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निरर्थक ही तो हैं ऐसे राशिफल

विनय बिहारी सिंहअखबारों और पत्रिकाओं में आमतौर पर जो राशिफल छप रहे हैं, उनमें एक नई बात दिख रही है। टीवी पर भी यही हाल है। अब इनमें भविष्यवाणी की जगह सुझाव लिखे जा रहे हैं। टीवी पर भी। आपको यह नहीं करना चाहिए, या यह करना चाहिए। चार लाइन ही तो छपना है, या बोलना है।  बस पूरा राशिफल सुझावों से भर दीजिए। इसे अंग्रेजी ने शुरू किया और हिंदी ने प्यार से अपना लिया।  सुझावों को लिखने या बोलने में परिश्रम कम लगता है। अपने देश में सुझाव ही तो बहुतायत में मिलते हैं। एक भविष्यवक्ता टीवी पर कह रहे थे कि अगला सूर्य ग्रहण बहुत खराब फल देने वाला है। देखा जाये, कितना खराब फल होता है। पर यह तो लोगों को डराना है। ऐसे न जाने कितने सूर्य ग्रहण आए और गए, कुछ तो नहीं हुआ। डराने की भाषा से हमें परहेज करना होगा।  ऐसा नहीं कि पहले जो राशिफल छपते थे, वे बहुत काम के होते थे। साप्ताहिक या मासिक राशिफलों का भी यही हाल है। इनमें काम की चीज तो कोई होती नहीं। राशिफल पढ़ना एक तरह की लत है। आपने राशिफल चाव से पढ़ा और थोड़ी देर बाद उसे भूल गए। पूरे दिन वह राशिफल आपके दिमाग से गायब ही रहा। इस बीच दिन भर आपके साथ अच्छा हुआ या कि बुरा, इसे आप राशिफल से तो बिल्कुल नहीं जोड़ते। एक सामान्य सी भविष्यवाणी होती है। जैसे- मान लीजिए आप साप्ताहिक राशिफल पढ़ रहे हैं। पहले इस तरह राशिफल लिखे जाते थे- सप्ताह का अधिकांश समय लाभ का रहेगा। बाहरी मदद मिलने से काम आसान हो जाएगा। शुक्र व शनि को परेशानी उभर सकती है। मांगने पर भी सहयोग नहीं मिलेगा। 

विनय बिहारी सिंहअखबारों और पत्रिकाओं में आमतौर पर जो राशिफल छप रहे हैं, उनमें एक नई बात दिख रही है। टीवी पर भी यही हाल है। अब इनमें भविष्यवाणी की जगह सुझाव लिखे जा रहे हैं। टीवी पर भी। आपको यह नहीं करना चाहिए, या यह करना चाहिए। चार लाइन ही तो छपना है, या बोलना है।  बस पूरा राशिफल सुझावों से भर दीजिए। इसे अंग्रेजी ने शुरू किया और हिंदी ने प्यार से अपना लिया।  सुझावों को लिखने या बोलने में परिश्रम कम लगता है। अपने देश में सुझाव ही तो बहुतायत में मिलते हैं। एक भविष्यवक्ता टीवी पर कह रहे थे कि अगला सूर्य ग्रहण बहुत खराब फल देने वाला है। देखा जाये, कितना खराब फल होता है। पर यह तो लोगों को डराना है। ऐसे न जाने कितने सूर्य ग्रहण आए और गए, कुछ तो नहीं हुआ। डराने की भाषा से हमें परहेज करना होगा।  ऐसा नहीं कि पहले जो राशिफल छपते थे, वे बहुत काम के होते थे। साप्ताहिक या मासिक राशिफलों का भी यही हाल है। इनमें काम की चीज तो कोई होती नहीं। राशिफल पढ़ना एक तरह की लत है। आपने राशिफल चाव से पढ़ा और थोड़ी देर बाद उसे भूल गए। पूरे दिन वह राशिफल आपके दिमाग से गायब ही रहा। इस बीच दिन भर आपके साथ अच्छा हुआ या कि बुरा, इसे आप राशिफल से तो बिल्कुल नहीं जोड़ते। एक सामान्य सी भविष्यवाणी होती है। जैसे- मान लीजिए आप साप्ताहिक राशिफल पढ़ रहे हैं। पहले इस तरह राशिफल लिखे जाते थे- सप्ताह का अधिकांश समय लाभ का रहेगा। बाहरी मदद मिलने से काम आसान हो जाएगा। शुक्र व शनि को परेशानी उभर सकती है। मांगने पर भी सहयोग नहीं मिलेगा। 

