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इटावा में हिंदुस्तान से तलाक का दौर

: पूर्व जिला प्रतिनिधि के आश्‍वासन पर कई वर्ष से कर रहे थे काम : हिन्‍दुस्‍तान, इटावा में कई क्षेत्रीय प्रतिनिधियों ने काम करना बंद कर दिया है. इनका कहना है कि इन लोगों से किया गया वादा पूरा नहीं किया गया. इसमें से कुछ लोगों ने एजेंसी भी ले रखी थी. ज्‍यादातर का कहना है कि इनको हिन्‍दुस्‍तान, इटावा के पूर्व जिला प्रति‍निधि सुभाष त्रिपाठी ने प्रबंधन के आदेश पर नियुक्‍त कर रखा था. इनसे प्रत्‍येक माह 2500 रूपये देने का वादा भी किया गया था.

: पूर्व जिला प्रतिनिधि के आश्‍वासन पर कई वर्ष से कर रहे थे काम : हिन्‍दुस्‍तान, इटावा में कई क्षेत्रीय प्रतिनिधियों ने काम करना बंद कर दिया है. इनका कहना है कि इन लोगों से किया गया वादा पूरा नहीं किया गया. इसमें से कुछ लोगों ने एजेंसी भी ले रखी थी. ज्‍यादातर का कहना है कि इनको हिन्‍दुस्‍तान, इटावा के पूर्व जिला प्रति‍निधि सुभाष त्रिपाठी ने प्रबंधन के आदेश पर नियुक्‍त कर रखा था. इनसे प्रत्‍येक माह 2500 रूपये देने का वादा भी किया गया था.

हिन्‍दुस्‍तान से अब सुभाष त्रिपाठी का तलाक हो चुका है. ऐसे में उनके कहने पर काम करने वाले क्षेत्रीय प्रतिनिधि त्रिशंकु की तरह लटक गए. सुभाष ने कुछ को प्रबंधन तो कुछ को अपने वादे पर संवाददाता नियुक्‍त कर रखा था. अब जबकि यहां नए जिला प्रतिनिधि के रूप में अमर उजाला, औरैया से लाए गए संतोष पाठक को गद्दी सौंप दी गई है तो इन लोगों ने भी काम करने से इनकार कर दिया है. भरथना से दिवाकांत शुक्‍ला, बकेबर से मनोज तिवारी, बैदपुरा से ऋषि मिश्रा, सैफई से सुघर सिंह जाटव, बरसरेहर से मधुर शर्मा, बढ़पुरा से संदीप भदौरिया सहित कई अन्‍य क्षेत्रीय प्रतिनिधियों ने काम करना बंद कर दिया है. इनमें से कुछ ने अखबार की एजेंसी भी ले रखी थी, जिन्‍होंने अखबार का सर्कुलेशन कम कर दिया है.

इटावा में हिन्‍दुस्‍तान को सुभाष के हटने के बाद से कई मुश्किलें उठानी पड़ रही हैं. सर्कुलेशन के साथ क्षेत्रीय खबरों के प्रवाह पर भी असर पड़ा है. कुछ जगहों पर दूसरे संवाददाताओं की नियुक्ति करके परेशानी कम करने का प्रयास किया जा रहा है, लेकिन मुश्किलें अब भी आसान नहीं हुई हैं. काम न करने वाले प्रति‍निधियों का कहना है कि उनके साथ धोखा किया गया है. वादा करके हिन्‍दुस्‍तान प्रबंधन मुकर गया है.

इस संदर्भ में हिन्‍दुस्‍तान, कानपुर के संपादक विशेश्‍वर कुमार का कहना है कि इन लोगों को जिसने रखा था, उससे समझें. इन्‍हें अगर संस्‍थान ने एप्‍वाइंट किया होता तो इनको नियमानुसार कागजात दिए जाते. जिसके कहने पर यह लोग काम करते रहे हैं या छोड़ रहे हैं वो जानें. ऐसे लोगों से संस्‍थान का कुछ भी लेना देना नहीं है. इनके इस्‍तीफा देने से अखबार पर प्रभाव पड़ने जैसी कोई बात नहीं है.

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