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जागरण समूह ने की दक्षिण भारत जाने की तैयारी

जागरणहिंदी पट्टी में बाजार सीमित होने और प्रतिस्पर्धा तेज होने के कारण अब बड़े हिंदी अखबार अपनी प्रसार संख्या में बढ़त बरकरार रखने के लिए नए-नए इलाकों में पांव पसारने की तैयारी कर रहे हैं। देश के बड़े हिंदी अखबार प्रकाशन समूहों में आने वाले जागरण प्रकाशन लिमिटेड ने अब अपने फ्लैगशिप अखबार दैनिक जागरण व अन्य सहयोगी प्रकाशानों के लिए दक्षिण भारत के बाजारों में संभावना टटोलनी शुरू कर दी है।

जागरणहिंदी पट्टी में बाजार सीमित होने और प्रतिस्पर्धा तेज होने के कारण अब बड़े हिंदी अखबार अपनी प्रसार संख्या में बढ़त बरकरार रखने के लिए नए-नए इलाकों में पांव पसारने की तैयारी कर रहे हैं। देश के बड़े हिंदी अखबार प्रकाशन समूहों में आने वाले जागरण प्रकाशन लिमिटेड ने अब अपने फ्लैगशिप अखबार दैनिक जागरण व अन्य सहयोगी प्रकाशानों के लिए दक्षिण भारत के बाजारों में संभावना टटोलनी शुरू कर दी है।

जागरण के रणनीतिकार पूरी तरह मान चुके हैं कि अब पूर्व और उत्तर में बाजार सीमित हो गया है और प्रतिस्पर्धा भी बढ़ गई है, जिसके कारण मुनाफा घट गया है। बिहार, यूपी व अन्य हिंदी भाषी राज्यों से लोगों का पलायन भी अब दिल्‍ली या पंजाब के बजाय दक्षिण राज्यों की ओर बढ़ा है, इनमें अधिक पढ़े-लिखे पेशेवरों के अलावा दिहाड़ी मजदूरी करने वाला श्रमिक वर्ग भी शामिल हैं। जागरण के रणनीतिकार दक्षिणी राज्यों में रहने वाले इन हिंदी भाषी प्रवासियों को अपने लिए बड़ा आधार और बाजार मान रहे हैं. रणनीतिकार दूसरे बड़े समूहों के दक्षिणामुखी होने से पहले ही दक्षिण बाजार में दस्तक देकर बढ़त हासिल कर लेना चाहते हैं। जागरण प्रबंधन वर्षों पहले दक्षिण के बाजार में मौजूद संभावना को पहचान कर इस रणनीति पर काम करना शुरू कर दिया था।

दक्षिणी राज्यों में उत्तर भारतीय प्रवासियों की संख्या अधिक होने के कारण दक्षिण के बाजार में दस्तक देने के लिए जागरण प्रबंधन को बंगलौर सबसे मुफीद लगा। इसलिए चार साल पहले ही जागरण ने यहां अपने अंग्रेजी प्रकाशन जागरण सिटी प्लस का प्रकाशन शुरू कर दिया था, जो अब शहर के पॉश इलाकों में पहचाना जाने लगा है। इस बीच जागरण समूह ने महानगरीय पाठकों में पैठ बढ़ाने की रणनीति के तहत अंग्रेजी के मिड-डे का अधिग्रहण कर लिया। मिड-डे के अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू होने के साथ ही जागरण ने यहां से अपने मुख्य प्रकाशन दैनिक जागरण के प्रकाशन के लिए भी कदम बढ़ना शुरू कर दिया।

पिछले साल 27 मई को जागरण प्रकाशन लिमिटेड की अर्जी पर बंगलौर उत्तर के जिलाधिकारी ने दैनिक जागरण को अनापत्ति प्रमाण जारी किया, जिसके आलोक में आरएनआई ने 1 जून 2010 को दैनिक जागरण का टाइटल बंगलौर से प्रकाशन के लिए अनुमोदित कर दिया। इसके बाद जागरण परिवार इस साल की पहली छमाही में अखबार को यहां से लांच करने की तैयारी में जुटा है। बताया जाता है कि इसके लिए बाजार और प्रसार का प्रारंभिक सर्वे भी हो चुका है। दैनिक जागरण के नाम पर अब लोग यदा-कदा प्रमुख कार्यक्रमों और संवाददाता सम्मेलन में भी दिखने लगे हैं। साथ ही जागरण के राष्ट्रीय संस्करण में जागरण संवाददाता के नाम से कर्नाटक की खबरें भी लग रही है।

