: ‘क्यों डरें कि आगे क्या होगा, कुछ ना हुआ तो तजुर्बा होगा’ : मौर्य टीवी के डायरेक्टर पद से मुकेश कुमार के इस्तीफे के एलान के चंद मिनटों के अंदर ही संस्थान के तेजतर्रार प्रोड्यूसर प्रभात पाण्डेय ने भी इस्तीफा दे दिया है। प्रभात ने एचआर के साथ-साथ मुकेश कुमार के नाम इस्तीफे की कॉपी मेल कर दी है।
प्रभात ने कहा कि वे अपने आंसू रोक नहीं पा रहे थे, इसलिए एक पल भी रुकना मुनासिब नहीं समझा। कई अखबार और टीवी चैनलों में काम कर चुके प्रभात पांडेय मौर्य टीवी में मुकेश कुमार के कार्यक्रम ‘राजनीति’ के प्रोड्यूसर हुआ करते थे। उनकी आवाज प्रोग्राम की जान मानी जाती थी। भविष्य के बारे में प्रभात ने इतना ही कहा- ‘क्यों डरें कि आगे क्या होगा, कुछ ना हुआ तो तजुर्बा होगा’।












राकेश कुमार
November 2, 2010 at 11:58 pm
न कर शुमार कि हर शै गिनी नहीं जाती, ये जिंदगी है हिसाबों से जी नहीं जाती…
प्रभात जी आपके इस कदम की सराहना और स्वागत करता हूं…ऎसा इसलिए नहीं मेरा उक्त संस्थान से कोई व्यक्तिगत मनमुटाव है…बल्कि इसलिए कि आपके इस बेखौफ कदम ने ये साबित कर दिया कि, जीना इसी का नाम है… कम खाकर गम खाने से बेहतर है कि गम को खाया लिया जाए…आपको इस कदम पर अहमद फराज की पंक्तियां याद आ गई… इस से पहले कि बेवफा हो जायें क्यों न ऐ दोस्त हम जुदा हो जायें, बंदगी हमने छोड़ दी फराज़, क्या करें लोग जब खुदा हो जाएं… मेरी शुभकामनाएं आपके साथ हैं…
anurag mishra
November 3, 2010 at 3:02 pm
तुम ऐसा क्यों करते हो यार, इसके पहले पंजाब केसरी में भी तुमने ऐसा ही किया था। कभी तुम पर गर्व होता है तो कभी तुम्हे लेकर डर भी लगने लगता है। लेकिन जैसा कि कॉलेज में सब कहते थे तुम वाकई ‘बाबा’ हो।
shalin pyush
November 3, 2010 at 5:33 pm
parabhat g well done .prakash g ki ankhen tab khulegi jab sabhi achhe log chale jaenge.abhi we chamche se ghire hai.
neeraj jha
November 4, 2010 at 1:59 am
chainal ke udghatan ke samay kiye gaye wayde , khai gai khasme aur prakash jha ki badi badi bateyn sab hawa hawai ho gai
brahmaveer singh
November 4, 2010 at 5:56 pm
mene mukesh ji ko kai noukari chhodte dekha hain..fir unhe ijjat ke saath noukari dene walon ko bhi…mene kai ese logon ko bhi dekha hain jinhone imaan bechkar noukari ki..paisa kamaya..magar jab noukr gayi to fir kisi ne bulaya nahee..
mujhe lagta hain ki ijaat ke saath jindgi jeena behtar hain..mukesh ji tarah..or bekhouf hona achhaa hain pravbhat ki tarah…me prabhat ko nahee janta par..tarif ke layak banda hain
CHANDAN SINGH
November 4, 2010 at 6:10 pm
Maura Tv ke lea kuchh achha to nahi hua……. kai deno se Maurya tv pe apnap sanap bakne wale Anchoro ka chehra dekhno ko milne laga to laga kuchh garbar hai …. Maurya tv ka ab Renking girne se koi nahi rok sakta……
saquibzeya
November 5, 2010 at 4:05 pm
prabhat bhai …kabhi kabhi insaan bhawuk ho jata hai….lekin yeh jeevan main to sab kuch chalta rahta hai…all the best for ur best future
Asit Nath Tiwari
November 7, 2010 at 2:25 am
प्रभात जी आपके इस फैसले से मैं हतप्रभ हूं, इसका मतलब मैं समझ नहीं सका। चलिए आपकी बेहतरी की दुआएं करेंगे।
असित नाथ तिवारी
aman soni
November 7, 2010 at 5:03 am
पांडेय जी वैसे भी मौर्य टीवी में टैलेंटेड लोगों की पूछ कभी नहीं थी। प्रकाश झा भले ही बेहतर इंसान हों लेकिन उनके आसपास साईकोफंट टाइप के लोग जुड़े हैं। खासतौर से उनके अनुज का कोई भी प्रयोग आज तक प्रकाश झा को सफलता नहीं दिला पाया। आपको शायद पता होगा कुछ दिन पहले मौर्य से दो चोरों को निकाला गया। यह वे चोर थे जिन्हें प्रभात झा दिलोजान से चाहते थे। मौर्य में इससे पहले कई कर्तब्यनिष्ठ और प्रतिबद्ध लोगों को बाहर का रास्त दिखाया गया। वैसे भी यहां पहले कोई और भी पांडे टैलेंटेड बनकर आया था। प्रभात टाइप के लोगों को बरदास्त नहीं हुआ। संतोष श्रीवास्तव,पुरूषोतम अनामिका और न जाने कितने लोग बाहर कर दिए गए। आपका कदम सचमुच परकाया प्रवेश वाला और मानवाता,इंसानियत और सच्चे पत्रकार वाला कदम है हम इसकी तहेदिल से सराहना करते हैं………………………….अमन सोनी
AMITESH
November 8, 2010 at 2:47 pm
न कर शुमार कि हर शै गिनी नहीं जाती, ये जिंदगी है हिसाबों से जी नहीं जाती…
प्रभात जी आपके इस कदम की सराहना और स्वागत करता हूं…ऎसा इसलिए नहीं मेरा उक्त संस्थान से कोई व्यक्तिगत मनमुटाव है…बल्कि इसलिए कि आपके इस बेखौफ कदम ने ये साबित कर दिया कि, जीना इसी का नाम है AMITESH SRIVASTVA LUCKNOW
मदन कुमार तिवारी
November 8, 2010 at 4:15 pm
वैसे तो मैं आलोचना करने से बचता हुं लेकिन ईलेक्ट्रोनिक मीडिया का जो चेहरा मैने देखा , खासकर कुकुरमुते की तरह उग आये नए राज्य स्तरीय चैनलों का, मन खिन्न हो गया । ५००-१०० रु० के लिये बिहार चुनाव में भीख की तरह पैसा मांगते हुये देखा है इनके स्थानीय रिपोर्टरो को । न्युज के नाम पर ब्लैकमेल करते हुये भी पाया है। मौर्या के गया स्थित रिपोर्टरों का हाल भी यही है। आज इस तरह के रिपोर्टर बिना पैसे के काम करने के लिये हर शहर में तैयार बैठे हैं। चैनलों के मालिकों को भी नही समझ में आता है कि बिना पैसे के जो काम करेगा उसका मकसद क्या होगा। http://www.madantiwary.blogspot.com