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क्‍या फ्रीलांसर गधा होता है!

मुझे ईटीवी बिहार-झारखंड के पटना ऑफिस के बारे में कुछ कहना है. मैं एक ग्रॉफिक डिज़ाइनर हूँ. मैंने ईटीवी हैदराबाद में 4 साल काम किया. 2008 में मैंने यह जॉब छोड़ दिया. 2 महीने पहले मैंने ईटीवी बिहार/झारखंड के पटना ऑफिस में फ्रीलांस के तौर पर ज्वाइन किया. यहाँ आने पर मुझे यहाँ की राजनीति से दो-चार होना पड़ा. एक तो यह ऑफिस फ्रीलांसर के भरोसे ही चल रहा है.  इनके पास रोज ग्रॉफिक्स का काम तो होता है पर यहाँ ग्रॉफिक डिज़ाइनर का पोस्ट नही है. यह इसलिए की उपर से आदेश नही है.

मुझे ईटीवी बिहार-झारखंड के पटना ऑफिस के बारे में कुछ कहना है. मैं एक ग्रॉफिक डिज़ाइनर हूँ. मैंने ईटीवी हैदराबाद में 4 साल काम किया. 2008 में मैंने यह जॉब छोड़ दिया. 2 महीने पहले मैंने ईटीवी बिहार/झारखंड के पटना ऑफिस में फ्रीलांस के तौर पर ज्वाइन किया. यहाँ आने पर मुझे यहाँ की राजनीति से दो-चार होना पड़ा. एक तो यह ऑफिस फ्रीलांसर के भरोसे ही चल रहा है.  इनके पास रोज ग्रॉफिक्स का काम तो होता है पर यहाँ ग्रॉफिक डिज़ाइनर का पोस्ट नही है. यह इसलिए की उपर से आदेश नही है.

यहाँ रिसेप्‍शनिस्‍ट की पोस्ट और ऑफिस ब्‍याय की पोस्ट है. जिनको क्या करना होता है सबको पता है. जिसको हैदराबाद से एप्रूव किया गया है. इस पर विडंबना यह है कि यहाँ ग्रॉफिक डिज़ाइनर के साथ चतुर्थ वर्गीय कर्मचारी की तरह व्यवहार किया जाता है. उसे पैसे तो फिक्स्ड मिलते हैं पर उनसे समय अनलिमिटेड माँगा जाता है. ऐसा नही करने पर उन्हे तरह-तरह से परेशान किया जाता है. जब मैने इस बारे में यहाँ के मैनेजर से बात की तो उन्होंने मुझसे यह कहा कि तुम्हें जितना समय देने को बोला जाए उतना समय देना ही होगा. चाहे तुम्हें रात भर रुकना पड़े. इसके बदले में तुम्हें कोई एक्स्‍ट्रा बेनेफिट नही दिया जायगा, वो चाहे पैसे हो या कंपंसेटरी ऑफ. इसके अलावा यहाँ के प्रोग्रामिंग के स्टाफ का व्यवहार तो बहुत ही खराब है.एक स्टाफ मिस्टर छविरंजन तो अपने आप को किसी गैंग का सरगना समझते हैं. जैसे एक अनुभवी आदमी को उनसे डरना ही होगा क्योंकि वो एक तथाकथित बड़े चैनल के प्रोग्रामिंग सेक्स्न के एंप्लाई हैं और वो आदमी एक फ्रीलांसर. उन्हें एक तो कोई टेक्निकल नालेज नही है. दूसरे उन्हें हर चीज़ इंस्टेंट चाहिए. जैसे ग्रॅफिक्स नहीं 2 मिनट नूडल्स चाहिए.

