Connect with us

Hi, what are you looking for?

Local News Community

कहिन

बंगाल पुलिस ने मीडिया बनकर छला

[caption id="attachment_15869" align="alignleft"]विष्णु राजगढ़ियाविष्णु राजगढ़िया[/caption]आइए, इस हरकत का विरोध करें : मुझे एक न्यूज स्टोरी के लिए किसी व्यक्ति से कुछ जानकारी चाहिए। वह मीडिया से बात करने तो तैयार नहीं। मैं एक पुलिस अधिकारी होने का नाटक करके उसे पकड़ लूं तो वह सब कुछ बता देगा। मेरी न्यूज स्टोरी बन जायेगी। लेकिन क्या कानून इसकी इजाजत देगा, क्या समाज इसके लिए माफ करेगा? पश्चिम बंगाल की सीआईडी पुलिस ने ऐसा ही शर्मनाक तरीका चुना। लालगढ़ आंदोलन के चर्चित नेता छत्रधर महतो 26 सितंबर को पकड़ लिये गये। पुलिस ने पत्रकार का वेश बनाकर ऐसा किया। एक पुलिस अधिकारी ने खुद को एशियन न्यूज एजेंसी, सिंगापुर का संवाददाता अनिल मयी बताया। उसने पहले एक स्थानीय पत्रकार का विश्वास जीता। फिर उसके साथ जाकर छत्रधर महतो का साक्षात्कार लेने के बहाने गिरफ्तार कर लिया। हर संस्था का अपना अलग कार्यक्षेत्र है। इस नाते उसे कुछ विशेष रियायत मिली होती है। हर संस्था की अपनी अलग भूमिका के अनुरूप लोग उस पर भरोसा करते हैं। किसी चर्च के पादरी के सामने अपने दोष को स्वीकार करने वाले को भरोसा होता है कि वह इसका दुरुपयोग नहीं करेगा। चिकित्सक के सामने एक महिला किसी भरोसे के ही कारण अपने शरीर को अनावृत करती है।

विष्णु राजगढ़ियाआइए, इस हरकत का विरोध करें : मुझे एक न्यूज स्टोरी के लिए किसी व्यक्ति से कुछ जानकारी चाहिए। वह मीडिया से बात करने तो तैयार नहीं। मैं एक पुलिस अधिकारी होने का नाटक करके उसे पकड़ लूं तो वह सब कुछ बता देगा। मेरी न्यूज स्टोरी बन जायेगी। लेकिन क्या कानून इसकी इजाजत देगा, क्या समाज इसके लिए माफ करेगा? पश्चिम बंगाल की सीआईडी पुलिस ने ऐसा ही शर्मनाक तरीका चुना। लालगढ़ आंदोलन के चर्चित नेता छत्रधर महतो 26 सितंबर को पकड़ लिये गये। पुलिस ने पत्रकार का वेश बनाकर ऐसा किया। एक पुलिस अधिकारी ने खुद को एशियन न्यूज एजेंसी, सिंगापुर का संवाददाता अनिल मयी बताया। उसने पहले एक स्थानीय पत्रकार का विश्वास जीता। फिर उसके साथ जाकर छत्रधर महतो का साक्षात्कार लेने के बहाने गिरफ्तार कर लिया। हर संस्था का अपना अलग कार्यक्षेत्र है। इस नाते उसे कुछ विशेष रियायत मिली होती है। हर संस्था की अपनी अलग भूमिका के अनुरूप लोग उस पर भरोसा करते हैं। किसी चर्च के पादरी के सामने अपने दोष को स्वीकार करने वाले को भरोसा होता है कि वह इसका दुरुपयोग नहीं करेगा। चिकित्सक के सामने एक महिला किसी भरोसे के ही कारण अपने शरीर को अनावृत करती है।

हर संस्था की अपनी इस विशिष्टता को बनाये रखना जरूरी है। अपनी सुविधा के लिए किसी संस्था को दूसरे के भरोसे से खिलवाड़ करने का हक नहीं। भारत के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री प्रायः अपने संबोधनों में बेहद शौक के साथ बताते हैं कि वामपंथी उग्रवाद या नक्सलवाद के पीछे आर्थिक-सामाजिक-राजनीतिक कारण हैं।

इस पुरानी तस्वीर में लालगढ़ के नजदीक हरिहरपुर में पीपुल्स कमेटी अगेन्स्ट पोलिस एट्रोसिटीज (पीसीएपीए) के नेता छत्रधर महतो से बातचीत करतीं दिखाई दे रही हैं कोलकाता के आर्टिस्ट अपर्णा सेन, जॉय गोस्वामी, साउली मित्रा, कौशिक सेन।

