: भोपाल स्थित पत्रकारिता विश्वविद्यालय में हो रहे हंगामे की लाइव रिपोर्ट, एक पत्रकार द्वारा : दिनांक 25 सितंबर 2009 रात 11 बजे तक… गुलाम अली की चंद पंक्तियों पर गौर फरमाइये- हंगामा है क्यूं बरपा… थोड़ी सी जो पी ली है… ड़ाका तो नहीं ड़ाला… चोरी तो नहीं की है… अब इन पंक्तियों को माखनलाल के परिप्रेक्ष्य में देखिये- हंगामा है क्यूं बरपा…. छोटा सा आदेश जो आया है… नौकरी से तो नहीं हटाया… पद ही तो छीना है… असल में इन पंक्तियों का असर देखने को मिल रहा है माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के पत्रकारिता विभाग में। कुलपति बी. के. कुठियाला के आने के बाद से लगातार माखनलाल में हंगामों का दौर जारी है!
इन्हीं हंगामों में नया नाम जुड़ा है पत्रकारिता विभाग के विभागाध्यक्ष पीपी सिंह का! पीपी सिंह पर उन्हीं की विभाग की एक शिक्षिका ने मानसिक प्रताड़ना का आरोप लगाया है. अनुमान और परिणाम पर जाने से पहले सिलसिलेवार पूरे घटनाक्रम को समझिये…
तारीख – 23 सितंबर 2009
समय – लगभग दोपहर 1 बजे
सहारा समय न्यूज चैनल पर पत्रकारिता विभाग के अध्यक्ष पी पी सिंह को पद से हटाये जाने की खबर ब्रेक होती है… सहारा समय की भाषा की एक बानगी देखिये..
…….ब्रेकिंग न्यूज…… पुष्पेन्द्र पाल सिंह नपे
ब्रेकिंग न्यूज ….विभागाध्यक्ष पद से हटाया गया…..
…….ब्रेकिंग न्यूज…… महिला शिक्षिका ने लगाया मानसिक प्रताड़ना का आरोप
ब्रेकिंग न्यूज …..संजय द्विवेदी को अतिरिक्त प्रभार…..
खबर फैलते ही विश्वविद्यालय परिसर में हंगामा शुरू होता है… पीपी सिंह के भोपाल में तैनात छात्रों का परिसर में आगमन… कुछ ही समय में लगभग 50 से ज्यादा पत्रकारिता विभाग के छात्रों का परिसर में हंगामा शुरू… छात्रों ने कुलपति से मिलने की इच्छा जाहिर की लेकिन कुलपति के विश्वविद्यालय पहुंचने से पहले ही छात्रों ने तोडफोड़ करना प्रारंभ कर दिया… कुलपति के कक्ष से लेकर पंचम तल पर स्थित कार्यालय में पत्रकारिता विभाग के छात्रों ने जमकर उत्पात मचाया… इस पूरे मामले में पत्रकारिता विभाग की लेक्चरर राखी तिवारी, पुस्तकालय अध्यक्ष आरती सारंग सहित कुछ अन्य फेकल्टीज जनसंचार विभाग के अध्यक्ष संजय द्विवेदी से मिलने पहुंची और उन्हें पीपी सिंह से मिलने के लिए कहा… जब संजय दिवेदी पीपी सिंह से मुलाकात करने पहुंचे तो छात्रों को लगा कि वे पत्रकारिता विभाग के अध्यक्ष पद का चार्ज लेने पहुंचे हैं… छात्रों ने संजय द्विवेदी को 45 मिनट तक पीपी सिंह के केबिन में बंद कर दिया और उनके बाहर आने पर गाली-गलौच शुरू कर दी… शब्द इतने गंदे थे कि लिखना नामुमकिन है…