वस्तुस्थिति यह है कि मुझे ईटीवी हैदराबाद में 13000 रुपये सेलरी मिलती थी पर मुझे निजी कारण से वह जॉब मुझे छोड़नी पड़ी. यहाँ वो मुझे मात्र 10000 ही दे रहे थे. वो भी मुझे ज्‍वाइन करने के 2 महीने बाद तक नहीं मिले. मुझे पैसे जॉब छोड़ने के बाद ही मिले. इसके बावजूद भी पहले तो उन्होंने मुझे जॉब पर रखा क्योंकि चुनाव नज़दीक थे और उन्हें अर्जेंटली काम चाहिए था. लेकिन जैसे ही चुनाव के 5 चरण समाप्त हो गये, उन्होंने नया ग्रॉफिक डिज़ाइनर ढूँढना शुरू कर दिया. उनकी प्लानिंग तो यह थी कि वो सारे प्रोग्राम की पैकेजिंग मुझसे करवा लें और उसके बाद मुझे हटा कर किसी और ग्रॉफिक डिज़ाइनर को रख लें, जो सिर्फ़ मेरे बनाए पैकेजिंग पर कॉपी पेस्ट कर सके और 4000 – 5000 पर काम कर ले और वो भी उनके शर्तों पर. और पटना में ऐसे लोगों की कमी भी नहीं है, जो खुद ही यहाँ का मार्केट खराब कर रहे हैं.

अगर ऐसा ही था तो यहाँ ईटीवी के लोगों को अपनी प्राथमिकता तय करनी चाहिए और तब किसी को काम पर रखना चाहिए. अगर उन्हें फ्रीलांसर ही रखना है तो उन पर वो एंप्लाई से भी बदतर कायदा क्यों लागू करते हैं. अगर उन्हें 4000 – 5000 ही देने हैं तो किसी को 10000 पर क्यों रखते है. और फ्रीलांसर क्या गधा होता है, जिससे जैसे चाहे काम लिया जाए और जैसे चाहे डंडे बरसाए जाएँ. ये लोग फ्रीलांसर से काम तो लेते हैं पर उन्हें एक्सपीरियेन्स सर्टिफिकेट भी नहीं देते हैं. जब फ्रीलांसर उनका काम एंप्लाई की तरह करते हैं तो उन्हें सर्टिफिकेट देने में क्या तकलीफ़ है. और तो और ये लोग फ्रीलांसर से उनके इनकम पर कमीशन भी लेते हैं. TDS भी गलत काटा जाता है. इन्हीं सब कारण से त्रस्‍त हो कर मैंने यह काम 18 नवंबर को छोड़ दिया. मुझे मेरा 2 महीने का चेक मेरे जॉब छोड़ने के बाद ही दिया गया.

देवाशीष सिन्‍हा

ग्रॉफिक डिजाइनर

CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
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0 Comments

