: 15 सितम्बर को पटना में होगी लांचिंग : आज समाज में दूराव बढ़ता जा रहा है। पैसों की चमक के आगे रिश्ते-नाते बेमानी होते जा रहे है। प्रोफेशन की बढ़ती जड़ों ने इमोशन को खत्म कर दिया है। ऐसे माहौल में इंसान को इंसान बनाए रखने की पहल शुरू हो रही है बिहार की राजधानी पटना से। युवा पत्रकार विवेक ने बाबा नागार्जुन की कविताओं पर एक फिल्म बनाई है, जिसे नाम दिया है ‘मेघ बजे।’
इस फिल्म में बाबा नागार्जुन की पांच कविताओं को शामिल किया गया है। जिसमें अकाल के बाद, मेघ बजे, बादल को घिरते देखा है और गुलाबी चूडि़यां जैसी कविताएं हैं। विवेक कहते हैं कि इस फिल्म का उद्देश्य है-युवा पीढ़ी को बाबा के विचारों और कविताओं से अवगत कराना ताकि इस वैचारिक संकट के युग में भी उनके अंदर मेघ बजते रहे, जिंदगी सजती रही। इस फिल्म की लांचिंग 15 सितंबर को बिहार विधान परिषद के सभागर में होगी।
इस मौके पर एक विचार गोष्ठी का आयोजन भी किया गया है। गोष्ठी का विषय है- ‘कैसे दूर हो समाज का वैचारिक अकाल।’ इसके साथ ही एक ऐसे अस्पताल बनाने की पहल भी होनी है, जिस अस्पताल में पैसे के आभाव में कोई दम न तोड़े।
इस कार्यक्रम में जानी-मानी पत्रकार वर्तिका नन्दा, आउटलुक की फीचर एडिटर गीताश्री, साहित्यकार अरूणकमल, फिल्म समीक्षक विनोद अनुपम, प्रसिद्ध ब्लागर अविनाश, मौर्य टीवी के राजनीतिक संपादक नवेन्दू, विधानपरिषद के सभापति पंडि़त ताराकांत झा और पूर्व मुख्यमंत्री डा. जगन्नाथ मिश्रा हिस्सा ले रहे है।
इस फिल्म को बनाने वाले विवेक ने हाल ही में दर्श न्यूज के चैनल हेड पद से इस्तीफा दिया था। इस कार्यक्रर्म का आयोजन युवा पत्रकारों का संगठन ‘वाह जिंन्दगी’ कर रहा है। ‘वाह जिंदगी’ के प्रशांत का कहना है कि हम पत्रकारिता को समाज से जोड़ना चाहते हैं ताकि समाज का मूल स्वभाव और उसकी सुंदरता बची रहे।












तरुण ठाकुर
September 13, 2010 at 1:12 pm
प्रिय विवेक जी और अमितेश जी
आप लोगो की पहल जरुर रंग लायेगी। अपनो से जोड़ने का ये तरीका सच में काबिले तारीफ है। इमोशनस सच मे बाजारो में गुम हो गये है। आदमी भाग दौड़ में भी़ड़ में गुम हो जा रहा है। मुझे भरोसा ही नही विश्वास भी है कि आप लोगो की ये पहल जरुर रंग लायेगी।
तरुण ठाकुर
September 13, 2010 at 1:35 pm
प्रिय विवेक जी और अमीतेश जी
आप लोगो की ये सार्थक पहल जरुर रंग लायेगी। इस विडियो को जिस ढ़ग से बनाया गया है लाजाबाब है। भरोसा है ये लोगो के दिल के काफी करीब होगा।
तरुण ठाकुर
rishikesh chakradharpur
September 14, 2010 at 9:47 am
writen by rishikesh ckp.jharkhand
vivek ji aapke jajbe ko slam.bihar aap jaise MOTIYO se saja hai. nagarjun ki kavitaon par aapne jo film banaye hai maine nahi dekhi. lekin aapne jo bida uthaya wo birle log hote hain. aapne DARSH choda maine suna par ik naya gift MEGH BAJE dekar bihar ki sarjami ka nam uncha kiya.aapka safar anwart jari rahe. hum sabhi apke sath hai………rishi__8084008008
ramsukhiya
March 14, 2011 at 4:53 am
Kya baat hai bhai ramsukhiya ji. aapne to kamal kar diya.”Magh baje” me to sab ki baja di aapne. gud wrk keep it up. waise bura laga k darsh chod diya aapne, bahut kuch kiya tha aapne waha to, dehati ko pura support kiya tha. chaliye koi baat nahi hai, jiwan yapan k liye to log kuch v karte hai. waise mujhe vyaktigat rup se bahut harsh ho raha hai aapki is naye uplabdhi k liye. Agge v aapka patrkarita ko ayasa se ayasa hi sada yogdan milega iski puri umeed hai hume.