लेखिका तवलीन सिंह गांव-देहात विरोधी हैं?

अमर उजाला ने 26-07-11 ‘सरोकार’ नाम के कॉलम में “शहरों के खिलाफ साजिश क्यों” के नाम से तवलीन सिंह का एक लेख प्रकाशित किया है। इसमें इस देश की राजनीति और जनता के बड़े हिस्से को भोंडे तरीके से देखा गया है। तवलीन सिंह शहरों की पहचान और विरासत को खत्म करने का जिक्र करती हैं। कारण के तौर पर लिखती हैं कि सब खत्म कर दिया हमारे समाजवादी शासकों ने, जिन्हें परवाह थी, सिर्फ देहातों की,क्योंकि देहाती मतदाताओं के बल पर जीते जाते थे चुनाव।

WIKILEAKS के खुलासे और HINDUSTAN की दलाली

HINDU और WIKILEAKS के खुलासों के बाद प्रो-कांग्रेस मीडिया सरकार को बचाने में लग गयी है। JUCS मीडिया की इस भूमिका पर नजर रखते हुए कांग्रेस से राज्य सभा की सदस्य शोभना भरतिया के हिंदी अखबार हिंदुस्तान के 18 मार्च 2011 शुक्रवार के संपादकीय पेज पर सवाल उठाता है। अखबार ने ‘हमारी राय’ के तहत ‘ WIKILEAKS के धमाके’ शीर्षक से छपी टिप्पणी से इस गंभीर मुद्दे को सनसनी तक समेटने की कोशिश की है।

दिग्विजय को जामिया में दिखाया काला झंडा

जर्नलिस्ट यूनियन फॉर सिविल सोसाइटी (JUCS) ने दिल्ली में जामिया विश्वविद्यालय में आतंकवाद विषय पर हो रहे सम्मेलन में दिग्विजय सिंह को काले झंडे दिखाए। जेयूसीएस के दर्जनों नेताओं-कार्यकर्ताओं ने नारे लगाते हुए दिग्विजय वापस जाओ के पर्चे फेके। कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने भी समर्थन में नारे लगाए।

भगवा ब्रिगेड नेता से बातचीत का टेप जारी

: JUCS से बातचीत में राजेश बिडकर ने किया खुलासा : हमारा टारगेट केवल मध्य प्रदेश है : हम लोग एक कट्टर वैचारिक संगठन तैयार कर रहे हैं : मध्य प्रदेश में भगवा बिग्रेड की तरफ से चलाए जा रहे ‘हिंदू योद्धा भर्ती अभियान’ पर केन्द्र व प्रदेश सरकार की चुप्पी अभी जारी है। जर्नलिस्ट्स यूनियन फॉर सिविल सोसायटी (जेयूसीएस) ने इस पूरे मामले की जानकारी गुरुवार 16 सितम्बर को ही सरकारी व अन्य मीडिया एजेंसियों को दे दी थी।

हिंदू योद्धा भर्ती अभियान तत्काल रोकें

जर्नलिस्ट यूनियन फॉर सिविल सोसाइटी (JUCS) की मध्य प्रदेश ईकाई ने जबलपुर रेलवे स्टेशन पर ‘भगवा ब्रिगेड का हिंदू योद्धा भर्ती अभियान’ का पोस्टर पाया। यह पोस्टर पूरे मध्य प्रदेश में सार्वजनिक स्थानों पर लगा है। इस पोस्टर में हिन्दुत्वादियों द्वारा प्रस्तावित अयोध्या में राम मंदिर के ढांचे का छाया चित्र लगा है।

सांप्रदायिक खबरें रोकने के लिए प्रेस परिषद पहुंचे

मीडिया स्टडीज ग्रुप (MSG) और जर्नलिस्टस यूनियन फॉर सिविल सोसाइटी (JUCS) की तरफ से वरिष्ठ पत्रकार अनिल चमड़िया, विजय प्रताप, शाह आलम, और ऋषि कुमार सिंह अयोध्या में मंदिर मस्जिद विवाद पर अदालती फैसले के मद्देनजर प्रेस परिषद द्वारा खबरों पर निगरानी रखने की मांग को लेकर भारतीय प्रेस परिषद पहुंचे. इन लोगों ने भारतीय प्रेष परिषद के अध्यक्ष को एक पत्र सौंपा. पत्र में जो कुछ कहा गया है, उसे हम नीचे प्रकाशित कर रहे हैं-

मीडिया दंगे न भड़काने की कसम खाए

: वरिष्ठ पत्रकार अनिल चमड़िया ने की अपील : अयोध्या में बाबरी मस्जिद की जमीन पर राम मंदिर बनाने के विवाद ने हजारों जानें अब तक ले ली हैं। इस विवाद ने सामाजिक ताने बाने को क्षति पहुंचाने में भी बड़ी भूमिका अदा की है।

‘अयोध्या कांड’ की खबरों में ये सावधानी बरतें

‘साम्प्रदायिकता का खबर बनना उतना खतरनाक नहीं है, जितना खतरनाक खबरों का साम्प्रदायिक होना है।’ बाबरी मस्जिद ढहाने के मामले में 17 को कोर्ट का फैसला संभावित है। ऐसे में फिर मीडिया की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है।

जागरण ने फिर शुरू की ‘अयोध्या राजनीति’!

