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भास्‍कर के मालिक रमेश चंद्र अग्रवाल भगोड़ा!

जिला कोर्ट रोहतक ने दैनिक भास्‍कर के मालिक रमेश चंद्र अग्रवाल को भगोड़ा घोषित करने की कार्रवाई शुरू की है. रमेश चंद्र अग्रवाल के भोपाल स्थित घर पर इसके लिए एक नोटिस चस्‍पा किया गया है. एक नोटिस भोपाल के महाराणा प्रताप चौक पर भी चस्‍पा किया गया है. यह कार्रवाई कोर्ट ने सैनी एजुकेशन सोसायटी के प्रधान विजय सैनी की कथित मानहानि के मामले में सुनवाई करते हुए की.

जिला कोर्ट रोहतक ने दैनिक भास्‍कर के मालिक रमेश चंद्र अग्रवाल को भगोड़ा घोषित करने की कार्रवाई शुरू की है. रमेश चंद्र अग्रवाल के भोपाल स्थित घर पर इसके लिए एक नोटिस चस्‍पा किया गया है. एक नोटिस भोपाल के महाराणा प्रताप चौक पर भी चस्‍पा किया गया है. यह कार्रवाई कोर्ट ने सैनी एजुकेशन सोसायटी के प्रधान विजय सैनी की कथित मानहानि के मामले में सुनवाई करते हुए की.

इस संबंध में विजय सै‍नी के अधिवक्‍ता ने बताया कि दैनिक भास्‍कर ने 24 दिसम्‍बर 2007 को पंजाब एवं हाई कोर्ट के आदेश को आधार बनाकर सैनी एजुकेशन सोसायटी के प्रधान विजय सैनी के खिलाफ एक झूठी खबर प्रकाशित कर दी थी कि हाई कोर्ट आठ सप्‍ताह के भीतर अथवा 20 फरवरी  2008 तक सैनी एजुकेशन सोसायटी के चुनाव सम्‍पन्‍न करवाने के आदेश जारी किए हैं. जबकि वास्‍तव में हाई कोर्ट ने ऐसा कोई भी आदेश जारी नहीं किया था. इस गलत खबर पर विजय सैनी से स्‍थानीय संवाददाता से संपर्क किया तथा ऐसा कोई भी आदेश जारी ना होने की बात बताकर इस गलत खबर का खंडन छापने का आग्रह किया. परन्‍तु संवाददाता ने ऐसा करने से इनकार कर दिया, जिसके बाद उन्‍होंने कोर्ट की शरण ली. उन्‍होंने अखबार मालिक, स्‍थानीय संपादक और संवाददाता के खिलाफ एक आपराधिक शिकायत कोर्ट में दर्ज कराई.

उन्‍होंने बताया कि कोर्ट ने विजय सैनी द्वारा प्रस्‍तुत किए गए दस्‍तावेजों तथा गवाहों के बयान सुनने के बाद भास्‍कर के मालिक रमेश चंद्र अग्रवाल, तत्‍कालीन कार्यकारी संपादक दिनेश मिश्रा और खबर छापने वाले संवाददाता को कोर्ट में उपस्थित होकर अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया था. कई तारीखों पर उपस्थित न होने पर जुडिशियल मजिस्‍ट्रेट की अदालत ने भारतीय दंड संहिता की धारा 500, 501 तथा 502 के तहत सम्‍मन जारी कर अदालत में तलब किया था.

कोर्ट ने कहा था कि शिकायतकर्ता द्वारा पेश किए गए सबूत याचिका की दलीलों का समर्थन करते हैं लिहाजा मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपियों को तलब करना जरूरी एवं न्‍यायसंगत है. भास्‍कर का संवाददाता तो सुनवाई के दौरान नियमित उपस्थित होता रहा लेकिन मालिक और संपादक एक बार भी उपस्थित नहीं हुए. जिसके बाद जिला कोर्ट ने मालिक को भगोड़ा घोषित करने की कार्रवाई शुरू कर दी है.

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0 Comments

  1. ravi tiwari

    May 2, 2011 at 6:11 am

    agar asa hai to ramesh chandra agrawal apni jimedari se bhag rahe hai ya cort men jane se darte hai ya apni uchi pahuch ken karan asa kar rahe hai………………ram hi jane.

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