यह पूरा वाकया पीपी सिंह की आंखों के सामने चलता रहा लेकिन उन्होंने अपने छात्रों को रोकने की कोई कोशिश नहीं की… कोशिश उनके साथ हाथापाई करने की भी की गई… हालांकि कई अखबारों ने अगले दिन इस खबर को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया… जिनमें मुख्य रूप से भास्कर और पत्रिका समाचार पत्र है… इन अखबारों में इस खबर को करने वाले और लिखने वाले लोग ओर कोई नहीं बल्कि पत्रकारिता विभाग के ही पूर्व छात्र हैं… संजय दिवेदी ने अपने साथ हुई अभद्रता का हालांकि खंडन किया है… उनका कहना था कि उनके साथ कोई अभद्रता नहीं हुई लेकिन प्रत्यक्षदर्शियों का कहना कुछ ओर ही है… हंगामें के बाद पुलिस ने पूरे प्रकरण में पत्रकारिता विभाग के छात्र अजय वर्मा, मनिंद्र पांड़े, परिक्षित सिंह, रोहित और कुलदीप समेत 40 अन्य लोगों को आरोपी बनाया है…
तारीख – 24 सितंबर 2009
समय – सुबह 9 बजे
पत्रकारिता विभाग के छात्र कथित तौर पर भूख हड़ताल पर बैठे… असल में कथित तौर पर इसलिए क्यूंकि कुछ अन्य विभाग के लोगों ने उन्हें समोसों के साथ देखा… पी पी सिंह के देशभर में फैले सिपहसालारों का भोपाल में आगमन… दोपहर दो बजे के करीब पत्रकारिता विभाग के कुछ छात्र संजय दिवेदी से माफी मांगने उनके केबिन में पहुंचे… तीन बजे के लगभग कुलपति ने हड़ताल पर बैठे बच्चों को मिलने बुलाया लेकिन बच्चे नहीं पहुंचे… उन्होंने कुलपति के नीचे आकर बात करने को कहा… कुलपति बच्चों की मांग पर नीचे पहुंचे लेकिन छात्र अपनी जिद पर अड़े थे… उनकी मांग थी कि पी पी सिंह को तुरंत बहाल किया जाये और छात्रों के खिलाफ दर्ज मुकदमें वापस लिये जायें… हालांकि कुलसचिव सुधीर कुमार त्रिवेदी ने बच्चों को समझाया की बहाल की मांग वे तब करे जब पी पी सिंह को हटाया गया हो… उन्हें तो सिर्फ अध्यक्ष पद से हटाया है न कि उनका निलंबन किया गया है… यानी उनकी पहली मांग ही गलत है… लेकिन छात्र अपनी मांग पर अड़े रहे…उनका कहना था कि वे अपने अध्यक्ष की कुर्सी पर किसी ओर को बैठा नहीं देख सकते… प्रशासन के आदेश के अनुसार वो कोई ओर संजय दिवेदी है जिनसे कुछ समय पहले बच्चे माफी मांगने का दिखावा करके आये थे… रात्रि करीब 8 बजे भोपाल एसडीएम विश्वविद्यालय परिसर पहुंचे और छात्रों को जगह खाली करने को कहा क्यूंकि एक ओर जहां षहर में धारा 144 लागू है वहीं दूसरी और हड़ताल पर बैठने की इजाजत न तो पुलिस से ली गई है और न ही विश्वविद्यालय प्रशासन से, जो कि कानूनी तौर पर सही है…. पुलिस के आदेश पर विद्यार्थी अपना बैनर, पोस्टर उठाकर चलते बने…
इस पूरे दिन भर में खास यह रहा कि जहां एक ओर पत्रकारिता विभाग के वर्तमान विद्यार्थी कथित भूख हड़ताल पर बैठे रहे, वहीं समर्थन के लिए देशभर से पहुंचे सभी पूर्व विद्यार्थी परिसर के बाहर चाय, समोसे और सिगरेट का लुत्फ उठात रहे…
तारीख – 25 सितंबर 2009
समय – सुबह 9 बजे
