यही शेष था जिसे कांग्रेसी मनमोहिनी सरकार पूरा करने जा रही है. भ्रष्टाचार पर अंकुश लगा पाने में असफल यह भ्रष्ट सरकार अब दलाली को मान्यता देगी. आप चाहें तो अभी से दलाली की डिग्री देने वाले स्कूल खोल सकते हैं. हालांकि खोलने की जरूरत क्या है, पहले से ही ये कुछ सभ्य नामों से खुले हुए हैं. एमबीए की पढ़ाई से कोई देश भक्त या जनता से सरोकार रखने वाले नवयुवक नहीं निकलते बल्कि ये लुटेरी कंपनियों के लुटेरे मैनेजर बन जाते हैं और कंपनी को फायदा दिलाने के लिए हर हथियार आजमाते हैं जिसमें दलाली भी शामिल है. नीरा राडिया टेपों पर बवाल के बाद केंद्र सरकार दलाली को कानूनी जामा पहनाने की तैयारी कर रही है.
यह खबर समाचार एजेंसियों ने रिलीज की है. खुद कंपनी मामलों के मंत्री सलमान खुर्शीद ने बुधवार को कहा कि उनका मंत्रालय कॉरपोरेट लॉबिंग को नियंत्रित करने के लिए अन्य मंत्रालयों के साथ बातचीत करेगा. धन्य है यह सरकार और धन्य हैं इसके मंत्री. आगे सुनिए. खुर्शीद ने दिल्ली में संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि फिलहाल इस बारे में कोई कानून नहीं है. इस संबंध में कोई मसौदा भी संसद के समक्ष विचाराधीन नहीं है. लेकिन, हम इसे नियंत्रित करने के लिए कोई अन्य रास्ता निकाल सकते हैं. ये बातें खुर्शीद ने तब कहीं जब उनसे पूछा गया कि क्या सरकार कॉरपोरेट लॉबिंग पर पाबंदी लगाने या इसे नियंत्रित करने के लिए कोई कदम उठाने जा रही है?
कॉरपोरेट लॉबिस्ट उर्फ सुपर दलाल राडिया के टेपों के बारे में पूछे जाने पर मंत्री ने कहा- कोई कदम उठाने से पहले मैं सभी मंत्रियों से बातचीत करूंगा. सलमान खुर्शीद का कहना है कि लॉबिंग और पब्लिक रिलेशन तो हमेशा से ही लोकतांत्रिक ढांचे का अंग रहे हैं. हालांकि इनके दुरुपयोग पर नजर रखने की जरूरत है. खुर्शीद ने यह बात ‘इंडिया कॉरपोरेट वीक’ में कही. उनकी यह टिप्पणी नीरा राडिया के फोन टैपिंग से उजागर 2 जी-स्पेक्ट्रम घोटाले से बचे बवाल के संदर्भ में थी.
इस अवसर पर लॉ फर्म टाइटस एंड कंपनी के दलजीत टाइटस ने कहा, ‘अमेरिका में लॉबिंग वैध कारोबार है. हां, भारत में इसे संवैधानिक या गैर संवैधानिक दोनों ही रूपों में मान्यता नहीं मिली है. हालांकि लॉबिंग का सीधा अर्थ है सरकार के फैसलों को प्रभावित करना. इसकी प्रक्रिया भ्रष्टाचार विरोधी कानून के दायरे में भी आ सकती है. यह ब्यूरोक्रेट्स की सर्विस रूल बुक के खिलाफ भी जा सकती है.’ भसीन एंड कंपनी के मैनेजिंग पार्टनर ललित भसीन ने कहा कि लॉबिंग का इस्तेमाल कॉरपोरेट मामलों से लेकर जजों की नियुक्ति तक में होता है. भारत में यह जनसंपर्क के रूप में विकसित हो रहा है. एचडीएफसी के चेयरमैन दीपक पारिख पहले ही कह चुके हैं कि ‘निजी बातचीत’ लीक होने से उद्योग जगत के मनोबल को झटका लगा है.











