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दुख-दर्द

घोटालेबाज पत्रकारों में घमासान

भोपाल के राजधानी पत्रकार गृह निर्माण सहकारी संस्था के चुनाव के बाद सेन्ट्रल प्रेस क्लब के पैनल में घमासान मचा हुआ है। संस्था के अब तक अध्यक्ष रहे रामभुवन सिंह कुशवाह यह पद छोड़ना नहीं चाहते जबकि प्रेस क्लब के लोग कुशवाह को बहार का रास्ता दिखाना चाहते हैं। यही वजह है कि अध्यक्ष को लेकर हुई पहली बैठक में कुल जमा 10 लोग मिलकर आमराय से अध्यक्ष का नाम तय नहीं कर पाए।

भोपाल के राजधानी पत्रकार गृह निर्माण सहकारी संस्था के चुनाव के बाद सेन्ट्रल प्रेस क्लब के पैनल में घमासान मचा हुआ है। संस्था के अब तक अध्यक्ष रहे रामभुवन सिंह कुशवाह यह पद छोड़ना नहीं चाहते जबकि प्रेस क्लब के लोग कुशवाह को बहार का रास्ता दिखाना चाहते हैं। यही वजह है कि अध्यक्ष को लेकर हुई पहली बैठक में कुल जमा 10 लोग मिलकर आमराय से अध्यक्ष का नाम तय नहीं कर पाए।

भोपाल राजधानी पत्रकार गृह निर्माण सहकारी संस्था के चुनाव के बाद माना जा रहा था कि सब कुछ ठीक-ठाक हो जायेगा, लेकिन हुआ इसका ठीक उल्टा। आपसी मनमुटाव के चलते संस्था के संचालकों की पहली बैठक से परिवर्तन पैनल के एक मात्र सदस्य सुरेश शर्मा को इसमें नहीं बुलाया गया। वहीं सेन्ट्रल प्रेस क्लब के १० सदस्य मिल कर संस्था का नया अध्यक्ष तय नहीं कर पाए। खबर है कि संस्था के अब तक अध्यक्ष रामभुवन कुशवाह इस पद को छोड़ना नहीं चाहते हैं वहीं संस्था के पांच संचालक कुशवाह के खिलाफ हैं। वह उनको हटा कर उनके कार्यकाल की जांच करवाना चाहते हैं।

संस्था और प्रेस क्लब के अधिकांश लोग कुशवाह से नाराज हैं और उन्हें उपाध्यक्ष तक बनाना नहीं चाहते हैं। पहली बैठक में ही जब इस मामले पर आम राय नहीं बनी तो अध्यक्ष और उपाध्यक्ष कौन बनेगा, इसका जिम्मा यूएनआई के अरुण कुमार भंडारी और हिंदुस्तान टाइम्स के एनके सिंह को सौंपा गया। हालाँकि यह दोनों भी खुद अध्यक्ष बनने के लिए खासे लालायित नज़र आ रहे हैं। वर्ना भंडारी को दिल्ली तबादले के बाद यहां आकर छोटा-सा चुनाव नहीं लड़ना पड़ता और एनके सिंह को भी अपनी गरिमा के विपरीत जाकर अपने पुत्रों की आयु के लोगों से दो-दो हाथ नहीं करना पड़ते।

वहीँ खबर है कि संस्था के तमाम श्रमजीवी पत्रकारों ने संचालक मंडल के वह शपथ पत्र मांगे हैं जो उन्होंने जमीन पर कब्ज़ा लेने के लिए दिए हैं। इन सभी लोगों ने मिटटी के मोल मिल रही जमीन के लिए झूठे शपथपत्र दिए हैं, ऐसा सभी का मानना है। इस बीच संस्था की एक सदस्य श्रुति अनुराग की संचालक मंडल को लिखी चिठ्ठी से हडकंप मच गया हैं। इस चिठ्ठी से संचालक मंडल के सदस्य बगलें झांकने को मजबूर हो गए हैं। इस चिठ्ठी से इनके आलीशान मकानों की पोल  खुल गई है और यह सवाल खड़ा हो गया है कि जब इनके पास पहले से मकान और कोठियां हैं तो इन्हें गरीब पत्रकारों को दी जाने वाली रियायती दर की जमीन की जरूरत क्या है?


लेखिका शैफाली गुप्ता भोपाल की पत्रकार हैं.

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