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रांची में ‘प्रभात खबर झारखंड डेवलपमेंट रिपोर्ट’ का विमोचन

डेवलपमेंट रिपोर्ट का विमोचन समारोह

झारखंड के विकास का आईना है झारखंड डेवलपमेंट रिपोर्ट-2010 : बीते दिनों ‘प्रभात खबर झारखंड डेवलपमेंट रिपोर्ट- 2010’ का विमोचन व लोकार्पण रांची में हुआ. प्रभात खबर द्वारा प्रकाशित झारखंड डेवलपमेंट रिपोर्ट को देश की जानी-मानी संस्था ‘इंडिकस एनालिटिक्स’ ने तैयार किया है. यह रिपोर्ट झारखंड के सम्यक विकास का पूरा दस्तावेज है. रिपोर्ट विकास के हर पहलू का तथ्यपरक विश्लेषण करती है. मसलन, प्रतिव्यक्ति आय, साक्षरता दर, औद्योगिक विकास, इंफ्रास्ट्रक्चर की स्थिति, नागरिक सुविधाओं का हाल आदि.

डेवलपमेंट रिपोर्ट का विमोचन समारोह

झारखंड के विकास का आईना है झारखंड डेवलपमेंट रिपोर्ट-2010 : बीते दिनों ‘प्रभात खबर झारखंड डेवलपमेंट रिपोर्ट- 2010’ का विमोचन व लोकार्पण रांची में हुआ. प्रभात खबर द्वारा प्रकाशित झारखंड डेवलपमेंट रिपोर्ट को देश की जानी-मानी संस्था ‘इंडिकस एनालिटिक्स’ ने तैयार किया है. यह रिपोर्ट झारखंड के सम्यक विकास का पूरा दस्तावेज है. रिपोर्ट विकास के हर पहलू का तथ्यपरक विश्लेषण करती है. मसलन, प्रतिव्यक्ति आय, साक्षरता दर, औद्योगिक विकास, इंफ्रास्ट्रक्चर की स्थिति, नागरिक सुविधाओं का हाल आदि.

प्रभात खबर अपने प्रयासों से हर वर्ष झारखंड डेवलपमेंट रिपोर्ट का प्रकाशन पिछले सात वर्षों से करता रहा है. ऐसा करने वाला संभवत: यह देश का पहला अकेला अखबार (वह भी हिंदी का) है. इस रिपोर्ट के मुताबिक अगर विकास की मौजूदा रफ्तार यही बनी रही, तो वर्ष 2020 में झारखंड की स्थिति आज के थाइलैंड जैसी होगी. यानी एक दशक बाद भी झारखंड में बहुत सुधार की गुंजाइश नहीं दिख रही है. रांची के लोक प्रशासनिक संस्थान सभागार में इस रिपोर्ट का विमोचन राज्य के मुख्यमंत्री शिबू सोरेन व उप मुख्यमंत्री रघुवर दास, सुदेश महतो, सांसद बाबूलाल मरांडी, विधानसभाध्यक्ष सीपी सिंह, नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र सिंह ने संयुक्त रूप से किया. इस अवसर पर राज्य के कई प्रमुख राजनीतिज्ञ, ब्यूरोक्रेट्स, शिक्षाविद व बुद्धिजीवी उपस्थित थे.

विमोचन समारोह में झारखंड के मुख्यमंत्री शिबू सोरेन ने कहा- ”गांव के 80 फीसदी लोगों की हमें चिंता करनी है. गांव में रहने वाली 80 फीसदी आबादी दुनिया से मतलब नहीं रखती, वह तो मेहनत-मजदूरी कर पेट पालने में व्यस्त है. खेत में 12 महीना पानी हो, तो इन लोगों का दुख दूर हो जायेगा. हमको इन्हीं लोगों की चिंता करनी है. सरकार अपने सलाहकार व अधिकारियों की सहायता से ही काम करती है. यदि अधिकारी ही काम न करें, तो मुश्किल है. थाना का काम था शांति बनाये रखना, लेकिन थाना झगड़ा बढ़ाने का काम करता है. यही मुश्किल है.” राजनीतिज्ञों को काम करने की सलाह पर सीएम ने कहा कि नेता लोगों की चिंता एमएलए-एमपी बनना भर है. झारखंड की जमीन से निकलने वाले खनिज के बदले राज्य को उसका हक नहीं मिलता. यह दुर्भाग्य है. हमारी सरकार मिली-जुली है, लेकिन हम निष्ठा के साथ काम कर रहे हैं.”

सीपी सिंह (विधानसभाध्यक्ष, झारखंड) ने इस मौके पर कहा कि प्रभात खबर ऐसी डेवलपमेंट रिपोर्ट के लगातार प्रकाशन व विकास संबंधी व्याख्यानमालाओं के लिए बधाई का पात्र है, लेकिन सवाल यह है कि क्या इस रिपोर्ट पर क्रियान्वयन होता है? यह बड़ा सवाल है. हर कोई कहता है कि ऐसा काम होना चाहिए, वैसा काम होना चाहिए, लेकिन करेगा कौन? बाबूलाल मरांडी (पूर्व मुख्यमंत्री व सांसद) का कहना था कि प्रभात खबर अखबार निकालने के साथ-साथ राज्य के प्रति अपने कर्तव्यों का भी निर्वहन करता रहा है. बडी बातें करने से पहले हमें विकास के बुनियादी मुद्दों पर ध्यान देना होगा. ठीक उसी तरह जैसे बगैर एबीसीडी सीखे आगे की पढाई मुश्किल है.

रघुवर दास (उप मुख्यमंत्री) बोले- पाश्चात्य उदारीकरण के डेवलपमेंट मॉडल के बजाय हमें अपना अलग मार्ग बनाना चाहिए. मीडिया से उन्होंने स्वस्थ आलोचना के साथ-साथ सकारात्मक सहयोग की भी मांग की. प्रभात खबर न सिर्फ विकास में भागीदारी निभा रहा है बल्कि समाज के कोढ़ भ्रष्टाचार के बारे जो सक्रियता इसने दिखायी है, उसके लिए भी यह बधाई का पात्र है. सुदेश महतो (उप मुख्यमंत्री) के अनुसार- दूसरे राज्यों से डेवलपमेंट के मुद्दे पर तुलना एक बेहतर प्रयास है. झारखंड डेवलपमेंट रिपोर्ट हमारी सरकार के निर्णय लेने में सहायक होगी. हम प्रभात खबर को एक सहयोगी व मागदर्शक मानते हैं. हम पूरी इच्छा शक्ति से इस छवि को बदलने की कोशिश करेंगे.  राजेंद्र सिंह (नेता प्रतिपक्ष) ने कहा कि अगर हम सब मिलकर प्रभात खबर की इस रिपोर्ट की 20 फीसदी सलाह पर भी अमल हो, तो यह बड़ी बात होगी. प्रभात खबर अपने स्लोगन अखबार नहीं आंदोलन की तरह विकास को भी एक आंदोलन के रूप में ले. अंततः राज्य को ही इसका फायदा मिलेगा.

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