जर्नलिस्ट यूनियन फॉर सिविल सोसाइटी (JUCS) ने दिल्ली में जामिया विश्वविद्यालय में आतंकवाद विषय पर हो रहे सम्मेलन में दिग्विजय सिंह को काले झंडे दिखाए। जेयूसीएस के दर्जनों नेताओं-कार्यकर्ताओं ने नारे लगाते हुए दिग्विजय वापस जाओ के पर्चे फेके। कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने भी समर्थन में नारे लगाए।
‘साजिद-आतिफ के हत्यारे दिग्विजय वापस जाओ’, ‘आजमगढ़ को आतंक की नर्सरी के नाम से तब्दील करने वाले कांग्रेसी दिग्विजय वापस जाओ’, ‘साजिद और आतिफ की हत्या पर विजय मनाने वाले काग्रेंसी दलाल वापस जाओ’, ‘बाटला हाउस आंदोलन को तोड़ने वाले दिग्विजय वापस जाओ’, ‘हमारा मानवाधिकार आंदोलन जिंदाबाद’, ‘इंकलाब जिंदाबाद’ के नारे लगाते हुए कार्यकर्ताओं ने अपना विरोध दर्ज कराया।
जेयूसीएस के संयोजक शाह आलम और विजय प्रताप ने कहा कि आजमगढ़ आज पूरे देश में आतंकवाद के नाम पर बेकसूरों के उत्पीड़न के आंदोलन का केंद्र है। बटला हाउस के बाद बने जामिया टीचर्स सालीडैरिटी एसोशिएसन फोरम पर हम आरोप लगाते हैं कि वह इस आंदोलन को दिग्विजय सिंह जैसे कांग्रेसी दलालों को बुलाकर कमजोर कर रही है। जेयूसीएस ने कहा कि दिग्विजय को काला झंडा दिखाकर हमने आजमगढ के आंदोलन की परंपरा को बरकरार किया। लोगों ने इसी तरह फरवरी में आजमगढ़ जाने पर दिग्विजय को काले झंडे दिखाए थे। इस यात्रा का विरोध जामिया टीचर्स सालीडैरिटी एसोशिएसन फोरम ने भी किया था आज वो बताए कि क्या दिग्विजय ने बाटला हाउस फर्जी मुठभेड़ की न्यायिक जांच करवा दी है जो उसे इस तरह मंचो से वो नवाज रही है।
काले झंडे दिखाने वाले जेयूसीएस नेताओं नीरज कुमार, सैयद अली अख्तर, रियाज अहमद, राकेश कुमार, फहद हसन, मो आरिफ ने कहा कि दिग्विजय बाटला हाउस फर्जी मुठभेड़ की न्यायिक जांच के लिए नहीं बल्कि इस आंदोलन को तोड़ने के लिए यहां आए। इसी साजिश के तहत देश की सबसे बड़ी सांप्रदायिक पार्टी जिसने चौरासी, बानबे, बाटला हाउस और न जाने कितने ही बार बेकसूरों के खून से अपने हाथ रंगे ने सिर्फ आजमगढ़ में मुंह दिखाने के लिए सांप्रदायिकता विरोधी मोर्चे का गठन किया और इसी आंदोलन से जुड़े अमरेश मिश्र जैसे लोगों को प्रभारी बनाया। दिग्विजय ने आजमगढ़ में बेशर्मी की हद पार कर दी एनकाउंटर पर पहले संदेह व्यक्त किया और फिर पलट गए।