आपने राशिफल पढ़ लिया। इसे जरूरी नहीं आप शुक्र या शनि तक याद रखें। हो सकता है शुक्र व शनि को आपको कोई परेशानी ही न उठानी पड़े। तब आप कहेंगे कि यह किसी एक आदमी का राशिफल तो है नहीं। इस देश में न जाने कितने इस राशि वाले लोग हैं। हो सकता है, यह उनके लिए हो। या हो सकता है किसी के साथ ऐसा घट गया हो। अब एक अरब से ज्यादा आबादी वाले देश में आप कहां से ढूंढेगे कि अमुक राशि के किसी व्यक्ति के साथ यह घटना घटी है या नहीं। जब हजार तरह के लोग हैं तो किसी न किसी के साथ कोई न कोई घटना तो घटती ही रहती है। यही तो संसार है। लेकिन राशिफल तो सामान्य ढंग से लिखा जाता है। थोक में लिखे गए राशिफल पर भविष्य वक्ता शायद समय नहीं देता। वरना इतना सपाट राशिफल कैसे होता? लेकिन यह एक कोरम है। राशिफल छापना है तो छपता है। पाठक की भी राशिफल पढ़ने की आदत है, इसलिए पढ़ लेता है। बस।

हां, तो बात हो रही थी- सुझावों से भरे राशिफल की । आइए देखें ये राशिफल कैसे लिखे जा रहे हैं- व्यापार तथा कामकाज के हालात अच्छे, प्रयत्नों में विजय मिलेगी, मगर स्वभाव में क्रोध बना रहेगा, खुद पर नियंत्रण रखें। (इसमें शर्त जोड़ दी गयी है)।

एक और तरह का राशिफल पढ़ें- ज्यादा क्रोध मत कीजिए। लोगों से संबंध अच्छे बना कर रहिए। ज्यादा चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। ईश्वर पर भरोसा रखें।

वर्षों से हम इस तरह के राशिफल पढ़ते आ रहे हैं। सब कुछ बदल गया लेकिन राशिफल उसी घिसी- पिटी राह पर चल रहा है। क्या इसे बंद कर देना चाहिए? ज्यादातर लोग इससे सहमत नहीं होंगे। हां, जो नास्तिक हैं,  उन्हें शायद राशिफल में रुचि न हो। लेकिन ज्यादातर पाठक इसे पढ़ते ही हैं। तो क्या किया जाना चाहिए? इस पर बहस हो और पिटी- पिटाई बासी राशिफल लेखन में बदलाव लाया जाना चाहिए। 

एक बात और-  अखबारों में प्रेरक लघु कथाएं या प्रसंग अवश्य छपने चाहिए। इनका अनेक लोगों पर गहरा असर पड़ता है।


लेखक विनय बिहारी सिंह कोलकाता के वरिष्ठ पत्रकार हैं और हिंदी ब्लाग दिव्य प्रकाश के माडरेटर भी। उनसे संपर्क करने के लिए [email protected] का सहारा ले सकते हैं। विनय बिहारी जी बेहतरीन ज्योतिषी भी माने जाते हैं। 

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0 Comments

  1. yogendra singh

    January 26, 2010 at 8:28 am

    sir bahut achi baat likhi hai aapne ye baat bilkul sahi hai

  2. sonu mehmi

    September 23, 2010 at 1:49 pm

    oh balle hun bani gall eh rashi wale ta sale sare he anpadh ney
    jo bhe hona hota hain usko koi nahi taal saktaa ese he bass rozi roti k leye yeh sabh lage hue hain by the way nice job sir ji acha likhia tusi i like it

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