हिंदुस्‍तान : यूपी में कमाल की बढ़त या रद्दियों की बढ़त‍

[caption id="attachment_20233" align="alignleft" width="85"]अजय कृष्‍ण त्रिपाठी अजय कृष्‍ण[/caption]वाराणसी : 2011 की पहली तिमाही के इंडियन रीडरशिप सर्वे (आईआरएस) के ताजे नतीजों के मुताबिक हिन्दुस्तान ने दैनिक भास्‍कर पर अपनी बढ़त और बढ़ा ली है और प्रमुख अखबारों में नम्बर दो की अपनी स्थिति और मजबूत कर ली है पिछले दौर की आईआरएस गणना (2010 की चौथी तिमाही) के बाद से हिन्दुस्तान ने 14 लाख और पाठक जोड़े है।

कटने लगा अमर उजाला के वरिष्‍ठ पत्रकारों का पीएफ

अजयवाराणसी अमर उजाला से खबर आ रही है कि यहां के सीनियर रिपोर्टर/वरिष्ठ उप संपादकों सहित इनके ऊपर के सभी कर्मचारियों का पीएफ कटने लगा है। सुना जा रहा है कि दिसंबर 2010 से पीएफ की यह सुविधा दी जाने लगी है। कुछ साल पहले तक अमर उजाला अपने सीनियरों के पीएफ काटा करता था, पर इधर कुछ दिनों से इसे काटना बंद कर दिया था और इसकी जगह पीएफ एलाउंस दिया करता था।

घाट पर पहले दिन बनी हजामत

अजयजी: फिल्‍म ‘काशी का अस्‍सी’ की शूटिंग : कथाकार काशीनाथ सिंह के उपन्यास ‘काशी का अस्सी’ पर निर्देशक चंद्र प्रकाश द्विवेद्वी द्वारा बनायी जा रही फिल्म की शूटिंग रविवार को सुबह अस्सी घाट पर शुरू हो गयी। फिल्म यूनिट के सदस्य दो दिन पूर्व से यहां आकर डट गए थे। सभी कलाकार कैंट क्षेत्र के एक नामी गिरामी होटल में ठहरे हुए हैं। इस फिल्म की लगभग अस्सी प्रतिशत शूटिंग फिल्म सिटी गोरेगांव में सम्पन्न हो चुकी है।

सहारा के झटका से उबरने के लिए जागरण ने शुरू की स्‍कीम

वाराणसी। सहारा के वाराणसी पदार्पण के साथ ही बाकी तीन अखबारों जागरण, अमर उजाला और हिंदुस्तान के पांव के नीचे से मिट्टी खिसक गयी है। ऐसा माना जा रहा है जागरण का चार हजार, अमर उजाला का पांच और हिंदुस्तान का चार हजार अखबार मार्केट में कम हुआ है। इस तरह इन तीनों अखबारों का 13 हजार अखबार काटकर और स्वयं का दो-तीन हजार जोड़कर सहारा कोई 15-16 हजार अखबार मार्केट में बेचने का दावा कर रहा है।

सुनिए, बनारस के इन हिन्‍दुस्‍तानियों का रद्दी घोटाला!

वाराणसी। हिंदुस्तान में नववर्ष को बढ़िया तरीके से मनाने के लिए कुछ लोग कमर कसे हुए हैं। कारण कि उनके हाथ में हजारों की रकम जो लगने वाली है। सुना जा रहा है कि हिंदुस्तान में फ्री कापी के वितरण के नाम पर जो घपले-घोटाले का खेल चल रहा है, दरअसल नववर्ष उसी से मनाया जाने वाला है। दारू-मुर्गा की दावत का निमंत्रण बंट भी चुका है। इसकी कहानी वाराणसी के विभिन्न अखबार वितरण सेंटरों पर हर रोज वितरकों के मुंह से सुनी जा सकती हैं।

वो मर गए थे, अमर उजाला ने जिंदा कर दिया!

: दिवंगत नेता से भाषण कराया : दस वर्ष गुजर गया अमर उजाला को वाराणसी से प्रकाशित होते हुए। बावजूद इसके लगता है अमर उजाला अभी इस शहर से और इस शहर के नेताओं से पूरी तरह परिचित नहीं हो पाया है। शायद यही वजह है कि 17-18 साल पूर्व दिवंगत हुए एक कांग्रेसी नेता की मौजूदगी अमर उजाला ने एक कार्यक्रम के दौरान दिखायी। कांग्रेस पार्टी के 125वें स्थापना दिवस के मौके पर कांग्रेसी संगठनों ने अलग-अलग कार्यक्रम आयोजित किए थे।

तो इसलिए प्रो. एमपी सिंह का नाम जागरण ने नहीं छापा!

अजयविश्व का सबसे पढ़ा जाने वाला अखबार होने का दावा करने वाले दैनिक जागरण की पत्रकारिता का एक नया सच सामने आया है। 26 दिसंबर 2010 का अंक देखिए। काशी विद्यापीठ में 25 दिसंबर को एक महत्वपूर्ण गोष्ठी हुई थी। इस गोष्ठी को काशी विद्यापीठ के मानविकी संकाय में चंद्रकुमार मीडिया फाउंडेशन की ओर से आयोजित किया गया था, जिसका विषय था-“सच और पत्रकारिता।” बाकी सभी अखबारों और वेबपोर्टलों ने जहां फोटो सहित जबर्दस्त कवरेज दिया। जागरण ने इसे छोटे से सिंगल कालम में पेज 6 पर बिना किसी फोटो के निपटा दिया। जबकि इस संगोष्ठी में जागरण के समाचार संपादक राघवेंद्र चढ्ढा, वरिष्ठ रिपोर्टर नागेंद्र पाठक और फोटोग्राफर स्वयं मौजूद थे।