डा. बिनायक सेन को कोर्ट द्वारा देशद्रोही करार दिए जाने के खिलाफ देश भर में प्रदर्शन हो रहे हैं. बनारस में भी बुद्धिजीवियों ने डा. सेन के पक्ष में मौन जुलूस निकाला तथा सभा की. इस जुलूस में लेखक, पत्रकार, कहानीकार, कवि, साहित्यकार सभी शामिल हुए. सबने डा. सेन की सजा को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के खिलाफ मानते हुए उनकी रिहाई की मांग की.
काशी के बुद्धिजीवी लंका स्थित बीएचयू के सिंहद्वार के पास एकत्रित हुए. इसके बाद इन लोगों ने मौन जुलूस निकाला. सभी के हाथ में डा. सेन के पक्ष में लिखी तख्तियां थीं. जुलूस लंका, अस्सी, सोनारपुर, मदनपुरा, गोदौलिया होता हुआ गंगा के किनारे राजेंद्र घाट पहुंचा. यहां एक सभा आयोजित की गई. जिसमें वक्ताओं ने छत्तीसगढ़ सरकार और पुलिस की तीव्र निंदा करते हुए कहा कि डा. सेन पर फर्जी मुकदमा लादा गया है. डा. सेन को देशद्रोही घोषित करवाने में पूरा राज्य तंत्र लग गया था. गलत तरीके से उन पर देशद्रोह का मुकदमा लादा गया है.
उन लोगों ने कहा कि डा. सेन की सजा अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर भी हमला है. अब समझ में नहीं आ रहा कि इस देश में मानव अधिकारियों के लिए संघर्ष करने वालों के लिए जगह बची है या नहीं! वक्ताओं ने कहा कि डा. सेन एक चिकित्सक थे और लोगों की सेवा कर रहे थे. अगर वे चाहते तो आसानी से एक बेहतर जीवन गुजार सकते थे, परंतु उन्होंने आदिवासियों की सेवा को अपना जीवन बना लिया. ऐसे व्यक्ति को छत्तीसगढ़ पुलिस ने देशद्रोही बना दिया. कोर्ट में झूठे गवाह पेश किए गए, जिससे कोर्ट को देशद्रोह का फैसला सुनाने को मजबूर होना पड़ा. पूरा तंत्र डा. सेन को सजा दिलाने के लिए एक साथ खड़ा हो गया था. सभा की अध्यक्षता प्रो. दीपक मलिक तथा संचालन प्रशांत शुक्ल ने किया.
मौन जुलूस तथा सभा में शामिल होने वालों में डा. काशीनाथ सिंह, डा. रामाज्ञा राय, डा. अवधेश प्रधान, प्रकाश शुक्ल, डा. बलराज पांडेय, चितरंजन सिंह, हर्षवर्धन राय, सदानंद शाही, जयनारायण मिश्र, कुसुम लता वर्मा, डा. रीना, मुकुंद द्विवेदी, मनीष शर्मा सहित कई लोग शामिल रहे.












madhukar
January 3, 2011 at 9:16 am
सही कहा गुरु. ये जो नाम बी एच यूं के अध्यापक जनों के नाम दिख रहे हैं , दरअसल ये सब नपुंसक हैं. यदि ऐसा नहीं है तो इन्ही के वि वि में कुलपति ने अधेर गर्दी मचा राखी है और इनके मुख से आवाज नहीं निकालती है.अभी हाल में ही लैब्रेर्य्य में हुई अवैध नियुक्टियों के खिलाफ इनकी आवाज तक नहीं सुनाई नहीं दी और ये अधिकार की बात करते हैं. कहाँ गयी इनकी कलम की ताकत और अभिव्यक्ति की स्वंत्रता . खुलेआम जातिवाद पर चलने वाले डी पी सिंह के खिलाफ कुछ तो लिखते . राजेश सिंह पी पी सेल के चेयरमन का है स्कूल और इंटर का डिग्री ही नहीं है पर नौकरी कर रहा है. है हिम्मत तो लिखो तब जाने की अधिकार की लड़ाई लड़ रहे हो.
इलिना सेन की हकीकत जानो. मुफ्त एक लाख का वेतन उठा रही और रहती है रायपुर में. साक्षात्कार में बिना उपस्थित हुए अभ्यर्थी को अंक देती है और न्याय की बात करती है. शोभा नहीं देता . राम राम
umesh kumar
January 1, 2011 at 5:33 pm
छत्तीसगढ के एक अखबार ने आज १ जनवरी को लिखा है की कल रायपुर मे विनायक सेन के समर्थन मे जुटाई गई मे भीड मे उनके समर्थक नही बल्कि दैनिक मजदूर थे जिनको मजदूरी देकर बुलाया गया था। उन मजदूरो को यह भी पता नही था की भीड किस लिए जुटाईए गई है