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‘जमीन’ से जुड़े इंदौर के अखबार मालिक

हिंदी पत्रकारिता की राजधानी कहे जाने वाले शहर इंदौर में पिछले कुछ सालों में जमीन माफिया जमकर पनप रहा है। इसमें नेताओं, अफसरों और बिल्डरों के साथ-साथ अखबार मालिकों ने भी जमकर चांदी की फसल काटी है। कभी पत्रकारिता को मिशन कहने वाले स्वार्थ के हम्माम में कितने नंगे हैं, यह साफ जाहिर हो गया।

हिंदी पत्रकारिता की राजधानी कहे जाने वाले शहर इंदौर में पिछले कुछ सालों में जमीन माफिया जमकर पनप रहा है। इसमें नेताओं, अफसरों और बिल्डरों के साथ-साथ अखबार मालिकों ने भी जमकर चांदी की फसल काटी है। कभी पत्रकारिता को मिशन कहने वाले स्वार्थ के हम्माम में कितने नंगे हैं, यह साफ जाहिर हो गया।

बतौर पेशा यदि ये अखबार मालिक जमीनों की सौदेबाजी करते तो शायद गलत नहीं होता, क्योंकि पैसा कमाने का हक सभी को है, लेकिन बीते 10 सालों में इंदौर के जमीन माफिया में नेताओं, अफसरों, बिल्डरों और अखबार मालिकों का जो गठजोड़ हुआ है उसने कई के उजले चेहरों को उजागर कर दिया। दैनिक भास्कर ने भोपाल में डी.बी. मॉल बनाया और अब इंदौर में डी.बी. सिटी नाम से विशाल टाऊनशिप बनाना शुरू कर दी।

‘प्रभात किरण” नाम से पहले इंदौर से साप्ताहिक अखबार निकलता था, अब इस नाम से शाम का अखबार निकालता है। डॉयरी और कैलेंडर की छपाई का काम करने वाले ये लोग जमीन और पुरानी प्रापर्टी के हमेशा ही मुरीद रहे हैं। शहर की कई पुरानी प्रापर्टी और खाली जमीनों पर अखबार का नाम लिखे बोर्ड नजर आते हैं। सुरेंद्र संघवी इंदौर के पुराने उद्योगपति और बिल्डर हैं। करीब 20 साल पहले उन्होंने ‘चौथा संसार” नाम से अखबार निकाला था। वे संभवत: पहले घोषित बिल्डर थे, जिन्होंने अखबारबाजी करने की हिम्मत की थी।

करीब १२ साल पहले उनके द्वारा बनाई गई एक विशाल बिल्डिंग ‘राज टॉवर” को अवैध घोषित कर दिग्विजय सिंह के राज में उसे डायनामाइट से उड़ा दिया गया था। उसके बाद से उनका अखबार चल तो रहा है, पर ठंडा पड़ गया। लेकिन यह संघवी परिवार आज भी जमीन के सौदों मे सबसे आगे है और अखबार को एक हथियार के तरह इस्तेमाल करता है!

शाम के सबसे ज्यादा बिकने वाले अखबार ‘अग्निबाण” के मालिक राजेश चेलावत के बारे में पूरे शहर को खबर है कि वे और उनके साथ जुड़े माफिया टाईप के लोग विवादास्पद संपत्ति खरीदते हैं और सरकार और अफसरों पर दबाव बनाकर उसे लीगल करवाकर बेचते हैं। ऐसा ही शाम का एक अखबार ‘लोकस्वामी’ है जिसके कर्ता धर्ता  पुरी तरह जमीन से जुड़े है!

यहाँ का एक बड़ा अखबार ‘नवभारत” भी है, या यो कहे की था, उसने जमीन का सीधे धंधा तो नहीं किया, पर इसके मालिक प्रफुल्ल माहेश्वरी ‘एन.बी.प्लांटेशन” के नाम से पेड़ लगाने के धंधे में उतरे और जमीन दबाने की कोशिश की, पर एक्सपोज हो गए और आज अपना सब कुछ गंवा बैठे। लोगों को चूना लगाने की उनकी कोशिश सफल नहीं हुई और करोड़ों की देनदारी के चक्कर में फंस गए!