लगता है फिर काले दिन लौट रहे हैं। दैनिक जागरण में 31 अगस्त 2010 को प्रादेशिक खबरों के पेज पर ‘आईएसआई बिगाड़ सकती है माहौल’ सुर्खी से छपी खबर से लगता है कि यह अखबार 1992 की अपनी करतूतों दोहराने पर उतारु है।

क्या नीलू रंजन की खबर प्लांटेड थी?

: दैनिक जागरण में 13 जुलाई को छपी नीलू रंजन की एक खबर की जर्नलिस्ट यूनियन फॉर सिविल सोसायटी (जेयूसीएस) के लोगों ने कुछ इस तरह पड़ताल की है : आजाद की फर्जी मुठभेड़ के बाद केंद्र सरकार जिस तरह माओवादियों के खिलाफ अपने मिथ्या अभियान में लगी है उसे देखते हुए हमें लगता है कि नीलू रंजन की इस प्लांटेड स्टोरी की सच्चाई पर पत्रकारीय और वैचारिक दृष्टि कोण से बहस होनी चाहिए। किसी आमफहम हो चुके तथ्य पर सफेद झूठ बोलने और गुमराह करने का आरोप लगने के भय से सरकारें अपनी बात खुद न कह कर किस तरह ‘अपने’ पत्रकारों के मुह से अपनी बात रखवाती है, 13 जुलाई 2010 के दैनिक जागरण में छपी नीलू रंजन की खबर ‘नक्सलियों ने ही कराया आजाद का एंकाउंटर’ इसका ताजा उदाहरण है।

मुस्लिमों को कट्टर बताने वाला सर्वे रोको

: जेयूसीएस ने राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग को ज्ञापन सौंपकर की मांग : जर्नलिस्ट्स यूनियन फॉर सिविल सोसायटी ने एक निजी कम्पनी की ओर से युवा मुस्लिम धर्मगुरुओं के बीच किए जा रहे उस सर्वे का विरोध किया है, जिसमें मुस्लमानों की छवि को राष्ट्ररोधी और कट्टरपंथी के रूप में पेश करने की कोशिश की जा रही है। संगठन ने मंगलवार को राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष शफी कुरैशी को इस संबंध में ज्ञापन सौंपकर पूरे मामले हस्तक्षेप की मांग की। राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के चेयरमैन ने पूरे तथ्य में कार्रवाई का आवाश्वसन दिया है।

‘पत्रकारिता छात्र आदिल का निलंबन गलत’

जर्नलिस्ट्स यूनियन फॉर सिविल सोसाइटी (जेयूसीएस) ने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के पत्रकारिता के छात्र मो. आदिल हुसैन को विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा निलंबित करने की निंदा करते हुए इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला बताया। संगठन ने मांग की कि विश्वविद्यालय प्रशासन तत्काल मो. आदिल हुसैन का निलंबन वापस ले।

मौखिक परीक्षा में चुपचाप पांच-पांच सौ लिए

जेयूसीएस ने किया स्टिंग आपरेशन : जर्नलिस्ट यूनियन फॉर सिविल सोसाइटी (जेयूसीएस) ने प्रयाग महिला विद्यापीठ में एमए हिंदी की मौखिक परिक्षा के दौरान परीक्षार्थियों से पांच-पांच सौ रुपए रिश्वत लेने का स्टिंग वीडियो जारी करते हुए उपरोक्त परिक्षा को तत्काल रद करने और कालेज प्रशासन पर मुकदमा दर्ज करने की मांग की है। जेयूसीएस ने इस बाबत यूजीसी और राज्यपाल को भी तथ्यों को कार्यवायी हेतु पत्रक भेजा है। जेयूसीएस द्वारा जारी इस वीडियो टेप को 1 जून को 10 बजकर पचपन मिनट से 11 बजकर दस मिनट के बीच शूट किया गया है।

रिपोर्टरों, थोड़ा दिमाग भी लगाया करो

कांपैक्ट, इलाहाबाद में प्रकाशित खबर

‘विश्वविद्यालय में खंगाले जा रहे हैं माओवादियों के सूत्र’ शीर्षक से इलाहाबाद में अमर उजाला के टैबलायड अखबार ‘कांपैक्ट’ में एक खबर 16 फरवरी को छापी गयी, या कहें छपवायी गयी। खबर में बाइलाइन से नवाजे गए अक्षय कुमार की ‘खोजी पत्रकारिता’ का प्रदर्शन है।