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जयराम रमेश की गुस्ताखी

[caption id="attachment_15756" align="alignleft"]एलएन शीतलएलएन शीतल[/caption]केन्द्रीय पर्यावरण एवं वन राज्य मन्त्री (स्वतन्त्र प्रभार) जयराम रमेश ने पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना को करोड़ों हिन्दुओं के आराध्य देव भगवान शंकर के समान बताकर एक और अनावश्यक विवाद तो खड़ा किया ही है, हजारों साल पुरानी भारतीय संस्कृति के अपमान का अक्षम्य अपराध भी किया है। श्री रमेश ने शनिवार को अपनी भोपाल यात्रा के दौरान महात्मा गान्धी की तुलना ब्रह्मा और नेहरूजी की तुलना भगवान विष्णु से कर डाली। वैसे भी, हमारे यहां एक बड़ी विडम्बना यह है कि किसी भी आदमी ने तनिक भी कुछ अच्छा किया नहीं कि हम झट से उसे देवता बनाने पर आमादा हो जाते हैं।  

एलएन शीतलकेन्द्रीय पर्यावरण एवं वन राज्य मन्त्री (स्वतन्त्र प्रभार) जयराम रमेश ने पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना को करोड़ों हिन्दुओं के आराध्य देव भगवान शंकर के समान बताकर एक और अनावश्यक विवाद तो खड़ा किया ही है, हजारों साल पुरानी भारतीय संस्कृति के अपमान का अक्षम्य अपराध भी किया है। श्री रमेश ने शनिवार को अपनी भोपाल यात्रा के दौरान महात्मा गान्धी की तुलना ब्रह्मा और नेहरूजी की तुलना भगवान विष्णु से कर डाली। वैसे भी, हमारे यहां एक बड़ी विडम्बना यह है कि किसी भी आदमी ने तनिक भी कुछ अच्छा किया नहीं कि हम झट से उसे देवता बनाने पर आमादा हो जाते हैं।  

जबकि यह निर्विवाद और सार्वभौमिक सच है कि इन्सान गलतियों का पुतला है। इन्सान अपनी अन्तिम सांसों तक पूर्णता तक प्राप्त नहीं कर पाता, देवत्व प्राप्त करना तो बहुत दूर की बात है। ऐसे आधे अधूरे इन्सानों की तुलना देवताओं से करने का अक्षम्य अपराध करने वालों को क्या दण्ड दिया जाये, इस पर विचार किये जाने की जरूरत है। जहां तक जिन्ना की बात है, वह तो इस लायक भी नहीं थे कि उनकी तुलना महात्मा गान्धी से की जाये। ऐसे में, हमारे आराध्य देव से उनकी तुलना तो मानसिक दिवालियापन ही कही जा सकती है। और फिर, जिन्ना तो खुद पाकिस्तान बनाकर पछताने लगे थे। कौन नहीं जानता कि पाकिस्तान के तत्कालीन निकम्मे शासकों की करतूतों से आजिज आये जिन्ना इस कदर बेबस हो गये थे कि उन्होंने पंडित जवाहर लाल नेहरू को सन्देश भेजा था कि वह अपनी जिन्दगी के आखिरी दिन मुम्बई के मालाबार हिल में अपने बंगले में बिताना चाहते हैं। यही नहीं, अपनी घोर उपेक्षा से दुज्खी जिन्ना ने पाकिस्तान बनाने के लिए पछतावा जताते हुए दोनों देशों के एकीकरण की इच्छा भी व्यक्त की थी।

श्री रमेश ने एक और असत्य एवं आपत्तिजनक बात कही कि भाजपा पहले गान्धी जी से नफरत करती थी, फिर नेहरू जी से करने लगी। वह ऐसा कहते समय राष्ट्रीय स्वयम् सेवक संघ के सरसंघ चालक श्री मोहन भागवत का यह हालिया बयान भूल गये जिसमें उन्होंने दोहराया था कि संघ उन सभी महानुभावों को श्रद्धेय मानता है जिन्होंने स्वतन्त्र भारत के निर्माण में लेशमात्र भी योगदान किया। यही बात भाजपा भी बार-बार कहती रही है। क्या श्री रमेश की हिन्दी इतनी कमजोर है कि वह श्रद्धा और घृणा का अन्तर भी भूल गये? वह कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता हैं तथा उन्होंने अपनी नासमझी-भरी गैर-जिम्मेदाराना टिप्पणी से करोड़ों देशवासियों की भावनाओं को चोट पहुंचायी है। यदि उनमें साहस है तो जरा पैगम्बर मोहम्मद साहिब या ईसा मसीह से किसी की तुलना करके दिखायें।

बहरहाल, इससे पहले कि करोड़ों हिन्दुओं की कोई तीव्र प्रतिक्रिया सामने आये, कांग्रेस को पूरे देश से अविलम्ब क्षमा याचना करनी चाहिए। लेकिन, उसके लिए केवल इतना ही काफी नहीं, उसे श्री रमेश को पार्टी से निष्कासित भी कर देना चाहिए।


लेखक एलएन शीतल वरिष्ठ पत्रकार हैं और इन दिनों स्वदेश ग्रुप के एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। शीतल से संपर्क करने के लिए [email protected] का सहारा ले सकते हैं।

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