पिछले दिन की तरह ही बच्चे फिर से हड़ताल पर बैठ गये… पर इस बार बैनर का शीर्षक परिवर्तित था… अब शीर्षक भूख हड़ताल नहीं अपितु क्रमिक भूख हड़ताल था… पूर्व छात्रों की संख्या में भी इजाफा हो रहा था… लेकिन सबसे पहले सुबह के समाचार पत्रों की बात… पत्रिका ने तो समाचार की विश्वसनीयता ही खत्म कर दी… जितनी घटिया और एकतरफा रिपोर्टिंग की गई उसे देखकर नहीं लगता की ये वही पत्रिका है जिसका नाम लोग राजस्थान प्रदेश में इज्जत के साथ लेते हैं… पर चूकिं खबर करने वाले अश्वनी पांडेय पत्रकारिता विभाग के ही विद्यार्थी हैं इसलिए ऐसा होना भी लाजमी है… दैनिक भास्कर, हिन्दुस्तान टाईम्स और राज एक्सप्रेस का हाल भी कुछ ऐसा ही है… इनमें भी खबर में शामिल आशीष महर्षि और गगन नायर भी पत्रकारिता के ही विद्यार्थी है… दोपहर लगभग दो बजे सहारा समय समेत कई चैनलों के पत्रकार परिसर में पहुंचे… पत्रकारों के पहुंचते ही हड़ताल पर बैठी एक लड़की बेहोश होकर गिर पड़ी… इसके तुरंत बाद एक और लड़की बेहोश… दोनों को तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया… हालांकि, पत्रकारों के जाने के बाद शाम तक कोई बेहोश नही हुआ… रात 9 बजे फिर से भोपाल एसडीएम मौके पर पहुंचे और परिसर को खाली करवाया… साथ ही विद्यार्थियों को फिर से हड़ताल पर नहीं बैठने की हिदायत भी दी…
विमर्श-
असल में कुछ लोग इस पूरे वाकये को कुलपति कुठियाला का पी पी सिंह पर वार बता रहे हैं तो कुछ लोग इसे उनके खिलाफ रची गई एक गहरी साजिश… पर वाकई में ऐसा कुछ भी नहीं है…. चूंकि पत्रकारिता विभाग की शिक्षिका ने पी पी सिंह पर मानसिक प्रताड़ना का आरोप लगाया और पूरा मामला राज्य महिला आयोग के पास विचाराधीन है… इस मामले पर में महिला आयोग ने कुलपति को कार्रवाई करने के लिए एक पत्र भी भेजा था… जिसको ध्यान में रखते हुए कुलपति ने पी पी सिंह को सिर्फ अध्यक्ष पद से हटाया है न कि उन्हें निलंबित किया है… मगर पी पी सिंह ने इसे अपने सम्मान से जोड़ लिया… उनके वर्तमान और पूर्व विद्यार्थी भी उनके लिए हड़ताल पर बैठ गए….
सवाल यह है कि पी पी सिंह की इज्जत तो इज्जत और महिला शिक्षिका की कोई इज्जत नहीं… और आखिर ऐसा क्या कारण है कि लड़कों के साथ लड़कियां भी महिला शिक्षिका की बात गलत मान रही है… पत्रकारिता विभाग से ही शिक्षा प्राप्त कुछ पूर्व विद्यार्थियों की माने तो पी पी सिंह के समर्थन में बच्चों के बैठने का कारण उनका नौकरी दिलाने का किया गया वादा है… असल में पी पी सिंह के विभाग में बच्चों के भी कई स्तर होते हैं… कुछ उनके खास होते हैं और कुछ बेचारे पिछड़े हुए लोग… खास लोगों को तो अच्छी जगह नौकरी मिल जाती है लेकिन पिछड़े लोग नौकरी के लिए संघर्ष करते हैं।… पर वाकई सच्चाई यह है जिन लोगों ने अपने दम पर नौकरी पाई वे आज पी पी सिंह के समर्थन में भोपाल नहीं पहुंचे और उनके चापलूस लोग दूर होने के बाद भी चापलूसी करने यदा कदा भोपाल पहुंचते रहते हैं..
