: 26 सितंबर को नोएडा में सेमिनार : “पेड न्यूज का खेल कोई दो-या चार साल नहीं बल्कि बीस साल पुराना है” यह कहना है पूर्व चुनाव आयुक्त जीवीजी कृष्णमूर्ति का. किस-किस अखबार के कौन-कौन पत्रकार और संपादक पैसे ले कर खबरें छापते थे, यह अहम राज खोलने वाले हैं पत्रकार से चुनाव आयुक्त की कुर्सी तक पहुंचने वाले जीवीजी कृष्णमूर्ति.
वे इस गोरखधंधे से पर्दा हटाएंगे 26 सितंबर को राष्ट्रीय पत्रकार कल्याण ट्रस्ट के वार्षिक अधिवेशन पर आयोजित होने वाले सेमिनार में. नोएडा में आयोजित होने वाले इस आयोजन के मौके पर लखनऊ से वरिष्ठ पत्रकार के. विक्रम राव और काशी विद्यापीठ के डीन प्रो. राम मोहन पाठक भी मौजूद रहेंगे. जदयू अध्यक्ष शरद यादव और क्रिकेटर से राजनेता बने चेतन चौहान भी इस मौके पर अपने विचार रखेंगे. गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश के 15वें विधानसभा चुनावों के दौरान शरद यादव ने ही लखनऊ में सबसे पहले पेड न्यूज का मुद्दा उठाया था. सभा की अध्यक्षता जाने-माने साहित्यकार और पत्रकार पंकज सिंह कर रहे हैं.
ट्रस्ट के अध्यक्ष धीरज भारद्वाज के मुताबिक इस मौके पर न सिर्फ देश भर के पत्रकार और संवाददाता नोएडा पधार रहे हैं, बल्कि कई अन्य क्षेत्रों के नामचीन प्रतिनिधि भी मौजूद रहेंगे. श्री भारद्वाज के मुताबिक सभा में वरिष्ठ पत्रकार एवं टोटल टीवी के मैनेजिंग एडीटर अमिताभ अग्निहोत्री, भड़ास4मीडीया के संपादक यशवंत सिंह, आजतक के गिरिजेश वशिष्ठ, डॉक्यूमेंट्री निर्माता मयंक जैन व पीआर विशेषज्ञ डॉ. नवनीत आनंद भी अपने विचारों से अवगत कराएंगे. इस सेमिनार की खास बात यह रहेगी कि कई विशेषज्ञ पेड न्यूज की अहमियत बताते हुए उसकी तरफदारी भी करेंगे.
ट्रस्ट के मैनेजिंग ट्रस्टी नरेंद्र भाटी के मुताबिक उनकी संस्था पत्रकारों के हित में पिछले तीन वर्षों से अधिक समय से कार्यरत है. राष्ट्रीय पत्रकार कल्याण ट्रस्ट ने पिछले कुछ वर्षों में देश भर में अपनी शाखाएं फैलाई है. यह संस्था कई राज्यों में पत्रकारों के स्वास्थ्य एवं दुर्घटना बीमा करवा रही है. इतना ही नहीं, कई गरीब पत्रकारों की बहनों व बेटियों की शादी में भी संस्था ने आर्थिक सहायता उपलब्ध करवाई है. इस अधिवेशन पर संस्था समाज की कुछ छिपी हुई प्रतिभाओं को सम्मानित भी करेगी. इस बार अधिवेशन में पत्रकारिता के कुछ प्रतिभाशाली छात्रों को भी पुरस्कृत किया जाएगा. प्रेस विज्ञप्ति












shreyas
September 23, 2010 at 5:45 pm
ये नाटकबाजी बंद करें। पेड न्यूज से पेट में मरोड़ क्यों हो रहा है भाई। पैसे लेकर खबरें ही तो छापी है, किसी को मारने की सुपारी तो नहीं ले ली। पेड न्यूज का मुद्दा तो दिख गया। लेकिन यह जो केंद्र सरकार है, इसके एक मंत्री ने पिछले कार्यकाल में पहले ही दिन शपथ लेते हुए पत्रकारों के लिए वेतन आयोग के गठन की घोषणा की थी, आयोग गठित भी हो गया। उस सरकार का कार्यकाल खत्म होकर दूसरा कार्यकाल शुरू हो गया, लेकिन आयोग क्या कर रहा है, किसी को पता नहीं। उससे पहले भी मणिसाना आयोग के एरियर का क्या हुआ, वह भी किसी को नहीं पता। मालिकानों को फायदा हो रहा है, यह मरोड़ है, लेकिन पत्रकारों का अहित हो रहा, इसकी चिंता किसी को नहीं है। कुछ तो शर्म करो भाई।