नागार्जुन गिरोहों में नहीं, जनता में क्रांति चाहते थे

: बिलासपुर में दो दिवसीय विचार गोष्‍ठी सम्‍पन्‍न : प्रमोद वर्मा स्मृति संस्थान द्वारा बाबा नागार्जुन की जन्मशताब्दी वर्ष के अवसर पर राष्ट्रीय संगोष्ठी विमर्श ‘फिर फिर नागार्जुन’ का दो दिवसीय आयोजन अपने समय के महत्वपूर्ण कवि श्रीकांत वर्मा और आलोचक प्रमोद वर्मा की नगरी बिलासपुर के राघवेन्द्र सभागार में पिछले दिनों ऐतिहासिक सफलता के साथ संपन्न हुआ।

जनकवि हूं मैं क्‍यों हकलाउं

चंदू, मैंने सपना देखा, उछल रहे तुम ज्यों हिरनौटा… चंदू, मैंने सपना देखा, अमुआ से हूँ पटना लौटा. जी हां, सपने में नहीं, अपितु यथार्थ में नागार्जुन के जन्‍मशती पर विमर्श के लिए महात्‍मा गांधी अंतरराष्‍ट्रीय हिंदी विश्‍वविद्यालय, वर्धा द्वारा पटना (ए.एन.सिन्‍हा समाज अध्‍ययन संस्‍थान) में ‘नागार्जुन एकाग्र’ पर आयोजित समारोह के दौरान साहित्‍यकारों ने उनको याद किया गया। नागार्जुन के साहित्‍य पर विमर्श का लब्‍बोलुआब था कि बाबा नागार्जुन जनकवि थे और वे अपनी कविताओं में आम लोगों के दर्द को बयां करते थे। वे मानते थे कि जनकवि हूं, मैं क्‍यों हकलाउं।

नागार्जुन की कविताओं पर ‘मेघ बजे’

मेघ बजे: 15 सितम्‍बर को पटना में होगी लांचिंग : आज समाज में दूराव बढ़ता जा रहा है। पैसों की चमक के आगे रिश्ते-नाते बेमानी होते जा रहे है। प्रोफेशन की बढ़ती जड़ों ने इमोशन को खत्म कर दिया है। ऐसे माहौल में इंसान को इंसान बनाए रखने की पहल शुरू हो रही है बिहार की राजधानी पटना से। युवा पत्रकार विवेक ने बाबा नागार्जुन की कविताओं पर एक फिल्म बनाई है, जिसे नाम दिया है ‘मेघ बजे।’

गांधी, गदर और गर्दिश

सबसे पहले नमस्कार उस चमत्कार को जो अप्रत्याशित रूप से दुनिया के सामने आया. अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा को शान्ति का नोबेल पुरस्कार मिला है. दुनिया भर में डुगडुगी बज रही है. मजे की बात, ओबामा सो रहे थे, उन्हें जगाया गया, यह कह कर कि हे महाशक्तिमान! जागो, अब तो आपने सर्वोच्च सम्मान पा लिया. अमेरिकियों को तो लग रहा है कि वे अभी सोते हुए सपना देख रहे हैं. उन्हें भी इस चमत्कार पर घोर आश्चर्य है. हमें यह बात हज़म नहीं हुई. साहब, दुनिया को भी नहीं हो रही. युगों से संसार को शांति का पाठ हम पढ़ा रहे हैं. जब पुरस्कार कि बारी आई तो हमें झुनझुना थमा दिया. जिस गांधी के पदचिन्हों पर चलकर ओबामा ने मात्र नौ माह के कार्यकाल में ही यह सम्मान पा लिया (अभी तो चार साल तीन माह का कार्यकाल बचा हुआ है) लेकिन पाँच बार नाम लिखाकार भी गांधी को यह सम्मान नसीब नहीं हुआ। मतलब गुरु गुड़ और चेला चीनी! अभी क्या देखा है साहब! …अभी और बड़ा देखेंगे… आंखें फट जाएंगी जब पाकिस्तान को अपने घर में खड़ा देखेंगे.. पूछिये क्यों? भाई साहब, माई बाप ने पाकिस्तान को 85 अरब डॉलर की मदद दी.