अब नए अखबार पुराने जमे जमाए पत्रकारों को तोड़ने की जी तोड़ कोशिश में लगे है। विकल्प बढ़ने से पत्रकारों ने भी बोली बढ़ा दी है। इलेक्ट्रानिक मीडिया छोड़कर वापस प्रिंट में लौटने वालों को मौके की तलाश है।
-जबलपुर से एक रिपोर्ट
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