आबादी के बड़े हिस्से का इन आंदोलनों के साथ जुड़ाव भी जगजाहिर है। लिहाजा इन आंदोलनों और इससे जुड़ी आबादी की आकांक्षाओं एवं गतिविधियों को सामने लाने की दिशा में मीडिया को अपनी अहम भूमिका निभाने का पूरा हक है। मीडिया पर आम लोगों और आंदोलनकारियों के निर्विवाद भरोसे के जरिये ही मीडिया अपनी यह भूमिका निभा सकता है। मीडियाकर्मी अपनी जान पर खेलकर दूरदराज के इलाकों में जाते हैं। उनके पास बचाव का एकमात्र जरिया उसकी यह पहचान ही है। इस पहचान को छत्रधर महतो : मीडिया के नाम पर छल के शिकारबदनाम करने का हक किसी को नहीं दिया जा सकता। पश्चिम बंगाल पुलिस की इस हरकत के बाद मीडियाकर्मियों को देश के किसी भी इलाके में जाने पर ऐसे ही संदेह का शिकार होना पड़ेगा। उन पर जानमाल का गंभीर खतरा हरदम बना रहेगा।

कई बार पुलिस व प्रशासनतंत्र द्वारा ऐसे मामलों में पत्रकारों को अपना दलाल या मुखबिर बनाने की कोशिश की जाती है। झारखंड के लातेहार जिले में ऐसी ही एक कोशिश हुई थी। जब मीडिया ने इसमें पुलिस का साथ नहीं दिया तो पुलिस ने प्रभात खबर के स्थानीय प्रतिनिधि पर आरोपों का पुलिंदा तैयार किया था। उस वक्त प्रभात खबर, रांची के तत्कालीन संपादक बैजनाथ मिश्र ने जवाबी पत्र लिखकर मीडिया की स्वतंत्रता एवं भूमिका के पक्ष में जोरदार तर्क दिये थे। इसके कारण पुलिस ने अपने नक्सल विरोधी अभियान में मीडिया को मोहरा बनाने की हिम्मत नहीं की। अब पश्चिम बंगाल की बहुरूपिया पुलिस ने पत्रकार का वेश बनाकर मीडिया संस्था पर भरोसे की हत्या कर दी है। यह हरकत ऐतिहासिक भूल है। यह बेहद शर्मनाक, आपत्तिजनक एवं अक्षम्य अपराध है। इसका पूरे मीडियाजगत और समाज को ऐसा पुरजोर विरोध करना चाहिए ताकि दुबारा कोई ऐसी हरकत न करे। यह सुनिश्चित हो कि इसकी पुनरावृति कभी, कहीं, किसी भी परिस्थिति में न हो। इस संबंध में स्पष्ट कानून भी तत्काल बनना चाहिए।


लेखक विष्णु राजगढ़िया पटना और दिल्ली में समकालीन जनमत के लिए काम कर चुके हैं। उसके बाद भोपाल के माखन लाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय में व्याख्याता के बतौर काम किया। फिर प्रभात खबर के धनबाद संस्करण में स्थानीय संपादक और प्रभात खबर इंस्टीट्यूट के निदेशक रहे। फिलहाल नई दुनिया के झारखंड संस्करण के ब्यूरो चीफ के रूप में रांची में कार्यरत हैं।
CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

भड़ास तक खबर सूचनाएं जानकारियां मेल करें : [email protected]

भड़ास के वाट्सअप चैनल से जुड़ें और नवीनतम खबरें पाएं : Bhadas Whatsapp

भड़ास लीगल टीम : किसी किस्म की लीगल हेल्प के लिए संपर्क करें- Bhadas Legal Team

You May Also Like

Uncategorized

भड़ास4मीडिया डॉट कॉम तक अगर मीडिया जगत की कोई हलचल, सूचना, जानकारी पहुंचाना चाहते हैं तो आपका स्वागत है. इस पोर्टल के लिए भेजी...

Uncategorized

भड़ास4मीडिया का मकसद किसी भी मीडियाकर्मी या मीडिया संस्थान को नुकसान पहुंचाना कतई नहीं है। हम मीडिया के अंदर की गतिविधियों और हलचल-हालचाल को...

हलचल

[caption id="attachment_15260" align="alignleft"]बी4एम की मोबाइल सेवा की शुरुआत करते पत्रकार जरनैल सिंह.[/caption]मीडिया की खबरों का पर्याय बन चुका भड़ास4मीडिया (बी4एम) अब नए चरण में...

Uncategorized

मीडिया से जुड़ी सूचनाओं, खबरों, विश्लेषण, बहस के लिए मीडिया जगत में सबसे विश्वसनीय और चर्चित नाम है भड़ास4मीडिया. कम अवधि में इस पोर्टल...