दरअसल, बंगलौर और खासकर कर्नाटक हिंदी मीडिया के लिए एक बड़ा केंद्र हो सकता है लेकिन इस ओर अब तक बड़े अखबारों ने ध्यान नहीं दिया था। करीब डेढ़ दशक पहले राजस्थान पत्रिका ने यहां से प्रकाशन शुरू किया, लेकिन इसके बाद कभी कभार कुछ दूसरे अखबारों के यहां आने की कोरी अफवाहें ही उड़ती रही। 15 साल पहले राजस्थानी प्रवासियों की बदौलत पत्रिका ने यहां से प्रकाशन शुरू कर न सिर्फ कर्नाटक के हिंदी पाठकों के बीच अपनी जड़ें जमाई बल्कि पड़ोसी आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, महाराष्ट्र, गोवा व केरल तक भी उसकी पहुंच हुई। सिर्फ मारवाड़ियों तक सीमित रहने के बावजूद पत्रिका का बंगलौर में मुनाफा उसके सभी संस्करणों की तुलना में काफी ज्यादा है। इसकी वजह से समाज से जुड़े विज्ञापनों की अधिकता। और सबसे आश्चर्यजनक है कि बंगलौर और हुबली से मुद्रित पत्रिका की प्रसार संख्या 70 हजार से अधिक नहीं पहुंच पाया है।

बंगलौर में राजस्व की अधिक मात्रा और विपुल प्रसार संभावना के मद्देनजर जागरण के अलावा हिंदी के अन्य समूह भी बंगलौर और कर्नाटक के बाजार में उतरने का मूड बना रहे हैं। सहारा समूह भी इस दौर में शामिल है। कुछ समय पहले ही सहारा समूह के हिंदी अखबार राष्ट्रीय सहारा के बंगलौर से शुरू होने की खबर स्थानीय मीडिया जगत में काफी तेजी से फैली थी, हालांकि अब तक राष्ट्रीय सहारा ने आरएनआई के लिए आवेदन नहीं किया है। सहारा का उर्दू अखबार यहां से फिलहाल निकल रहा है और उसकी प्रसार संख्या भी काफी अच्छी है। प्रवासियों के अलावा यहां मुस्लिम आबादी ही हिंदी अखबारों के लिए संजीवनी हो सकती है। साथ ही उत्तर कर्नाटक और बेलगाम के मराठी भाषी इलाकों में भी हिंदी अखबारों के लिए काफी संभावना है। कुछ समय पहले भास्कर के आने की चर्चा थी। लेकिन इन सब में फिलहाल जगारण बाजी मारने को अधिक उतावला दिख रहा है।

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0 Comments

  1. tarkesh kumar ojha

    January 17, 2011 at 11:26 am

    swagat yogya hai kadam, jise bahut pahle ho jana chahiye tha, subhkamnayen _tarkesh kumar ojha, kharagpur (west bengal) contact_ 09434453934]

  2. tarkesh kumar ojha

    January 17, 2011 at 11:31 am

    swagat yogya hai kadam , isse south india men rahne wale hindi bhasiyon ko apnapan aur majbooti milegee tarkesh kumar ojha, kharagpur (west bengal) contact_ 09434453934

  3. n bharadwaj

    January 17, 2011 at 2:43 am

    jagran ko north east ka bajar pakarna chahiye . khaskar guwahati se nikane wala charo hindi akhbar desh me sabse mahaga hai aur content ke3 mamle me sabse kharab. so logo ko delhi wala jagran ek din bad padhna parta hai

  4. rai

    February 4, 2011 at 10:48 am

    BADHAE HO !

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