
डा. सी. जयशंकर बाबू
कोयंबत्तूर नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति के सदस्य-सचिव के रूप में अपनी सेवाएँ उपलब्ध कराते हुए इन्होंने राजभाषा साधन के नाम से एक सी.डी. बनाकर सभी सदस्य-कार्यालयों, सरकारी उपक्रमों एवं बैंकों में निःशुल्क वितरित किया। कंप्यूटर पर भाषाई संसाधन तथा यूनिकोड पर पांच सौ से अधिक कार्यशालाओं के माध्यम से दक्षिण भारत के चारों राज्यों (आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु एवं केरल) में दस हजार से अधिक लोगों को भारतीय भाषाओं में कंप्यूटिंग पर प्रशिक्षण दिया। इनके प्रशिक्षण में शामिल अधिकारी कंप्यूटर पर ई-मेल हिंदी और भारतीय भाषाओं में आसानी से भेज पा रहे हैं जिससे भारत सरकार की राजभाषा नीति के कार्यान्वयन में काफ़ी बढ़ावा मिला है।
इनकी कक्षाओं में प्रशिक्षित कंप्यूटर प्रयोगकर्ताओं में भाषाई कंप्यूटिंग और यूनिकोड के प्रयोग की चेतना बढ़ गई है। इन्होंने सरकारी अधिकारियों के अलावा विभिन्न कालेजों छात्रों एवं पत्रकारों को भी कंप्यूटर पर भाषाई कंप्यूटिंग का विशेष प्रशिक्षण दिया है। डॉ. बाबु बहुभाषाई ब्लागर भी हैं, इनके बारह भाषाओं के ब्लाग हैं। इनके माध्यम से वे नवलेखकों को साहित्य लेखन की प्रेरणा देने के साथ-साथ भाषाई कंप्यूटिंग के प्रति रुचि जगा रहे हैं। इनके संपादन में शीघ्र ही हिंदी का दक्षिणायन के शीर्षक से एक शोधपरक रचना संकलन प्रकाशित होने जा रहा है। दक्षिण भारत में हिंदी की अलक जगाने की दिशा में ड़ॉ. बाबु निरंतर प्रयत्नशील हैं।












Dr Hanumna Galwa
October 14, 2010 at 12:24 am
badhai
Dr hanuman Galwa
Edit page
Daily news aipur Rajasthan
Dr Hanumna Galwa
October 14, 2010 at 12:26 am
badhai
गंगा सहाय मीणा
October 16, 2010 at 4:15 am
बधाई हो जयशंकर जी. आशा है आपके आने से हिन्दी भाषा और साहित्य का तकनीक की दुनिया में विकास होगा. कुछ साल पहले पांडिचेरी विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग में विद्यार्थियों की कमी की वजह से काफी मुश्किलें आ रही थीं, लेकिन अभी स्थिति ठीक है. आशा है आपके आने से माहौल और अच्छा होगा
-[b]गंगा सहाय मीणा[/b], सहायक प्रोफेसर, भारतीय भाषा केन्द्र, जेएनयू.
[b]पूर्व सहायक प्रोफेसर, हिन्दी विभाग, पांडिचेरी विश्वविद्यालय, पुदुच्चेरी[/b].