वाराणसी। अमर उजाला के एमडी अतुल माहेश्वरी के निधन के साथ ही अमर उजाला ग्रुप में वर्चस्व की जंग तेज होने की आशंका बलवती हो गयी है। मंगलवार को अमर उजाला का अंक देखकर ऐसी ही आशंका यहां लोगों ने व्यक्त की। कारण यह कि अमर उजाला के दो पार्टनरों स्वर्गीय डोरी लाल अग्रवाल और स्व. मुरारी लाल माहेश्वरी के खानदानों में कंपनी में वर्चस्व की जंग चल रही है और मामला अदालतों में विचाराधीन है। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि अतुल माहेश्वरी पर दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट में एक क्रिमिनल मुकदमा भी चल रहा है। दोनों खानदानों के झगड़े में कंपनी ला बोर्ड के कार्यवाहक चेयरमैन को सात लाख रुपये की रिश्वत देने का मामला है और इस मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो ने अतुल माहेश्वरी को दोषी मानते हुए पटियाला हाउस कोर्ट में याचिका दाखिल की है।
मंगलवार का पूरा अमर उजाला पढ़ जाईये, कहीं भी अग्रवाल खानदान का नाम नहीं दिखेगा। कहीं से यह भी पता नहीं चल रहा है कि अमर उजाला ग्रुप का गठन स्व. डोरीलाल अग्रवाल और स्व. मुरारी लाल माहेश्वरी ने मिलकर किया था और दोनों ही खानदानों की इस ग्रुप को बनाने में महती भूमिका है। अमर उजाला पढ़ने पर नहीं लगा कि अशोक अग्रवाल भी कंपनी के चेयरमैन हैं। अमर उजाला में जो विज्ञापन पहले पेज पर आया है उसमें भी कहीं भी अग्रवाल खानदान का नाम नहीं है। सहारा ने अतुल माहेश्वरी के निधन की खबर को पेज नंबर 15 में सिंगल कालम दो पैरे में चौथाई कालम फोटो के साथ छापा है।
आई नेक्स्ट ने सिर्फ उठावनी वाला विज्ञापन छापा है एक लाइन खबर नहीं दी है। हिंदुस्तान में पहले पेज पर अतुल माहेश्वरी की खबर काले बार्डर बाक्स में फोटो के साथ छापा है। उसने पेज नंबर 15 में ‘पत्रकारिता के मानदंडों को समर्पित रहे अतुल’ पांच कालम में एक फाइल फोटो के साथ एजेंसियों के हवाले से जो खबर छापी है उसमें अंत्येष्टि के समय मौजूद लोगों में बाकी सभी के साथ अपने हिंदुस्तान के समूह संपादक शशिशेखर और अमर उजाला के संपादकीय सलाहकार अजय उपाध्याय आदि का नाम दिया है। यहां यह बता दें कि अमर उजाला ग्रुप में पूर्व समूह संपादक शशिशेखर एमडी अतुल माहेश्वरी के अति चहेते लोगों में से थे और परंपरानुसार अब भी हैं। जागरण ने पहले पेज पर सिंगिल कालम में चौथाई कालम फोटो के साथ एक खबर छापी है। अंत्येष्टि स्थल पर गए लोगों में भी कंपनी की आगामी दशा और दिशा को लेकर खुसुरपुसुर जारी थी। इससे माहेश्वरी और अग्रवाल खानदानों के बीच के जबर्दस्त मनमुटाव का पता चलता है। जानकारों का कहना है कि उठावनी की रस्म के बाद अमर उजाला में धीरे धीरे जंग का असर आता दिखेगा। लोग अभी से मुतरेजा, कैंटल, यादवेश कुमार के भविष्य को लेकर कयास लगाने लगे हैं। बहरहाल देखते जाईए आगे आगे क्या होता है!
वाराणसी से पूर्वांचल दीप के अजय कृष्ण त्रिपाठी की रिपोर्ट












कमल शर्मा
January 5, 2011 at 9:36 am
देश में हिंदी श्रमजीवी पत्रकारों द्धारा स्थापित तीन अखबार अमर उजाला, नई दुनिया और राजस्थान पत्रिका को माना जाता है। इन तीनों अखबारों में काम करने का सपना हर हिंदी भाषाई पत्रकार के मन में रहा है। इन अखबारों की प्रतिष्ठा और मान में आज भी कोई कमी नहीं है। लेकिन आपकी उपर्युक्त रिपोर्ट को देखकर इन तीन में से एक अखबार में चल रही जंग से दुख हुआ है।