: फरेब की बुनियाद पर खड़े चैनलों से कैसे कर पाते हैं लोकप्रियता की उम्मीद : ”19 में से 16 चैनल हुए बंद” शीर्षक से 25 अक्तूबर को भाड़ास4मीडिया पर प्रकाशित मेरे द्वारा लिखे गए लेख पर पाठकों की विशेषकर मीडियाकर्मियों की प्रतिक्रिया देख कर मैं वास्तव में हैरान रह गया। इलेक्ट्रानिक मीडिया में मेरी हज़ारों खबरें चलीं व प्रिंट मीडिया में भी मैं हजारों बार छपा।
किंतु कभी इतनी त्वरित प्रतिक्रिया कहीं नहीं मिली। इस लेख के छपने के बाद दो दिनों में मुझे 43 लोगों ने फोन से संपर्क किया और लेख पर अपनी मौखिक टिप्पणी दी तथा दर्जन भर से अधिक लोगों ने इस साईट पर ही अपनी टिप्पणी छोड़ी। परिणाम वेब मीडिया के उज्जवल भविष्य का संकेत देता है। पाठकों की टिप्पणी का सत्कार करते हुए व मार्गदर्शन के लिए आभार व्यक्त करते हुए मैं अपने सुधी पाठकों के लिए इस लेख में वह जानकारी भी जोड़ रहा हूं जो त्रुटिवश मुझसे छूट गई। मैं उन पाठकों का धन्यवादी हूं जिन्होंने मेरा ध्यान इन त्रुटियों की ओर दिलाया। वास्तव में इस लेख में कुछ ऐसे पहलुओं का जिक्र तक नहीं हो पाया था जिनका जिक्र वास्तव में इस लेख की प्रस्तावना में होना चाहिए था।
एक रोज़ एक तथाकथित चैनल मालिक, जिसने अपने लाडले बेटे के कंधों पर एक समाचार चैनल का भार सौंपा हुआ था, से मैंने पूछा कि साहब जब एक आदमी एक मामूली पान की दुकान खोलता है तो अपने बेटे को पान की दुकान पर बिठाने से पहले वह उसे कुछ दिन तो पान लगाना सिखाता ही है, सोचो यदि नवसिखिया कोई व्यक्ति पान बनाने लगे और उस पान में चूना ज्यादा लग जाए तो खाने वाले का क्या होगा? वह व्यक्ति तपाक से बोला- अरे खाने वाले का तो मुंह जल जाएगा। मैंने सहजता से अपनी बात आगे बढ़ाई, तो क्या आपको लगता है कि चैनल कोई ऐसा व्यक्ति चला पाएगा जिसे इस फील्ड की कोई जानकारी ही न हो, वह व्यक्ति निरूत्तर था। वास्तव में इलेक्ट्रानिक मीडिया का यह बड़ा दुर्भाग्य है कि इस पाक साफ माध्यम पर समाज में काले कारनामों को अंजाम देने के लिए कुख्यात असामाजिक तत्वों की कुदृष्टि पड़ी और यह पाकसाफ पावन कर्म बदनाम हो गया। पिछले आलेख की कमियों, त्रुटियों को समेटते हुए क्षेत्रीय चैनलों की सफलता को लेकर एक आलेख जल्द लिखूंगा जो इस पोर्टल पर प्रकाशित होगा।
लेखक गोपाल शर्मा पेन पत्रिका के संपादक हैं. कई चैनलों में मुख्य संपादक व निदेशक रह चुके हैं.












Gagan chawla
October 28, 2010 at 2:22 pm
गोपाल भाई आपने चैनलों की मानसिकता को बड़ी बारीकी से जाना है ऐसा आपके द्वारा लिखी गई समीक्षा से लगता है। दरअसल आज से आठ साल पहले इलेक्ट्राॅनिक मीडिया जब अपने ्याबाब पर था तब कुछ काले कारोबारियों की नज़र इस उभरते माध्यम पर पड़ी। अनेक तरह के अपराधों में संलिप्त इन बीमार मानसिकता के लोगों ने जब मीडिया जैसे पावन सेवा कार्य में कदम रखा तो धीरे-धीरे यह कार्य भी बदनाम हो गया। खैर यह लोग जितनी तेजी से मीडिया में आए थे उतनी ही तेजी से इनका सफाया भी हो रहा है। कुछ लोग अभी छटपटा रहे हैं, उनका भी सफाया वाहे गुरू सच्चे बाद्यााह एक दिन जरूर करेंगे। कंस और रावण रूपी इन ठगों का सफाया हर हाल में होगा। आप यकीन रखें। आपका लेख 19 में से 16 चैनल क्यों हुए बंद पढ़ा बेहद तथ्यपूर्ण एवं खोजात्मक लेख है। इसी भांति लिखते रहें ताकि हमें भी आपके अनुभव का कृपा प्रसाद मिलता रहे। कभी दिल्ली आना हो तो जरूर मिलें। धन्यवाद।
rajesh
October 28, 2010 at 5:45 pm
sir aapke lekhni padhkar achcha laga kya mai aapke sath or aapki patrika se jud sakta houn…
i m rajesh chourasia reporter news 24 khajuraho mp,
my mobil no.. 09424910001
SHAILENDRA PARASHAR
October 29, 2010 at 6:50 am
गोपाल जी
आप ने सही किया इन लोगो को इनकी हकियत दिखा कर ककी अज हम लोग सव मैं कमी खोजते ह लेकियन खुद हमे अपने समाज को गन्दा करने वालो को भी देखना होगा चाहिए ऐ लोग बस बिजनिस बना रखा है प्रेस को ?
शैलेन्द्र पराशर
छात्र माखनलाल चतुर्वेदी राष्टिया विशव. भोपाल
juuiyyu
October 29, 2010 at 6:20 pm
:);):D;D>:(
gopal sharma
October 29, 2010 at 6:40 pm
SHAILENDRA PARASHAR, rajesh, Gagan chawla ji आपकी टिप्पणी के लिए धन्यवाद। rajesh ji Aap mujh se 8054310441 par sampark kar sakte hain.
Gopal sharma
Ishwar C Upadhyay
November 5, 2010 at 8:19 pm
गोपाल जी नमस्कार
मेरा नाम इश्वर उपाध्याय है और मै वाराणसी में फोर आइस मीडिया नाम से संस्था चलता हु आपका लेख पढ़ा, और सचमुच ऐसा लगा की आपने ठीक वही बात कही है जो मै आज तक महसूस करता आया हु. दोहरे चरित्र वाली बड़ी मछलियों ने पूरे मीडिया महासागर को गन्दा कर के रख दिया है .
धन्यवाद्
आपका इश्वर उपाध्याय
वाराणसी