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प्रतिद्वंद्वी अखबारों को राष्‍ट्रीय सहारा ने दिया झटका

बनारस में अपने प्रतिद्वंद्वी अखबारों को राष्‍ट्रीय सहारा ने जोर का झटका जोर से दिया है. सहारा ने आज एक पेज का विज्ञापन छाप कर ऐलान कर दिया है कि अब सहारा के पाठकों को यह अखबार मात्र साठ रूपये महीने में मिलेगा. सहारा के इस कदम से बनारस में चल रही प्राइस वार में नए रंग देखने को मिल सकते हैं. सहारा ने कुछ शर्तों पर हॉकरों को साइकिल देने का वादा करके इस लड़ाई को और धार दे दी है.

बनारस में अपने प्रतिद्वंद्वी अखबारों को राष्‍ट्रीय सहारा ने जोर का झटका जोर से दिया है. सहारा ने आज एक पेज का विज्ञापन छाप कर ऐलान कर दिया है कि अब सहारा के पाठकों को यह अखबार मात्र साठ रूपये महीने में मिलेगा. सहारा के इस कदम से बनारस में चल रही प्राइस वार में नए रंग देखने को मिल सकते हैं. सहारा ने कुछ शर्तों पर हॉकरों को साइकिल देने का वादा करके इस लड़ाई को और धार दे दी है.

आज सुबह जब राष्‍ट्रीय सहारा के इस धमाके की खबर अन्‍य अखबारों के मैनेमेंट को हुई तो उन्‍हें इस ठंड में भी पसीना आ गया. अन्‍य अखबारों के सर्कुलेशन से जुड़े कई लोग भागे-भागे विभिन्‍न सेंटरों पर पहुंचे. वहां चल रहे ड्रामा और एक्‍शन को अपनी आंखों से देखा. सहारा के इस कदम से अन्‍य अखबारों पर अच्‍छा खासा प्रभाव पहले ही दिन पड़ा. पहले ही दिन उसे लगभग चार हजार कापियों की बढ़त मिल गई. आज, जागरण, अमर उजाला और हिन्‍दुस्‍तान सहित दोनों बच्‍चे अखबार आई-नेक्‍स्‍ट और काम्‍पैक्‍ट को भी अच्‍छा खासा धक्‍का लगा है.

सहारा ने पाठकों को फायदा पहुंचाने के साथ अपने हॉकरों पर भी रहमत बरसा रहा है. सहारा हॉकरों को कमीशन के रूप में एक रूपये पांच पैसे तो दे ही रहा है, उसने पचास अखबार के आंकड़े को पूरा करने पर एक साइकिल देने की भी घोषणा की है. इस स्‍कीम के बाद हॉकरों की बल्‍ले-बल्‍ले है. बनारस में राष्‍ट्रीय सहारा की लांचिंग के बाद से ही प्राइस वार चल रहा है. अखबार तमाम तरह के हथकंडे अपनाकर हॉकरों को अपने अखबार ज्‍यादा बेचने के लिए उत्‍साहित कर रहे हैं. अमर उजाला ने पिछले सप्‍ताह ही अखबार को साढ़े तीन की जगह ढाई रूपये में ग्राहकों को उपलब्‍ध कराने की योजना चलाई है. यानी अखबार के लिए उनके ग्राहकों को 105 रूपये की जगह सिर्फ 75 पैसे ही देने पड़ेंगे.

राष्‍ट्रीय सहारा की इस स्कीम से सबसे ज्‍यादा नुकसान आई नेक्स्ट को उठाना पड़ रहा है. कुछ सूत्रों का कहना है कि सहारा के स्‍कीम के बाद हॉकरों ने बमुश्किल दस हजार कापियां उठाई होंगी. जबकि आई-नेक्‍स्‍ट प्रबंधन ने पिछले ही दिनों इस अखबार की कीमत डेढ़ रूपये से घटाकर एक रूपये की थी. जागरण ने पाठकों को लुभाने तथा प्रतिद्वंद्वी अखबारों को पीछे छोड़ने के लिए अखबार की कीमत तो कम नहीं किया लेकिन ईनामी स्‍कीम जरूर लांच कर दिया. इसके अलावा हिन्‍दुस्‍तान ने भी हॉकरों को दस पर एक अखबार मुफ्त बांट रहा है. सहारा के इस कदम के बाद बनारसी अखबारों के इस प्राइस वार में कुछ और गोले दग सकते हैं. अब देखना है कि इन गोलों से पाठकों और हॉकरों को कितना फायदा होता है और प्रतिद्वंद्वी अखबारों को कितना नुकसान.

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0 Comments

  1. pawan jain

    January 14, 2011 at 1:15 pm

    wow it ‘s very intersting price war after some time we can saw change price list and scheme for reader it’s really gud for reader because they want read gud paper but average rate and hocker also effort to increase the circulation

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