: भोपाल के मणिकांत सोनी ने संभाली भास्कर, नागपुर के संपादक पद की जिम्मेदारी : समाचार लिखने के प्राइम टाइम में अपने केबिन में बुलाकर रिपोर्टर्स और सब एडिटर्स के चेहरे की रंगत उड़ाने वाले वरिष्ठ पत्रकार प्रकार शंकर दुबे की बुधवार को चेहरे की रंगत उड़ी हुई थी. जैसे ही दैनिक भास्कर नागपुर के विशंभर भवन के कान्फ्रेंस सभागृह में बुधवार की शाम बैठक में प्रकाश दुबे ने यह घोषणा की कि अब नागपुर संस्करण के संपादक के रूप में मणिकांत सोनी सेवा देंगे, सभी के चहरे सन्न हो गये. दुबे के पाले के पत्रकारों को तो जैसे सांप सूंघ गया. दुबे पीड़ित पत्रकारों के मन में खुशी की लहरें हिड़ोले मारने लगी. करीब दस मिनट में यह समाचार चारों ओर सनसनी की तरह फैल गई.
सूत्रों का कहना है कि दैनिक भास्कर का नागपुर प्रबंधन दुबे को किनारा करना चाह रहा था. इसके लिए पिछले कुछ महीने से प्रबंधन किसी ने किसी तरह से दुबे की उपेक्षा कर रहा था, जिससे कि वे स्वयं संस्थान छोड़ कर चले जाएं. लेकिन दुबे ने प्रबंधन की हर उपेक्षा सह ली. हालांकि नागपुर भास्कर में किसी को निकालने की परंपरा नहीं रही है इसलिए प्रबंधन ने प्रकाश दुबे से ही बैठक में मणिकांत सोनी को नये संपादक होने की घोषणा कराई. मणिकांत सोनी इससे पहले भास्कर के ही भोपाल संस्करण में समाचार संपादक के रूप में कार्यरत थे. इस घोषणा के बाद भास्कर के प्रधान संपादक मनमोहन अग्रवाल ने उपस्थित भास्करकर्मियों से कहा कि वे इस बदलाव को नकारात्मक रूप में न लें. दुबेजी को दूसरी जिम्मेदारी दी जाएगी. अब दुबेजी भास्कर के महाराष्ट्र के दूसरे संस्करणों को देखेंगे, लेकिन नागपुर में पेज 1 से 20 तक की पूरी जिम्मेदारी नये संपादक मणिकांत सोनी पर होगी.
एक चर्चा यह भी है कि दुबेजी को ग्रुप एडिटर बनाया गया है लेकिन उन्हें उनके केबिन से जाने को कह दिया गया है और उसमें मणिकांत सोनी बैठेंगे. दुबेजी को उपर एक कमरे में बैठने को कहा गया है. प्रबंधन सूत्रों का कहना है कि वर्षों तक सेवा करने के कारण ही दुबे को सम्मान में उन्हें महाराष्ट्र के संस्कारणों के समूह संपादक के रूप में कार्य करने के लिए कहा गया है. वे संपादकीय मामलों में सलाह का काम करेंगे. लेकिन नागपुर के संपादकीय मामलों में हस्तक्षेप का अधिकार दुबे को नहीं होगा. फिलहाल उनके लिए नागपुर स्थिति विशंभर भवन के तीसरे माले पर एक केबिन की व्यवस्था की जा रही है. इस माले पर मार्केटिंग, सर्कुलेशन, स्टोर और इवेंट विभाग का परिसर है.
एक पत्रकार साथी द्वारा भेजे गए मेल पर आधारित












ravikant
November 19, 2010 at 5:50 am
अब आया ऊंट पहाड़ के नीचे।
दुबे को तो इतनी जलालत के बाद स्वयं इस्तीफा दे देना चाहिए।
अब दुबे के चमचों का क्या होगा।
मनमोहन अग्रवाल की जय हो
😉
dhanish sharma
November 19, 2010 at 7:26 am
kya baat kar raha ho.duba ji doob gaya kya.
prafulla nayak gwalior se
November 19, 2010 at 7:27 am
weldone mani bhai. badhai ho. keep it up.
rupesh gupta
November 19, 2010 at 7:41 am
manikant ji ko badhayee
atul saxena, gwalior
November 24, 2010 at 12:52 pm
bahut-bahut badhai manikant ji.
manoj dubey
November 30, 2010 at 11:20 am
bhaskar main kam karne wale ki kadar nahi hoti kam karne wale ko jaldi albida hona padta hai cahe woh koi bhi ho.
raj kishor
November 30, 2010 at 3:45 pm
BHASKAR KO PRKASH DUBEJI JAIESA VYKTI MINA MUSKIL HEI. LEKIN MANIKANTJI KI APNI KHUD KI QUALITY HEI, VEY AKHBAR KO NAGPUR ME EK PRABHVSHALI AKHBAR BANA KI CHAH RAKHTE HEI ESILIEA TO OOS DIN VISHAMBER BHAVANME SARE REPORTER KI MEETING BULAKAR OONSE SUJHAV MANGE ,. OON SAB KO KHULI CHUUT DI KI AGAR APNI APNI BEET BADLNA CHAAE YA SUJHAV DENE KI CHUTT DI,ES BAAT SE BHASKAR ME SABHI REPORTER KHUSH HEI, AAB BHASKAR EK NAYE YUG SHURUVAT MANIKANTJI KR RAHE HEI. HAAN ESME JAMI JAMI DUKANDARI WALO KO KUCH DIN TAKLIF HO SAKTEE HEI
manoj
February 15, 2011 at 9:49 pm
दुबे की रंगत उड़ी. जय हो