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यूपी पुलिस की दबंगई के सामने महिलाएं बेबस

नई दिल्ली, महानगर संवाददाता : अंग्रेजों ने हिन्दुस्तानी पुलिस का गठन हिन्दुस्तानियों पर ही राज करने के लिए किया था। अंग्रेज तो चले गए लेकिन पुलिस आज भी राज करने वाले अंदाज में ही काम कर रही है। खासतौर से उत्तर प्रदेश की पुलिस का तो दबंगई में कोई जवाब नहीं। प्रदेश के जिला गाजीपुर के थाना नंदगंज की पुलिस की हरकतों से तो यही झलकता है। पुलिस ने तमाम नियम कानूनों को ठेंगा दिखाते हुए एक पत्रकार की बूढ़ी मां, अपाहिज चाची और बेबस भाभी को 18 घंटे थाने में बिठाए रखा।

नई दिल्ली, महानगर संवाददाता : अंग्रेजों ने हिन्दुस्तानी पुलिस का गठन हिन्दुस्तानियों पर ही राज करने के लिए किया था। अंग्रेज तो चले गए लेकिन पुलिस आज भी राज करने वाले अंदाज में ही काम कर रही है। खासतौर से उत्तर प्रदेश की पुलिस का तो दबंगई में कोई जवाब नहीं। प्रदेश के जिला गाजीपुर के थाना नंदगंज की पुलिस की हरकतों से तो यही झलकता है। पुलिस ने तमाम नियम कानूनों को ठेंगा दिखाते हुए एक पत्रकार की बूढ़ी मां, अपाहिज चाची और बेबस भाभी को 18 घंटे थाने में बिठाए रखा।

उन्हें छोड़ा तभी गया जब नामजद शख्स, जो पत्रकार का चचेरा भाई है, ने पुलिस के समक्ष सरेंडर किया। जिले से लेकर राज्य तक के आला पुलिस अधिकारियों का इस सिलसिले में एक ही रेडीमेड जवाब है, मामले की जांच कराई जा रही है। घटना के तार दिल्ली के पत्रकार यशवंत सिंह से जुड़े हैं। यशवंत का चचेरा भाई यूपी में इलाके से ग्राम प्रधान का चुनाव लड़ रहा था। उसका प्रमुख प्रतिद्वंद्वी राम निवास सिंह उर्फ नेमा भैय्या पर कुछ लोगों ने जानलेवा हमला किया था। हमले में किसी एक समर्थक की मौत हो गई थी। इसी सिलसिले में स्थानीय पुलिस को यशवंत के चचेरे भाई की तलाश थी। बकौल यशवंत एक रात पुलिस धड़धड़ाती हुई गांव में पहुंची और बगैर किसी कहासुनी व वारंट के उनकी मां यमुना सिंह, चाची रीता सिंह (आरोपी की मां) और भाभी सीमा सिंह को उठाकर थाने ले गई। आरोप है कि तीनों को गैर-कानूनी रूप से 18 घंटे तक बंधक बनाए रखा। रात 8 से लेकर अगले दिन दोपहर 1 बजे तक।  तीनों महिलाओं को तभी छोड़ा गया जब अभियुक्त ने थाने में सरेंडर किया। यशवंत का कहना है कि आरोपी मेरा चचेरा भाई जरूर है लेकिन चूल्हा-चौका वर्षों पहले अलग हो चुका है। खेती-बारी सब बंट चुका है। दोनों के घर अलग-अलग हैं। बावजूद इसके पुलिस यमुना सिंह को क्यों जबरन उठा ले गई, इसका जवाब अभी तक यशवंत को नहीं मिला है।

यशवंत ने बताया कि कानून साफ-साफ यह कहता है कि किसी भी महिला को बगैर महिला पुलिस के साथ लिए हिरासत में नहीं लिया जा सकता और न ही वैसे थाने में रखा जा सकता है जहां कोई महिला पुलिसकर्मी तैनात न हो। उन्होंने कहा कि मेरी मां का हत्यारोपी चचेरे भाई से दूर-दूर तक कोई वास्ता नहीं है फिर उन्हें किस जुर्म में पुलिस अपने साथ ले गई। इसका तर्कसंगत जवाब क्षेत्र के आला पुलिस अधिकारियों के पास भी नहीं है। इस मामले में आला अधिकारियों से गुहार लगाने के बावजूद अभी तक किसी भी पुलिसकर्मी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई है। साभार : हमारा महानगर

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0 Comments

  1. shailendra kumar shukla

    October 24, 2010 at 5:56 am

    रिश्वत के पैसे खाकर और नेताओ के तलवे चाटते चाटते इनके अंदर का इंसान मर चुका है। पैसे के लिए उत्तर प्रदेश की पुलिस कुछ भी कर सकती है
    तॊ जरा बचके रहना भाइ

  2. SHAILENDRA PARASHAR

    October 24, 2010 at 6:36 am

    यसवंत जी
    हम लोग कुछ कर नहीं सकते इन बेलगाम पोलिसे बालो का उ.प्र. का हर इन्सान बस अ ही दुआ करता है की मेरा सव कुछ ले लो लेकिन बस खुशाल उ.प्र. हमे दे दो सरकार हम लोग बनाते है और हम ही आज बेबस बैठे है इन पोलिसे वाले गुंडे सरेआम आतंक फैला रहे है सर जव देश बचने का जिम्बा हम पत्रकार को है तो चर्च नहीं एक जंग छेड़नी होगी हम सव आपके साथ है !
    शैलेन्द्र पराशर-खबर माला मेग्जियन प्रधान संपादक
    राजा नगायच –

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