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आज तक समेत कई चैनलों को नोटिस

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छात्रों के बाल काटने की घटना को झूठ बताते हुए कालेज ने मानहानि का दावा ठोंका : इलाहाबाद की इलेक्ट्रानिक मीडिया अपने कारनामे के कारण एक फिर चर्चा में है। वजह है यहां के जर्नलिस्टों द्वारा भेजी गई एक खबर, जिसे ढेर सारे न्यूज चैनलों ने जोरशोर से दिखाया और खेला। इज्जत उतरते देख दूसरी पार्टी ने खबर दिखाने वाले सभी छोटे-बड़े, नेशनल-रीजनल न्यूज चैनलों के पास छह पेज का लंबा-चौड़ा कानूनी नोटिस भेज दिया है। मामला इलाहाबाद के पड़ोसी जिले कौशांबी का है। 13 सितंबर को कई न्यूज चैनलों के इलाहाबाद के प्रतिनिधि एक सूचना मिलने के बाद एक जगह एकत्रित हुए और कैमरे आदि के साथ इकट्ठे ही कौशांबी की तरफ रवाना हो गए। 

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छात्रों के बाल काटने की घटना को झूठ बताते हुए कालेज ने मानहानि का दावा ठोंका : इलाहाबाद की इलेक्ट्रानिक मीडिया अपने कारनामे के कारण एक फिर चर्चा में है। वजह है यहां के जर्नलिस्टों द्वारा भेजी गई एक खबर, जिसे ढेर सारे न्यूज चैनलों ने जोरशोर से दिखाया और खेला। इज्जत उतरते देख दूसरी पार्टी ने खबर दिखाने वाले सभी छोटे-बड़े, नेशनल-रीजनल न्यूज चैनलों के पास छह पेज का लंबा-चौड़ा कानूनी नोटिस भेज दिया है। मामला इलाहाबाद के पड़ोसी जिले कौशांबी का है। 13 सितंबर को कई न्यूज चैनलों के इलाहाबाद के प्रतिनिधि एक सूचना मिलने के बाद एक जगह एकत्रित हुए और कैमरे आदि के साथ इकट्ठे ही कौशांबी की तरफ रवाना हो गए। 

इन तक सूचना पहुंची थी कि कौशांबी में सीबीएसई बोर्ड द्वारा संचालित एक स्कूल में टीचर ने दर्जनों बच्चों के बाल काटकर सिर के बीच में चौराहा बना दिया है। सूचना यह भी थी कि पीड़ित बच्चे (इनकी संख्या कोई 60 बता रहा तो कोई 80) और उनके अभिभावक दिन संडे होने के बावजूद इस ‘डा. रिजवी स्प्रिंग फील्ड इंटरमीडिएड कालेज’ के सामने इकट्ठा होने वाले हैं और प्रदर्शन करेंगे। सूत्रों के मुताबिक सभी टीवी पत्रकार इकट्ठे कौशांबी पहुंचे और एक पीड़िता छात्र के अभिभावक सिप्ते हसनेन रिजवी के घर गए। यहां हसनैन साहब ने अपने बेटे को मीडिया के सामने पेश किया। उनके बेटे के सिर के बीच के बाल उस्तरे से छील दिए गए थे। दूसरे बेटे के सामने के बाल कैंची से काटे गए थे। हसनैन साहब ने बताया कि उनके बच्चे जिस स्कूल में पढ़ते हैं, यह उस स्कूल के टीचर की करतूत है। उन्होंने यह भी बताया कि स्कूल के करीब साठ बच्चों के सिर पर चौराहा बना दिया गया है। उन्होंने बताया कि जब वो और उनकी बेगम शिकायत लेकर स्कूल पहुंची तो स्कूल प्रशासन ने अभद्रता की और उनके दोनों बेटे सहित बेटी को भी स्कूल से बाहर निकाल दिया।

हसनैन साहब के घर पहुंचे पत्रकारों को जब पता चला कि पीड़ित बच्चे के नाम पर सिर्फ यही दो हैं तो इनके चेहरे थोड़ी देर के लिए उतर गए लेकिन इतनी दूर से चलकर आए थे तो सो खबर बनाने की ठान ली। इसके बाद योजना पर काम शुरू हुआ।