अगर पीपी सिंह निर्दोष हैं तो उन्हें प्रशासनिक कार्रवाई का सम्मान करना चाहिए ओर बच्चों को वापिस पढ़ाई की ओर लौटनें के लिए प्रेरित करना चाहिए… क्यूंकि इस पूरे मामले में नुकसान तो बच्चों का ही हो रहा है…
दिवाकर गुप्ता












TRUTH
September 27, 2010 at 3:29 pm
Patrakar dwara ki gayi live reporting mein ektarfa hone ki boo aa rahi hai. Aur patrakar ko main ye bata dena chahta hoon ki live reporting usi dein k live program ki hoti hai na ki pehle k dino k program ki.
patrakar mahoday Khutiyala ki chmacha giri k alawa kuch nhi kar rahe hain, shayad is chamchagiri se khutiyala khush hoke patrakar ko naukri pe rakh apne tukdo pe palne shuru kar de
agar patrakar ko naukri ki itni hi jarurat hai to itna niche gir k chaplusi aur giri hui harkat karne ki kya jarurat hai, aap mujse bol dete main aapko aapki aukaad layak naukri to de hi deta
patrakar ji apni aukaad mein aa jao
sanjay sharma
September 27, 2010 at 5:21 pm
patrakarita ke is daur me aapki reporting ka shayad hi koi jawab ho…bcoz i m speechless
sanjay sharma
September 27, 2010 at 5:31 pm
ye reporting ka naayaab chahra hai..chahre ki muskaan kam na hone dena..best of luck…
ajit kumar
September 27, 2010 at 6:05 pm
are guptajee kam-se kam date line me sal to sahi likh diya hota. har jagah 2009 likha hai. mamla vishwavidyaly ka hai lihaja ab sab kuchh vahan ke student par chhor dijiye. sab thik ho jayega. anawasyk ise tool dekar student ka hi nuksan kar rahe hain log.
पूर्व छात्र
September 27, 2010 at 6:07 pm
दिवाकर भाई, एकदम सही लिखा है आपने। यह संभवतः देश का पहला विश्वविद्यालय है, जहां पर पढ़ाई के अलावा सब होता है। नेतागिरी, कानाफूसी, चापलूसी, लड़कीबाजी और खास लोगों पर हर तरह की मेहरबानियां। जो भी छात्र वहां पहुंचकर हुड़दंग कर रहे हैं वो केवल यह जताना चाहते हैं कि वो कितने लॉयल हैं। बात चाहे सही हो या गलत, यदि सिंह साहब का मामला है तो वो जो कहेंगे वह सब सही होगा।
ranjeet
September 27, 2010 at 8:49 pm
bhai sahab, lag raha hai jaise aap kuthiyala ji ke pravakta hon. aap khud hi likh rahe hain ki ladkiyan bhi PP singh ke sath hain, aise men kuchh to baat hogi ki students apne teacher ke sath hain. jahan tak naukri ki baat hai, newspapers ya tv channel me pahli baar naukri bhale jugad se mile, baad me pooch akal ki hoti hi hai…. wahan pp singh jaise log kaam nahi karte.
ravi
September 28, 2010 at 6:08 am
Dear Mr Gupta,
This is year 2010 and not 2009 as mentioned above. Please correct the mistake.
But the point you have made is absolutely correct. This is sheer politics and Pushpendra Pal Singh only wants to show his clout otherwise we all know that his students are nothing more than puppets and he can stop them from any sort of demonstration anytime he wishes to.
God help this University.
scam
September 28, 2010 at 6:31 am
vah re tarafdari
bose apko to advocate hona tha………………
ramlal
September 28, 2010 at 6:49 am
क्या फर्जी और बेहूदा लिखते है आप
अपने जिस घटिया तरीके से लिखा है गली गलौच भी लिख सकते थे आपको यह किसने बताया कि यह सब पीपी सिंह के सामने चलता रहा और उन्होंने कुछ भी नहीं किया. अगले दिन जितनी बैलेंस खबर भास्कर मैं थी उसके आगे के सच के सारे दावे कयास मात्र थे और रही बात पत्रिका कि तो उसने भी वाही लिखा जो सच है. जब आप इस पुरे मसले को साजिश नहीं मन रहे है तो आयोग के फैसले के आने के पहले अपना निर्मय सुनाने का क्या हक़ है ….जिस आदमी को हटाया जाय उसे इसका समाचार किसी ऑफिशियल लेटर कि बजाय न्यूज़ चेनेल से मिले यह कुसी पत्रकारिता है. षड़यंत्र ही हो सकता है.आपको पता होना चाहिए आयोग कि सुनवाई आज होनी है तो हटाने का पत्र पहले कैसे भेज दिया?
