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सहारा के झटका से उबरने के लिए जागरण ने शुरू की स्‍कीम

वाराणसी। सहारा के वाराणसी पदार्पण के साथ ही बाकी तीन अखबारों जागरण, अमर उजाला और हिंदुस्तान के पांव के नीचे से मिट्टी खिसक गयी है। ऐसा माना जा रहा है जागरण का चार हजार, अमर उजाला का पांच और हिंदुस्तान का चार हजार अखबार मार्केट में कम हुआ है। इस तरह इन तीनों अखबारों का 13 हजार अखबार काटकर और स्वयं का दो-तीन हजार जोड़कर सहारा कोई 15-16 हजार अखबार मार्केट में बेचने का दावा कर रहा है।

वाराणसी। सहारा के वाराणसी पदार्पण के साथ ही बाकी तीन अखबारों जागरण, अमर उजाला और हिंदुस्तान के पांव के नीचे से मिट्टी खिसक गयी है। ऐसा माना जा रहा है जागरण का चार हजार, अमर उजाला का पांच और हिंदुस्तान का चार हजार अखबार मार्केट में कम हुआ है। इस तरह इन तीनों अखबारों का 13 हजार अखबार काटकर और स्वयं का दो-तीन हजार जोड़कर सहारा कोई 15-16 हजार अखबार मार्केट में बेचने का दावा कर रहा है।

सहारा के प्रसार प्रबंधक तेज बहादुर सिंह का कहना है कि सहारा ने बनारस के मार्केट को अच्छा डेंट किया है। इसने स्थापित ब्रांडों में खलबली मचा रखी है। इस वजह से जागरण ने फौरन ही एक स्कीम लांच कर दी है। जागरण पेज दो पर एक फुल पेज होम विज्ञापन आया है। शीर्षक है ‘जो आएगा वह पाएगा।’ स्कीम में होंडा एक्टिवा, सोने का सिक्का सहित अन्यान्य इनाम हैं। विज्ञापन में छापा गया है निश्चित उपहार। यह स्कीम 90 दिन तक चलेगी।

हिंदुस्तान में रद्दी का फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद अब इस अखबार ने नीति बदली है। अब वह दस अखबार पर एक अखबार फ्री दे रहा है। पहले तो किसी को एक भी नहीं और किसी किसी को 100 पर 50 अखबार फ्री देने के नाम पर अखबार गोदामों में डंप करवा रहा था और रद्दी बेचकर इसके कुछ लोग मालामाल होने को आतुर थे। पर, इसका खुलासा हो जाने के बाद और मार्केट में भद पिटने के बाद उसने पैंतरा बदला है।

स्कीम अमर उजाला ने भी चला रखी है। इन अखबारों का डरना अस्वाभाविक नहीं है। हर रोज चार-पांच हजार का पीओ कम होने का मतलब है आईआरएस में नीचे जाना। हर रोज चार हजार कम होने का मतलब है एक माह के पीओ में एक लाख बीस हजार अखबार कम होना। अखबारी लाइन में इतनी कमी बेहद अहम मानी जाती है और हर अखबार मंथली पीओ गिरने को बेहद गंभीरता से लेता है। देखना है-स्कीम के दम पर ये अखबार अपने गिरते प्रसार को कब तक रोक रखने में कामयाब होते हैं।

बनारस से अजय कृष्‍ण त्रिपाठी की रिपोर्ट.

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0 Comments

  1. rajesh chandra mishra

    January 31, 2011 at 1:39 pm

    go ahead sahara.

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