सूत्रों के मुताबिक पत्रकारों ने तीनों बच्चों को स्कूली ड्रेस पहनवाकर और उनके मां-पिता को साथ लेकर स्कूल के गेट तक पहुंच गए। संडे का दिन होने के कारण स्कूल तो बंद था पर मीडिया वालों के इशारे पर हसननै साहब के बच्चे स्कूल का फाटक खुलवाने की कोशिश करने लगे। मीडिया के लोग फुटेज तैयार करने में जुट गए। सभी संवाददाताओं ने एक-एक कर तीनों बच्चों से इंटरव्यू किया। अब बारी थी स्कूल प्रशासन के इंटरव्यू का तो एक चैनल के प्रतिनिधि ने स्कूल मैनेजर राशिद रिजवी को फोन लगाया और घटना के बारे में अपना पक्ष रखने के लिए बुलाया। राशिद रिजवी तैयार हो गए। वे आए। स्कूल का गेट खुला। सभी संवाददाता उनके आफिस में पहुंचे। मैनेजर ने बताया कि उन पर जो आरोप लगाए जा रहे हैं वो सरासर गलत व बेबुनियाद हैं। आरोप लगाने वाले हसनैन साहब उनके रिलेटिव हैं, जिनसे किन्हीं वजहों से संबंध ठीक नहीं चल रहे हैं। उन्होंने निजी खुन्नस के कारण खुद ही अपने बेटे के सिर के बाल काट कर स्कूल को बदनाम करने के लिए आरोप लगा रहे हैं। मैनेजर ने पूरे प्रकरण को एक बड़ी साजिश करार दिया। मैनेजर ने चुनौती दी कि इस स्कूल में हजार बच्चे पढ़ते हैं और इनके अलावा एक भी कोई बच्चा अपने सिर पर ऐसा निशान दिखा दे तो वो तुरंत मैनेजर पद से इस्तीफा दे देंगे। उन्होंने टीवी जर्नलिस्टों से अनुरोध किया कि वे कल स्कूल खुलने पर आ जाएं और सभी बच्चों से बात कर तसल्ली कर लें। पर संवाददाताओं के पास टाइम नहीं था। 

सभी संवाददाता फुटेज-बाइट लेकर लौट आए। स्टोरी तैयार कर जर्नलिस्टों ने इसे अपने-अपने न्यूज चैनलों के पास रवाना कर दिया। चैनलों के न्यूज रूम के कर्ताधर्ताओं के पास इतना वक्त कहां होता कि वे सही गलत की छानबीन करें। उन्हें पका-पकाया ऐसा माल मिल चुका था जिसे दिखाने पर खूब टीआरपी आने के चांस थे। बस क्या था, खबर पर सभी खेल गए। यह खबर ज्यादातर बड़े न्यूज चैनलों पर सुर्खियों में छाई रही। कालेज के प्रबंधन निदेशक को जब न्यूज चैनलों पर उनके कालेज के बारे में नकारात्मक खबर चलने की बात पता चली तो वे परेशान हो गए। उन्होंने टीवी जर्नलिस्टों के कृत्य की निंदा की और इन चैनलों से भिड़ने की ठान ली। यहां यह बताना उचित होगा कि कालेज के स्वामी राजनीतिज्ञ हैं और सांसद भी रह चुके हैं, सो, उन्हें मीडिया का सच अच्छी तरह पता है।

खबर चलने के कुछ ही दिन बीते थे। जब इलाहाबाद के पत्रकारों को पता चला कि खबर दिखाने वाले सभी न्यूज चैनलों को और इनके संबंधित प्रतिनिधियों को कालेज की तरफ से कानूनी नोटिस भेज दिया गया है तो इनके पैरों तले से जमीन सरक गई। स्कूल प्रबंधन ने न्यूज चैनल के संवाददाताओं पर आरोप लगाया कि ये लोग खबर न चलाने के लिए दो लाख रुपये मांग रहे थे और नहीं दिए जाने पर खबर चलाकर स्कूल की इज्जत तार-तार करने की धमकी देकर लौट गए थे। लीगल नोटिस में स्कूल प्रबंधन ने बहुत सारी बातें कहीं हैं। बताया जा रहा है कि नोटिस आज तक, स्टार न्यूज, जी न्यूज, ईटीवी, टाइम्स नाऊ समेत कई बड़े चैनलों के नाम भेज दिया गया है। नोटिस में कहा गया है कि ये चैनल अपने संवाददाताओं को हटाएं या फिर 2 करोड़ रुपये की मानहानि के मुकदमें को झेलें।

नोटिस की एक प्रति भड़ास4मीडिया के पास भी है, जिसे स्कैन करके यहां प्रकाशित किया जा रहा है-


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