और रही बात नौकरी लगाने कि तो इस विवि में पीपी सिंह रहे ना रहे उनके बच्चों को नौकरी के लिए किसी की दलाली खाने की नौबत नहीं आएगी वे जहा भी जायेंगे रास्ता बना लेंगे.
आप की अफवाहे जारी रखे …….
agyaani
September 28, 2010 at 8:09 am
>:(
agar khabar 2009 ki hai to ab kyun chhap rahi hai ya lekhak mahodya 2010 ko 2009 maan ke chal rahe hain?
ek lekh mein bar-2 galti achhe patrakar ko shobha nahi deta. kaam ka bojh jyada hai to bhai rest kar ke likh lo …………… chinta kis baat ki hai?
abhishek sharma
September 28, 2010 at 8:41 am
ताज़ा समाचारों में माखनलाल पत्रकारिता विश्विद्यालय में पत्रकारिता विभाग के अध्यक्ष श्री पुष्पेन्द्र पाल सिंह जी को महिला आयोग ने क्लीन चिट दे दी है, आरोप लगाने वाली शिक्षिका डॉ ज्योति वर्मा आज महिला आयोग के समक्ष पेश नहीं हुई. पहली सुनवाई में ज्योति वर्मा का अनुपस्थित रहना इशारा करता है कि पी पी सिंह जी के खिलाफ ये आरोप किसी सुनियोजित साजिश के तहत लगाये गए थे,, इसके साथ ही कुलपति के निर्णय भी गलत साबित हो रहे है..
Radha saxena
September 28, 2010 at 8:42 am
ek the makhan lal, ek hain puspendra pal.
reena
September 28, 2010 at 9:32 am
jisne bhi ye vimarhs likha h, unse vinamr nivedan h ki kya mahila hona apne aap me kaafi hota h? kyuki jis mahila ki ye baat ki ja rahi h wo aaj jab mahila aayog me apna hak maangne ki baat aayi to wo kha gaayab ho gai?
ek aadmi hamesh isliye galat nahi hota kyuki wo aadmi h. aur aap ke vimarsh k liye jaankaari de du ki mahila aayyog ne p.p. singh ji ko apne pad par bahaal kar diya h.
agr himmat h to is prashn ka uttar dijiye ki kya mahila aayog ki mahilaye bevkoof h jo unhone yah feslaa diya?
bhagvan aap ko sahi aur galat me antar karne ki shkti pradaan kre….
Student
September 28, 2010 at 10:31 am
ye sab chhodiye mr. diwakar ji…kyunki in sabke bare me aapse baat karna us mahaan insaan ka apmaan hoga…aap to ye bataiye ki aapko paise kittne diye gaye hain ye ant shant likhne ke liye?????
bhadasi
September 28, 2010 at 10:39 am
guptaji aap ke pas bhi jankari galata pahunchi avvval to yah hi ki jin chhatron ko badnam karane ki koshish aapne ki hai uname se kuchh to patrakarita bibhag hi nahi mcu ke hi chhatra nahi hain. aur jis ijjat ki bat kar aap chatkhare lene ki koshish kar rahe hain waisa kuchh hua nahi, mansik utpeedan ke arop ka matalab aap samajhate honge. waise jo mcu me nahi padhate wo bhi pp sing ke helpful nature ki wajh se samman karate hain…..pp singh insan hi hain kuchh ki madad nahi bhi kar pate…..bas unhe aaj chatkhare lene ka arop lagane ka mauka mil gaya.
Student
September 28, 2010 at 11:18 am
kyun Mr. Gupta……cheque mila ya cash?????
ANAS JOURNALIST
September 29, 2010 at 6:48 am
haqiqat se na wakif shrimaan gupta ji,kabhi aa kar hmse bhi pooch lijiye ki asal wakya kya hai,jis mahila ki baat aap kar rahe hain wo to khud hi mahila ayog me nhi pahunchi,aap hi pahuch jaate aur apna paksh rakh dete..aap sahi hai to kya hm jhoote hai,mahila ayog jhuta hai,sara makhanlal parivaar bhi pp singh ji ke saath hai,ek aap aur ek aapke vc saheb hi hain jo ulti ganga baha rahe hai..