सूचना कानून ने भारतीय नागरिकों को बड़ी ताकत दी है। लेकिन कुछ सूचना आयुक्तों का नौकरशाही रवैया मुश्किलें पैदा कर रहा है। इन्हें लाल बत्ती लगाने और बाडीगार्ड लेकर चलने की हैसियत मिली है। इसके कारण ये खुद को नागरिकों से उपर समझते हैं। इनके तेवर भी उन्हीं नौकरशाहों जैसे हो जाते हैं जिनके खिलाफ यह कानून है। देश के सूचनाधिकार कार्यकर्ताओं ने सूचना आयुक्तों से अपने वाहनों पर लाल बत्ती उपयोग बंद करने व अंगरक्षक का दिखावा न करने की अपील की है। इस बारे में सूचना आयुक्तों को पत्र भेजा गया है, जो इस प्रकार है-
सेवा में
केंद्रीय एवं राज्य मुख्य सूचना आयुक्त एवं सूचना आयुक्त
एक निवेदन : वाहन पर लाल बत्ती का उपयोग बंद करें और नागरिकों के करीब आएं
मान्यवर
12 अक्तूबर 2010 को भारत के नागरिक सूचना का अधिकार कानून की पांचवीं वर्षगांठ मनाएंगे। यह अवसर भारतीय नागरिकों को संविधान प्रदत्त मौलिक अधिकारों की प्राप्ति की दिशा में अधिकाधिक समर्थ बनाने के ऐतिहासिक दिवस के बतौर याद किया जायेगा। यह दिन आम आदमी को अधिकाधिक लोकतांत्रिक अधिकारों से लैस करने की दिशा में ठोस कदम बढ़ाने का गौरवपूर्ण अवसर होगा।
लेकिन यही दिन इस कसक का भी होगा कि देश और राज्यों के कतिपय सूचना आयोग या सूचना आयुक्त विगत पांच वर्षों में नागरिकों की अपेक्षाओं पर खरे नहीं उतरे हैं। यहां तक कि कुछ सूचना आयोगों या सूचना आयुक्तों से गंभीर निराशा भी हाथ लगी है। कहीं अधिकारियों के प्रति अत्यधिक नम्र रवैया अपनाते हुए सूचना कानून के प्रावधानों का खुला उल्लघन जारी रखने की शिकायत आती है तो कहीं अनियमितता के गंभीर आरोप सामने आते है। हद यह कि इस देश में ऐसे भी सूचना आयोग हैं जो अपने फैसलों को सावर्जनिक नहीं करने पर अड़े हैं। इसके कारण सूचना कानून के सहारे भारतीय नागरिकों को संबल प्रदान करने और पारदर्शिता व जवाबदेही का परिवेश निर्मित करने के महान उद्देश्य को गहरे नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। कहा जा रहा है कि जब नाविक ही नाव को डुबोयेगा तो उसे कौन बचा सकता है।
अतः समय आ गया है जब सूचना आयोगों की भूमिका पर गंभीर चर्चा हो और एक कारगर रास्ता निकले। देश भर के सूचनाधिकार कार्यकत्र्ता विभिन्न रूपों में इस पर सवाल कर रहे हैं। लिहाजा, स्वयं सूचना आयुक्तों का कर्तव्य बनता है कि इस दिशा में कारगर पहल हो। हमें उम्मीद है कि देश और राज्यांे में ऐसे मुख्य सूचना आयुक्तों, सूचना आयुक्तों की कमी नहीं जो इस पद को महज पैसे, पावर और प्रतिष्ठा की नौकरी नहीं बल्कि इस लोकतंत्र और इसके नागरिक के प्रति एक दायित्व के बतौर देखते होंगे। ऐसे सभी मुख्य सूचना आयुक्तों/सूचना आयुक्तांे से निवेदन है कि वह 12 अक्तूबर 2010 को सूचना कानून की पांचवीं वर्षगांठ पर निम्नांकित बिंदुओं की स्वयंघोषणा करें-
1. आप स्वेच्छा से अपने वाहनों पर लाल बत्ती का उपयोग करना बंद करें क्योंकि ऐसे प्रतीक चिह्न हमें नागरिक से श्रेष्ठ नस्ल का कोई जीव होने का बोध कराते हैं।
2. आप स्वेच्छा से अपने साथ अंगरक्षक रखना बंद कर दें।
3. आप स्वेच्छा से अपनी संपत्ति की सार्वजनिक घोषणा करें।
आशा है, सूचना का अधिकार के प्रावधानों एवं इसकी भावना के समुचित अनुपालन की दिशा में सर्वाधिक महत्वपूर्ण संस्था सूचना आयोग को वास्तविक गरिमा प्रदान करने और इस जनोन्मुखी बनाते हुए नागरिकों के प्रति अपने दायित्य का एहसास करने की दिशा में आप ठोस कदम उठायेंगे।
आभार
सूचनाधिकार कार्यकर्ता
बिहार-झारखंड












ताजी सूचना
September 26, 2010 at 4:39 pm
केंद्रीय मुख्य सूचना आयुक्त वजाहत हबीबुल्लाह ने इस पत्र और इससे संबंधित आनलाइन पिटिशन के प्रति सकारात्मक संकेत दिये हैं। उन्होंने 28 सितंबर को केंद्रीय सूचना आयोग की बैठक में यह मामला प्रस्तुत करने और इस पर समुचित विचार करने की घोषणा की है।
Dr. Vishnu Rajgadia
September 26, 2010 at 6:32 pm
Thanks for this story.
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ONLINE PETITION
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