  1. sushil Gangwar

    November 25, 2010 at 7:03 am

    अभी मैंने भड़ास ४ मीडिया .कॉम पर देवाशीष सिन्‍हा की स्टोरी पढ़ी । क्‍या फ्रीलांसर गधा होता है! तो मुझे अपने बीते पल याद आने लगे । मुझे कुछ महीने पहले Bareilly के खंडेलवाल मैनेजमेंट कॉलेज से जॉब का ऑफर आया । जब खंडेलवाल मैनेजमेंट के मालिक से मिला तो बड़ा खुश हुआ, चलो अपने शहर में जॉब का जुगाड़ हो गया । मै भूल चुका था मेरा शहर कितना बदल चुका है । कॉलेज के मालिक ने गिरधर गोपाल ने बड़ी गर्म जोशी से मेरा स्वागत किया । साक्षात्कार के समय भूतपूर्व मंत्री संतोष गंगवार जी पूर्व सचिव डॉक्टर त्रिवेंदी दत्त जी थे । गिरधर गोपाल ने साक्षात्कार के समय बताया , आपको हम कॉलेज में सारी सुबिधाये देगे । मुझे खंडेलवाल कॉलेज में फिल्म विभाग सँभालने के लिए दिया गया । मैंने भी बड़े दिल से खंडेलवाल कॉलेज ज्वाइन कर लिया । जब मेरी जगह बैठने के लिए निश्चित की गयी तो मेरा दिमाग खटक गया । क्यों की मेरी बैठने की जगह कॉलेज के चौथी क्लास का काम करने वाले यादव जी के पास दी गयी । मै सोचा चलो नो प्रॉब्लम । भाई काम धाम शुरू किया गया । अगस्त के शुरूआती दौर में प्रवेश चल रहे थे । मै प्रवेश भी देख रहा था ।
    गिरधर गोपाल तो कॉलेज कम आते थे । मगर उनके भांजे रोज कॉलेज आते और कॉलेज पर नजर रखते थे । मुझे दो महीने में आभास हो गया कि ये लोग क्या चाहते है । मुझे उन लोगो ने फिल्म विभाग संभाने के लिए रखा है या सारे काम करवाने के लिए रखा है । मै थोडा सा परेशान होने लगा । अरे यार १० साल तक मीडिया में काम करने के बाद क्या ये लोग मुझसे इस तरीके का काम करवाना चाहते है ।
    मै सोचा चलो ,फिर से गिरधर गोपाल से मिला जाये । भांजे जी के बारे में बात की जाये । अब तक एक महीना निकल चुका था । मै अपनी पगार भी ले लू । जब मैंने खंडेलवाल कॉलेज के मालिक गिरधर गोपाल से बात की तो पूरा माजरा समझ गया । यह लोग अपनी बात पर कायम नहीं रहते है । रात को कुछ कहते है सुबह कुछ कहते है । भांजा तो भांजा मामा तो एक १० कदम आगे । जैसे तैसे करके मैंने अपनी पगार निकाली और तो जय राम जी कर दिया ।

    एडिटर
    सुशील गंगवार
    साक्षात्कार.कॉम

  2. kumar kalpit

    November 25, 2010 at 7:49 am

    devashich ji,aapne shoshan ke khilaf aavaj utha bahai, yah sab aapke sansthan, me hi nahi ho raha hai. sab jagh ka uahi hak hai.bat yah hai ki patakarita me napunshkon ko jamavara ho gaya.reerhin log jayada aa gaye hai.sabke sosan ke khilaf to aavaj uthayenge lekin apne malik ke khilaf bolti band ho jati hai.aap hi batayen malik ke pichle 10 salon me koi aandolan hova hai.ek bar aapko fhir badhei

  3. Nikku

    November 25, 2010 at 7:55 am

    janab mai bhi 5 years tak RRG Me tha.Media me kamobesh yehi haal hai

  4. sanjay

    November 25, 2010 at 1:08 pm

    aise logo ko to inki aukat batani chahiye,
    chhavi ji ka to pata nahi, par ETV Bihar, me ek se ek log moujood hai, jinhe kam to karana aata nahi hai, aur apne ko bis mar kha samajhte hai,

    salla tep dhone wale ko programming ka head bana dete hai.

    sabako hata dena chahiye.

    pata nahi Ramoji Rao kyo nahi in bato ko sunate aur koi kadam uthate hai.

    ye bat mane bhi suna hai ki freelancer se Etb Bihar, commition manga jata hai.

    kuch to kijiye Ramoji Rao. in sab bato se ETV ki image kharab ho rahi hai.

  5. Devashish

    November 25, 2010 at 3:01 pm

    यहाँ के मेनेजर साहब का तो ये भी कहना है कि यहाँ का सिस्टम जैसा चल रहा है वैसा ही चलेगा हम इसमें कोई बदलाव नहीं करेंगे

