
अच्युतानंद मिश्र ने रवींद्र अग्रवाल को पुरस्कार प्रदान किया.
सम्मान समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में डा. नन्दकिशोर त्रिखा भी मौजूद थे। समारोह की अध्यक्षता नेशनल यूनियन आफ जर्नलिस्ट्स (इण्डिया) के राष्ट्रीय अध्यक्ष पी.के.राय ने की। श्री अग्रवाल को यह पुरस्कार उनकी 30 साल की पत्रकारिता में उल्लेखनीय योगदान के लिए प्रदान किया गया। श्री अग्रवाल बहुभाषी समाचार सेवा हिन्दुस्थान समाचार में सम्पादक, दैनिक जागरण नई दिल्ली में एसोसिएट एडीटर, राष्ट्रीय सहारा नई दिल्ली, हरिभूमि में समाचार सम्पादक, अमर उजाला के सहारनपुर और मुरादाबाद संस्करणों में संवाददाता, विश्व मानव के सहारनपुर नगर संस्करण के प्रभारी रहे। उन्होंने राष्ट्रीय सहारा के ब्यूरो में वरिष्ठ संवादादाता के रूप में ‘भारत गुलामी की ओर’ चर्चित सीरीज प्रकाशित की थी। आपकी पुस्तकें ‘बचत संस्कृति बनाम उपभोक्तावाद’ और ‘साम्राज्यवादी शिकंजा आर्थिक मामलों’ पर चर्चित हुईं। सम्प्रति डा.रवीन्द्र अग्रवाल चण्डीगढ़ में हरियाणा सरकार की पत्रिका ‘संवाद’ का सम्पादन कर रहे हैं। सम्मान समारोह में राजधानी पत्रकारों और साहित्यकारों ने भाग लिया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वरिष्ठ पत्रकार अच्युतानन्द मिश्र ने पत्रकारिता के लिए स्व.रवीन्द्र सनातन के योगदान को याद करते हुए उन्हें सत्य एवं निष्ठा के साथ कार्य करने वाला पत्रकार बताया। उन्होंने कहा कि सनातन जी ने कभी भी लाभ या निजी हित के लिये पत्रकारिता का उपयोग नहीं किया। वे जीवन भर मूल्यों की पत्रकारिता करते रहे। इस अवसर पर डा नन्दकिशोर त्रिखा ने भी रवीन्द्र सनातन का स्मरण किया। स्व.रवीन्द्र सनातन की स्मृति में आरम्भ किये गए पुरस्कार को ग्रहण करने वाले वरिष्ठ पत्रकार रवीन्द्र अग्रवाल ने कहा कि मैं पत्रकारिता में जिस ध्येय को लेकर कार्य करता हूं उसको आज रवीन्द्र सनातन की मूल्य आधारित पत्रकारिता से और अधिक बल मिला है। उन्होंने कहा कि मैं कभी कोई ऐसा कार्य नहीं करूंगा जिससे इस सम्मान की गरिमा को ठेस पहुंचे। उन्होंने पुरस्कार के लिए उनके चयन के लिए आभार भी व्यक्त किया। इसके पूर्व श्री अग्रवाल को स्व.रवीन्द्र सनातन द्वारा स्थापित ड्रीमलैण्ड एजूकेशनल सोसाइटी की ओर से स्मृति चिन्ह, प्रशस्ति पत्र, अंगवस्त्र तथा 11 हजार रूपये की नकद धनराशि पुरस्कार स्वरूप प्रदान की गई।












pandit kaushal
April 13, 2010 at 9:06 am
bahut badhai… ravindra jee.apne krishi aur aarthik jagat ka maan badhaya.patrakarita ka gaurabh badhaya………………apke sath mai kaam kar chuka hu. sahara me. bharat gulami ki aur me mere bhi lekh the……….kripa kar apna mobile number mujhe e-mail kar de mai call karunga. bhagwan sada apko safal banaye
pandit kaushal
April 13, 2010 at 9:09 am
mera mail address hai—– pt kaushal@gmail .com
Dinesh Agrahari
April 13, 2010 at 11:19 am
Ravindra Sir ko bahut-bahut badhai
SAMANWAYA NANDA
April 13, 2010 at 4:44 pm
Bahut Bahut Badhai
Samanwaya
dilzala
April 13, 2010 at 6:07 pm
badhi ho
Aseem rao
April 14, 2010 at 8:57 am
Ravindra Sir ko bahut-bahut badhai
nimish
April 14, 2010 at 11:05 am
Dr Ravindra Agrawal is one of the finest agri-economics hindi journalist of india..no doubt about it..writing on such subjects in hindi is not everyone’s cup of tea..even we researchers from DELHI SCHOOL OF ECONOMICS usually take his view on various issue..he is the man behind RASTRIYA SAHARA (hindi)’s known supplement ‘Hastakshep’..thnx, RSS now come to know about their own gem..friends, still lots of left in Dr.Agrawal’s writing..abhi toh unhe bahut likhna hai..
pandit kaushal
April 14, 2010 at 12:30 pm
mera e-mail address hai— pt.kaushal (yani pt ke bad dot jarur dale ) kripa apna mobile number jarur mail kar de
jay prakash singh
April 29, 2010 at 10:51 am
bahut badhai sir,apki patrika krishi mangal ki purani pratiyan kaise mil sakati hai