सीमा आजाद का सवाल उठाएंगे विनायक सेन

मानवाधिकार संगठन पीयूसीएल अब विनायक सेन की तरह ही माओवादी साहित्य रखने के साथ राजद्रोह के आरोप में इलाहाबाद जेल में बंद पत्रकार सीमा आजाद का सवाल उठाने जा रहा है। पीयूसीएल इस मामले में उत्तर प्रदेश में जन दबाव बनाने के लिए विनायक सेन को आमंत्रित करने जा रहा है। विनायक सेन इस अभियान में शामिल भी होंगे। विनायक सेन ने फोन पर कहा – सीमा आजाद पीयूसीएल में हमारी सहयोगी रही है और मैं इस सवाल पर लखनऊ की संगोष्ठी में जरूर आउंगा।

डॉ. बिनायक सेन को नहीं मिली जमानत

बिलासपुर। देशद्रोह और नक्सलियों के साथ साठगांठ आरोप में आजीवन कारावास के सजायाफ्ता बिनायक सेन की जमानत अर्जी छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने गुरुवार को खारिज कर दी। सेन मानवाधिकार संगठन पीपुल्स यूनियन ऑफ सिविल लिबर्टीज (पीयूसीएल) के उपाध्यक्ष हैं। न्यायमूर्ति टीपी शर्मा और न्यायमूर्ति आरएल झांवर की खंडपीठ ने बिनायक सेन के साथ-साथ कोलकाता के व्यवसाई पीयूष गुहा की जमानत याचिका भी खारिज कर दी। गुहा को भी आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है।

बिनायक सेन के पक्ष में : एक अदभुत कोलाज

: पेंटिंग की तस्वीर, व्याख्यान का आडियो और वीडियो में कविताई : एक दुर्लभ आयोजन. संघर्ष, साहस, सच्चाई और सपने देखते रहने के समकालीन प्रतीक बन चुके बिनायक सेन को लेकर यहां एक कोलाज पेश है. तीन अलग-अलग माध्यम हैं. और तीन अलग तरह की कलाएं हैं. एक पेंटिंग, जो पिक्चर फार्मेट में है. एक व्याख्यान जो आडियो फार्मेट में है. और एक कविता जो वीडियो फार्मेट में है. तीनों के केंद्र में हैं बिनायक सेन.

पत्रकारों के सवालों से बौखलाए डीजीपी विश्वरंजन

बीते साल नक्सलियों ने छत्तीसगढ़ पुलिस को करारा झटका दिया है. नए साल पर पत्रकारों से पुलिस महानिदेशक की मुलाकात में इसका असर साफ दिखा. नक्सली मोर्चे पर असफल छत्तीसगढ़ पुलिस के कप्तान विश्वरंजन पत्रकारों के सवालों के जवाब देते-देते बौखला गए. उन्होंने सभी आंकड़ों को किनारे करते हुए कहा कि 2010 में नक्सली मोर्चे पर सुरक्षा बल को काफी कम नुकसान हुआ है, नक्सलियों को धकेला गया है, छत्तीसगढ़ पुलिस सजग, सतर्क और समर्थ है.

डा. सेन के लिए सड़क पर उतरे साहित्‍यकार और पत्रकार

डा. बिनायक सेन को कोर्ट द्वारा देशद्रोही करार दिए जाने के खिलाफ देश भर में प्रदर्शन हो रहे हैं. बनारस में भी बुद्धिजीवियों ने डा. सेन के पक्ष में मौन जुलूस निकाला तथा सभा की. इस जुलूस में लेखक, पत्रकार, कहानीकार, कवि, साहित्‍यकार सभी शामिल हुए. सबने डा. सेन की सजा को अभिव्‍यक्ति की स्‍वतंत्रता के खिलाफ मानते हुए उनकी रिहाई की मांग की.