हिन्दी पत्रकारिता में सबसे ज्यादा सम्मान के साथ लिया जाने वाला नाम कभी इंदौर के पुराने अखबार ‘नईदुनिया” का था। लेकिन, जब से अभय छजलानी हाशिए पर आए हैं, यह परिवार भी जमीन के गोरखधंधे में शामिल हो गया। वैसे तो अभय छजलानी ने भी जमीन की सौदेबाजी से कभी कोताही नहीं बरती। शहर के बायपास इलाके की कई जमीनों की बंदरबॉट में वे शामिल रहे हैं। इंदौर के बीचों-बीच एक बड़ा खेल परिसर ‘अभय प्रशाल” बनाकर वे लंबे झमेले में फंस चुके हैं, पर आज भी ट्रस्ट का मुखिया के तोर पर उनका इसपर कब्जा बरकरार है।

शहर के मास्टर प्लान के मुताबिक रातो-रात जमीन कबाड़ने में वे भी कम नहीं थे। पर वे कभी लोगों की नजर में ‘बदनाम बिल्डर’ के रूप में नहीं आए। जब से अखबार की बागडोर उनके बेटे विनय छजलानी ने संभाली है, उसने खुलकर जमीन की सौदेबाजी शुरू  कर दी। कई विवादास्पद प्रापर्टी के खरीददारों में उनका नाम जोड़ा जाता है। बायबास पर हाल ही में उन्होंने एक बड़ा मैरिज गॉर्डन भी बनाया है। ताजा जानकारी है कि शहर के सबसे महंगे इलाके में एक शॉपिंग मॉल का सौदा भी उन्होंने 39 करोड में किया है।

बताया तो यह भी जाता है कि उनके साथ ब्लाइंड पार्टनर के रूप में प्रदेश सरकार का एक मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और उनका खास विधायक रमेश मैंदोला भी है। इंदौर मे अब कहा जाने लगा है कि नईदुनिया अब अखबार नहीं रहा पूरी तरह जमीन कबाड़ने के धंधे मे आ गया है!  इन दैनिक अखबारों के अलावा साप्ताहिक अखबार निकालने वाले कई बिल्डर भी इन दिनों इंदौर की जमीनों को खरीदने और खाली प्लॉटों पर कब्जा जमाने में लगे हैं।

इंदौर से एक वरिष्ठ पत्रकार की रिपोर्ट. उन्होंने नाम न प्रकाशित करने का अनुरोध किया है.

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0 Comments

  1. vijay

    September 22, 2010 at 4:21 pm

    Wastav me ye sab chor hei….jo prashasan aur gundo ke saath milkar chor-chor mosere bhai khel rahe hei…in sab ko nangaa karne waale warishtha partakar ko salaam aur bahdas ko chhapne ke liye badaaei

  2. ek Indori

    September 22, 2010 at 5:52 pm

    इंदौर के मीडिया हाउस और उनके ज़मीनी धंधे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप में इस तरह हैं :
    दैनिक भास्कर — अपोलो डीबी सिटी
    नईदुनिया — ओमेक्स सिटी वन, ओमेक्स सिटी टू, ओमेक्स हिल्स, लाभ गंगा
    नवभारत — एनबी सिटी
    राज एक्सप्रेस — राज होम्स
    समय गति — शहनाई
    चौथा संसार — संघवी हाईट
    शनिवार दर्पण — मंगल सिटी, मंगल माल आदि आदि
    सहारा टीवी — सहारा सिटी
    साधना न्यूज़ — हरियाली
    जी टीवी — विस्तारा (वीडियोकोन पार्टनर)
    प्रभात किरण, अग्निबाण, अवन्तिका, सिटी ब्लास्ट, आदि अपने अपने प्रोजेक्ट में काम कर रहे है. अधिकांश में नेता और अनेक आई.ए. एस. पार्टनर है.

  3. manohar kothari

    September 23, 2010 at 4:26 am

    पहली बार लगा कि किसी ने सच को सामने रखा है, आज इंदौर के हालत ये है के हर बड़े घोटाले मे कोई न कोई अखबार मालिक जुड़ा होता है, चाहे वो जमीन का मामला हो या कोई ठेका लेने का. १५ साल पहले तक इंदौर के लोगो को अपने शहर के अखबारों पर गर्व था पर आज शर्म आती है. नेताओ से दोस्ती करके जमीनों की बन्दर बाट करने वाले खुद को ईमानदार बताते हो लेकिन ” पब्लिक है ये सब जानती है ”

  4. shekhar sharma

    September 23, 2010 at 4:28 am

    … अरे ये लिस्ट तो अभी अधूरी है इसमें राज एक्सप्रेस के मालिक अरुण सहलोत का नाम नहीं है. आज के तारीख मे जमीनों के अफरा तफरी मे उनका कोई जोड़ नहीं, ये बात अलग है की अभी ये गन्दगी इंदौर नहीं आई! वैसे इंदौर मे इतने बड़े बड़े नकली अखबार मालिक है के अरुण सहलोत यहाँ आने की हिम्मत नहीं कर रहे होंगे. इनमे सबसे नया नाम तो विनय छजलानी का है जो पूरी तरह लैंड-ब्रोकर बन गये है, किसी संपादक की पत्रकारिता नहीं जागे इसलिए अपने ख़ास को संपादक बना दिया है जो खुद भी धीरे से इस धंधे मे आ रहा है!

  5. pankaj Vishkarma

    September 23, 2010 at 6:15 pm

    Indore ke pathko ko gyan dane walo, cullubhar paani mai dub maro. Pathak to samazate rahe ke akhbaaro ke maalik doodh ke dhule hote hai, ab maaloom hua ke samaj ke sabse bade chor to ye he hai. Sabko shiksha dane walo jara apne surat aaine mai dekho … choro kee baarat hai ye to.