  6. EK Aur Shoshan ka Bhogi

    November 25, 2010 at 4:00 pm

    Devashish ji mubarak ho k aapne aawaz uthai varna is media line mein to koi aawaz hi nahi utha ta apne shoshan k khilaf…..media line k bhi koi union honi chaiye jisme employees k liye kaayde kanoon ban ne chaiye aur har kisi ko uske anussar facility milni chaiye…media wale doosro ko kanoon sikhate hai par mein puchta hun media ko kaun sikhayega…kam salary par logo ko rakha jata unki mazboori ka fayda uthaya jata hai…salary 2 mahino mein milti hai …koi leave nahi milti…channel walo ki puri taana shahi chalti rehti hai..AISA HI HAAL A2Z NEWS CHANNEL KA HAI
    logo ko do do mahino tak salary nahin milti…increment k naam par kuch bhi nahin aur4000- 5000 rupoo mein logo ka shoshan kar rahe hai…aur vo bhi time par nahin …salary bhi aise maangni padti hai jaise apni salary nahin inse koi KARZ maang liya ho….mere bhaiyo aawaz uthao WAKE UP HUME JAAGNA HOGA AUR EK JUT HOKAR AAWAZ UTHANI HOGI…….MEIN BHADAS 4 MEDIA SE KEHNA CHAUNGA KI WO BHI HUM JAISE SHOSHAN HONE WALE LOGO KA SAATH DE…AND PLZZZZZZZZZ PUBLISH THISSSSSS

  7. ex freelancer

    November 26, 2010 at 4:41 am

    देवाशीष भाई को साधुवाद
    शोषण के मुद्दे पे अपनी भड़ास निकलने के लिए. इटीवी अक्सर भड़ास पर छाया रहता हैं वजह साफ है कभी अपनी नीतिओं की वजह से तो कभी अपने अधिकारिओं की कुरीतिओं की वजह से. फ्रीलांसर की हालत इ टीवी मे गदहा से भी बदतर है , भाई ये संस्था इन्ही गधों की वजह से चल रहा है और अधिकारी अपना यस लूट रहे है .चूँकि यहाँ कोई हैदराबाद या जयपुर का अधिकारी नहीं बैठता इस वजह से यहाँ क्या चल रहा है उन्हें मालूम नहीं चल पाता और ये लोग अपने बचने के लिए फर्जी मेल और फोन कर उन्हें उल्लू बनाते रहते हैं. आपने छवि रंजन की बात की तो शायद आपको पता न को की ये जनाब भी कुछ महीने पूर्व यहाँ गदहा (frilancer) ही थे लेकिन आज प्रोग्रामिंग के सदस्य हैं इटीवी को तो कुआलिटी से दूर तक मतलब नहीं अगर होता तो इस गधे को प्रोग्रामिंग मे नहीं लेता. यहाँ जंगल राज चल रहा है. बेहद अजीबोगरीब इस्थिति है की यहाँ प्रोग्राम है पर प्रोडूसर नहीं और अभी जिस आदमी को इसकी जिम्मेदारी दी जाई है वह खुद गोबर का ढेर है, खुद उसे प्रोग्राम की समझ नहीं हो भी कहाँ से दिमाग तो कमीसन का हिसाब करने मे लगा रहता है,फ्रीलांसर की महनत की कमाई को अपना बाप का माल समझ कर लूट रहा है कोई बोलने वाला नहीं, सब मैनेजमेंट का दोष है इस प्रणब लाल( मेनेजर ) को अब बदलने का बल्कि यूँ कहें लात मार कर भागने का समय आ गया है यही जिम्मेदार है इस भ्रसटाचार का. देवासिश भाई अगर मेनेजर ही कहे की जैसा चल रहा है वैसा ही चलेगा हम कुछ नहीं बदलेंगे तो सवाल उठता है की ऐसा आदमी यहाँ कैसे है प्रबंधन को सोचना होगा नहीं तो ….