बिनायक के पक्ष में गवाही देने वालों में ज्यादातर पत्रकार

अमिताभ डॉ. बिनायक सेन से जुड़ा निर्णय पूरे देश में चर्चा में है और कई लोग कई प्रकार से इस पर अपनी टिप्पणी कर रहे हैं. मैं यहाँ इस प्रकरण से जुड़ा एक खास मुद्दा यहाँ उपस्थित करना चाहता हूँ जो सीधे-सीधे पत्रकारों से जुड़ा है. जहां डॉ. सेन के विरुद्ध 97 गवाह गुजरे वहीं उनके पक्ष में ग्यारह गवाह उपस्थित हुए. पत्रकारों के लिए यह गर्व और संतोष का विषय हो सकता है कि इन गवाहों में ज्यादातर पत्रकार थे.

बिनायक सेन की रिहाई के लिए धरना-प्रदर्शन

आजमगढ़ पीयूसीएल के राष्‍ट्रीय उपाध्यक्ष डा. बिनायक सेन पर देशद्रोह का आरोप और आजीवन कारावास का विरोध करते हुए सामाजिक व मानवाधिकार संगठनों ने आजमगढ़ में अम्बेडकर प्रतिमा के सामने धरना दिया। विरोध प्रदर्शन के दौरान लोगों ने नारे लिखी तख्तियां लीं थी और नारे लगा रहे थे कि कारपोरेट पूंजी का खेल, देश भक्त डाक्टर को जेल- नहीं चलेगा, डा. बिनायक सेन की अनयायपूर्ण सजा को रद्द करो, यूएपीए और छत्तीसगढ़ जन सुरक्षा अधिनियम को रद्द करो, जल-जंगल-जमीन की लूट बंद करो, लोकतांत्रिक आंदोलनों का दमन नहीं सहेंगे।

What does Court say in Dr Binayak Sen’s case

बिनायकWe have been listening and reading about Dr Sen’s court decision since the day it has been pronounced. But since the original decision is in Hindi and is 92 pages long, hence many would be possibly have got the opportunity to read and understand it. I hope, u appreciate the fact that the judgement can be fully appreciated only when one has gone through it in its totality.

विनायक सेन के लिए पोस्टकार्ड अभियान

: बनारस में हुई बैठक में लिया गया फैसला : मानवाधिकार नेता विनायक सेन को उम्र कैद की सजा के खिलाफ आपत्ति दर्ज कराने के लिए वाराणसी के बुद्धिजीवियों, सामाजिक और छात्र-युवा संगठनों ने एक बैठक की। जिला मुख्यालय पर हुई इस बैठक में कोर्ट के फैसले का पुरजोर कर विरोध किया गया।

आदमखोर तंत्र के अगले शिकार आप होंगे

: बहरे वक्त मे बिनायक सेन होना : सच एक भयावह शब्द होता है। एक मुश्किल वक्त मे सच की मशाल थामने वालों को यंत्रणाओं के दौर से गुजरना पड़ता है। निरंकुश ताकतों के खिलाफ़ आवाज उठाने की भारी कीमत चुकानी पड़ सकती है।

बिनायक सेन पर देशद्रोह, लोकतंत्र की अवमानना

: न्यायपालिका ध्वस्त कर रही है लोकतांत्रिक ढांचा : पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज (PUCL) के राष्‍ट्रीय उपाध्यक्ष बिनायक सेन पर राजद्रोह का आरोप लगाकर न्यायपालिका ने अपने गैर-लोकतांत्रिक और फासीवादी चेहरे को एक बार फिर उजागर किया है। जर्नलिस्ट यूनियन फॉर सिविल सोसाइटी मानती है कि बिनायक सेन प्रकरण के इस फैसले ने अन्ततः लोकतांत्रिक ढांचे को ध्वस्त करने का काम किया है। यह न्यायपालिक की सांस्थानिक जनविरोधी तानशाही है, जिसका हम विरोध करते हैं।