  6. khalid khilji

    September 24, 2010 at 7:19 am

    sab se pehle to sarkar ne hi in logon ki aadat bigadi hai..bandar bbant ka kaam karne wale MP ki kisi bhi sarkar ne ye nahi dekha ki wahan kya chalta hai,press k naam par press complex….commercial complex ho gaye hain..yahan tak ki free press ne to sarkar ko hi awantit jagah kiray par de di hai…AKVN ko…ye to ek exmple hai….bhai..baaat nikli hai to ab dekho kahan tak jayegi……

  7. KANHAA

    September 24, 2010 at 3:58 pm

    UPDESH DENE WAALE IN PATRAKAARON KA BAHISHKAAR KAR DENA CHAHIYE…..BAHUT HO CHUKA AB TO AEISI GANDAGI SAAF HONA CHAHIYE……..

  8. rajesh

    September 25, 2010 at 6:07 am

    are bhai sahab patirka ko kyon chod diya.. abhi jamin ka darde series shuru ki hi isliye hai ki jamin mil sake.. cm aur indore development authority ke raat dein chaakar kat rahe the jab jamin nahi mili to jamin ka dard shuru kar diya.. aur rajasthan m too aisi muhim chalakar jamin par kabja kar hi chuke hai.. cm house ke paas jaipur main jo shagun garden hai.. uske baare main sabko pata hai.. case bhi chal raha hai.. aur aapke pas jo report hain woh bhi patrika ke reporter ki bheji hi lag rahi hai.. yeshwant bhai.. aisi prayojit khabron se bacheeye.. apko pata hai.. rajasthan sarkar ne karpurchand kulish ko ek sarkari makan allot kiya tha.. jo unke maut ke saalon baad bhi dehreo notice ke baad bhi patrika ke malik log khali karne ko tayyar nahi hai.. jaipur main kanchan tower aur laxmi tower bhi kothri bandhuo ki kabje ki jamin par hai.. aur dono ke nakshe bhi paas nahi hai.. jara in imandari ke putloo ko bhi dekho. bhai..
    aur jo yeh 7 th no. ka vijay naam ka comment hai. jinhone sacche patrakaron ko saalam likha hai. yeh report bhi aapko inhone hi bheji hai.. yeh pehle raj express ke liye dhandha karte the.. aajkal patrika ke sampadak ke liye jamin juta rahen hai..ise lagana jaroor warna lagega aap ke pas bhi sacchai nai hai..
    kya patrika se milkar blog chala rahe ho..

  9. joseph

    September 25, 2010 at 8:09 am

    hamaam mein sab nange….isame praveen sharma hello hindustan kaa naam jodiye…
    कुछ समय इंदौर में रहने के दौरान जो जानकारी मिली उसके आधार पर लिख रहा हूँ कि पत्रिका हैलो हिंदुस्तान के प्रकाशन का उद्देश्य अच्छी पत्रकारिता करना कभी नहीं रहा..पीत पत्रकारिता या पीआरओ की भूमिका निभाते ही दीखी यह. पता चला कि इसके संपादक बहुत बड़े ब्लेकमेलर हैं …भ्रष्टाचारी है..इसीलिए दैनिक अखबार शुरू कर रहे हैं…धंधा जो बढाना है..इन्हें ग्वालियर नईदुनिया से इसीलिए बाहर कर दिया गया था ..लाखों की बात नहीं ये करोड़ों में खेलने के ख्वाब देखते हैं इसलिए हर तरीके का भ्रष्टाचार,भ्रष्ट आचरण इनकी फितरत है..अखबार के लिए आवेदन देने वाली लड़कियां समझ जाएँ और सावधान रहें…

  10. Manoj Sharma

    September 25, 2010 at 2:55 pm

    Yahaa Par Sab Chor Hai… Chahey Dainik Bhaskar K Maalik Shudheer Agrawal, Nai Duniya K Maalik Chajalaane & Company Ya Phir Raj Express k Arun Sahalot…. Ye Sab K Sb Gundey Hai….

  11. vijai

    September 26, 2010 at 5:42 pm

    are chutiyon property kharidana koi galat kam hai kya

  12. BENAM

    September 27, 2010 at 3:04 pm

    PATRAKARITA KE BHESH MEGOOM RAHI IN KAALI BHEDO-BUILDERO,DALALO,DUKANDARO,TOKUBAZO KO YADI SABAK NAHI SIKHAYA TO YE POORE SHAHAR KO KHA JAYENGEE..INKO TO ZILABADAR….

  13. BENAAM

    September 27, 2010 at 3:30 pm

    The-LAL OF INDORE,D-LAL OF INDORE DALAL OF INDORE……..BACH KE REHANA RE BHAIYA…..

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