  8. aditya das

    November 26, 2010 at 8:11 am

    भाई साहब बिहार झारखंड ही नहीं यहाँ मध्यप्रदेश में भी इ टीवी में भी जमकर फ्री लंसरो का सोसन किया जा रहा है …आज कल यहाँ जूता चाटने वाले का बोल वाला है …पुराने स्ट्रिंगर को बिना बजहे निकला जा रहा है
    और जो काम कर रहे है उनको सैलरी के नाम पर भीख दी जा रही है
    अब ये समझ लो की …जल्दी ही इ टीवी का अंतिम समय आने वाला है क्योकि जब से इस चेनल को फ्रेंचचयेजी पर दे दिया गया है तब से नया मैनेजमेंट सिर्फ चेनल को डुबोने पर तुला हुआ है और चेनल से काम करने वालो को निकला जा रहा है और जूता चाटने वालो को रखा जा रहा है ….नए मैनेजमेंट ने जब चेनल को लिया था तो कहा था की २ साल में इसे नंबर एक चेनल बना देंगे पर दुनिया जानती है जितने भी रीजनल चेनल उन सब से इ टीवी काफी पीछे टी आर पी ..तो मिलती नहीं है इसिलए भोपाल वाले जी आर पी देख कर ही खुश हो जाते है ….

  9. Meenakshi

    November 26, 2010 at 9:31 am

    Hi,

    I am agree with Devashish. I also worked there and I know how much these
    people on are capable for their position.

    Thank God !
    I just came out of that hell.

  10. arnabi

    November 26, 2010 at 3:49 pm

    sahi kah rahe hain devashish bhai,,,,

    actually etv bihar/jharkhand channel ka maneger ki mansik sthithi theek nahin hai,,,,

  11. dhanish sharama

    November 28, 2010 at 1:56 am

    ha shayad hota hai.

  12. राजकुमार साहू, जांजगीर, छत्तीसगढ़

    November 28, 2010 at 9:56 am

    देवाशीष जी, मीडिया भी धंधा बन गया है और इस धंधे में धनपुरूषों की जमात ने अपना अधिकार स्थापित कर लिया है। ऐसा नहीं होता तो वे क्यों, इस तरह किसी से काम लेते। पत्रकार, किसी गधे से कम थोड़ी ना रह गए हैं, क्योंकि 24 घंटे काम करने के बाद उन्हें ये धनपुरूष देते क्या हैं, यह किसी से छुपा नहीं है।

  13. देवाशीष

    November 28, 2010 at 2:21 pm

    [b]सही कह रहे हैं राजकुमार जी कुकुरमुत्तों कि तरह उग आये इन तथाकथित मीडिया ग्रुप ने प्रोफशनल के शोषण को अपना जन्मसिद्ध अधिकार समझ लिया है. इसके खिलाफ हमें एकजुट होना ही होगा. [/b]

  14. sanjeev bihar

    December 3, 2010 at 2:49 pm

    etv hi ak chanel hi jo govt emply k tarah par month samay se pament daita hai wara aur channel ka kya hal hai kise se chupa nahi hai.is liye etv k barai me bolna ki pament nahi daita hai galat baat hai.

  15. देवाशीष

    December 4, 2010 at 3:04 pm

    [b]प्रिय संजीव जी मैं तो एम्प्लोयी के बारे में बात ही नहीं कर रहा. मैं तो फ्रीलांसर कि बात कर रहा हूँ. आपने शायद इटीवी मैं फ्रीलांसर के तौर पर काम नहीं किया इसलिए ऐसी बात कर रहे हैं. ये बात मैं अपने अनुभव के आधार पर कर रहा हूँ. ये कोई मनगढ़ंत बात नहीं है. मैंने भी जब तक एम्प्लोयी के तौर पर हैदराबाद में काम किया मुझे पैसे सही समय पर ही मिलते थे.[/b]

  16. mahandra singh rathore

    December 5, 2010 at 9:45 am

    SUSHIL GANGVAR JI AAP SHYAD APNE SHAHAR KE KARAN CHALE GAYE THA LAKIN BURE FANS GAYE PER JALDI HI NIKAL BHI AAYE. MEDIA MAI KAAM KARNE WALA COLLEGE MAI KYA KARTA PHIR WAHA TO AAPKI KADAR NAHI SAMJHI GAI. ACCHA HUA AAP JALDI CHET GAYE VARNA HUM LOG AAPKO YAHA KESSE PATE.

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