खिसियाई केंद्र सरकार का मीडिया पर गुस्सा उतारना जारी है। मुंबई पर आतंकी हमलों का सीधा प्रसारण करने और सरकार विरोधी जन भावना को आवाज देने वाले न्यूज चैनलों पर केंद्र सरकार अब शिकंजा कसने में लगी है। पहले इंडिया टीवी को आतंकियों से बातचीत के प्रसारण के लिए नोटिस भेजा, अब आज तक को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। यही नहीं, सरकार न्यूज चैनलों को लगातार पाठ पढ़ाने में भी लगी है कि उन्हें क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए। 5 दिसंबर को आज तक को भेजे गए कारण बताओ नोटिस के बारे में सूत्रों का कहना है कि मुंबई हमलों के दौरान इस न्यूज चैनल ने एक रिपोर्ट का प्रसारण किया, जिसे सरकार ने भ्रामक माना है। आज तक को नोटिस का जवाब देने के लिए कितना वक्त दिया गया है, यह पता नहीं चल पाया है।
उधर, इंडिया टीवी ने आतंकियों से बातचीत प्रसारित करने के मामले में अपना जवाब सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय को भेज दिया है। सूत्रों के मुताबिक इंडिया टीवी के मामले में सुनवाई की प्रक्रिया जारी है।
केंद्र सरकार ने 4 दिसंबर को सभी न्यूज चैनलों के लिए एक सलाह सूची जारी कर उनसे इसी आधार पर काम करने की अपेक्षा की है। इस सलाह सूची के जरिए सरकार ने न्यूज चैनलों को सलाह दी है कि वे ऐसी सीक्रेट बातों का खुलासा करने से बाज आएं जिससे देश का नुकसान हो सकता हो। सरकार ने न्यूज चैनलों से आतंकी हमलों के फुटेज बार-बार न दिखाने की भी अपील की है ताकि असामान्य हुए जन जीवन के सामान्य होने में बाधा न पड़े। केंद्र सरकार ने कहा है कि देश को नुकसान पहुंचाने वाले कवरेज को देश हित के खिलाफ माना जाएगा और नियमानुसार उचित कार्रवाई की जाएगी।
उधर, समाचार चैनलों के संगठन न्यूज ब्राडकास्टिंग एसोसिएशन (एनबीए) ने सरकार द्वारा जारी सलाह सूची पर मंत्रणा शुरू कर दी है। सूत्रों का कहना है कि न्यूज चैनलों के संपादकों ने इस तरह की सलाह सूची को सरकार द्वारा मीडिया पर शिकंजा कसने के रूप में लिया है। संपादकों का कहना है कि वे देश हित में जहां जरूरी होता है, सरकारी एजेंसियों के अनुरोध करने पर, तुरंत जरूरी कार्यवाही करते हैं। पर इस तरह की सलाह सूची के आधार पर काम कर पाना मुश्किल होगा। उल्लेखनीय है कि पिछले दिनों सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने आतंकी हमलों के दौरान पुलिस आपरेशन में मीडिया द्वारा रुकावट डाले जाने की शिकायतों पर मीडिया मालिकों को तलब किया था।












