पंजाब राज्य सूचना आयुक्त के सेक्टर-17 मुख्यालय के बाहर आरटीआई एक्टिविस्ट फेडरेशन, पंजाब ने धरना दिया और जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों का नेतृत्व राज्य अध्यक्ष एचसी अरोड़ा और सचिव अनिल वशिष्ठ ने किया। पंजाब भर से फेडरेशन के ज्यादातर पदाधिकारी और सदस्यों ने हिस्सा लिया। सैकड़ों लोगों ने हाथों में सूचना अधिकार को सही ढंग से लागू करने और पंजाब राज्य सूचना आयोग को अपने कामकाज में सुधार करने बाबत बैनर और तख्तियां उठा रखी थीं। कार्यकर्ताओं में इस बात को लेकर आक्रोश था कि आयोग में आरटीआई कार्यकर्ताओं के साथ ठीक व्यवहार नहीं किया जाता।
कार्यकर्ताओं ने शांतिपूर्वक प्रदर्शन कर अपनी मांगें दोहराई। एचसी अरोड़ा ने आरोप लगाया कि पंजाब राज्य सूचना आयुक्त आरआई सिंह सरकारी अधिकारी के तौर पर काम कर रहे हैं, जबकि सूचना आयुक्त को ऐसा करना शोभा नहीं देता। उन्होंने कहा कि समय पर सूचना न देनेवाले अधिकारियों पर किसी तरह की कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाती। ऐसे बहुत से मामले हैं जिनमें कार्रवाई की जानी चाहिए थी, लेकिन मौजूदा आयुक्त ऐसा नहीं करते। उन्होंने कहा कि 16 नंबर को कुछ मांगों का ज्ञापन दिया गया है, अगर उस पर जल्द ही कोई कार्रवाई नहीं हुई तो भविष्य में नई रणनीति के तहत इससे भी जोरदार आंदोलन चलाया जाएगा।
उन्होंने कहा कि पंजाब राज्य सूचना आयोग की कार्यप्रणाली इतनी लचर है कि इसका कोई मकसद ही नहीं रह गया है। उन्होंने कहा कि इसमें आमूलचूल बदलाव की जरूरत है। उन्होंने पूर्व के सूचना आयुक्तों पर कई गंभीर आरोप भी लगाए। उन्होंने कहा कि राज्य सूचना आयुक्त सेवानिवृत्त आईएएस या पुलिस अधिकारी को बनाने की बजाय मानवाधिकारों या आरटीआई से जुड़े लोगों में से बनाया जाना चाहिए। ऐसे लोग सूचना के अधिकार का महत्व समझते हैं और इसका बेहतर संचालन कर सकते हैं।
धरने के दौरान एक सर्वसम्मत प्रस्ताव पास किया गया, जिसके मुताबिक पंजाब राज्य सूचना आयोग के सौ से ज्यादा फैसलों पर आधारित एक पुस्तक निकाली जाएगी। इसे उपायुक्त के माध्यम से राज्यपाल को भेजी जाएगी। अरोड़ा ने बताया कि जनवरी के पहले सप्ताह में यह पुस्तक तैयार हो जाएगी, जिसे देश के सभी सूचना आयुक्तों के अलावा उच्च न्यायालय के न्यायधीशों को भेजी जाएगी, ताकि वे जान सकें कि पंजाब राज्य सूचना आयोग क्या कर रहा है और उसे क्या करना चाहिए था।











