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इस मशीन से परेशान हो गए जागरण के कर्मचारी!

दैनिक जागरण, मुरादाबाद में इन दिनों अधिकारी से लेकर कर्मचारी तक अजीब सी बेचैनी महसूस कर रहे हैं. इस बेचैनी की वजह यह है कि जागरण प्रबंधन ने अपनी यूनिटों के सभी दफ्तरों में हाजिरी के लिए इलेक्ट्रॉनिक मशीनें लगवा दिया है. नेट से जुड़ी इस मशीन में सभी कर्मचारियों की ऊँगली का नमूना फीड है. सभी कर्मचारियों को सुबह ड्यूटी पर आने के साथ ही इस मशीन में ऊँगली डालकर हाजिरी दर्ज करनी होगी और फिर रात को घर जाने से पहले भी इसी तरह मशीन में ऊँगली डालकर हाजिरी देनी होगी. मशीन नेट से जुड़ी है, लेकिन नेट ख़राब होने पर भी यह हाजिरी लेती रहेगी और महीने में जब भी नेट कनेक्‍ट होगा मशीन महीने भर की हाजिरी का डाटा मुख्यालय को ट्रांसफर कर देगी.

दैनिक जागरण, मुरादाबाद में इन दिनों अधिकारी से लेकर कर्मचारी तक अजीब सी बेचैनी महसूस कर रहे हैं. इस बेचैनी की वजह यह है कि जागरण प्रबंधन ने अपनी यूनिटों के सभी दफ्तरों में हाजिरी के लिए इलेक्ट्रॉनिक मशीनें लगवा दिया है. नेट से जुड़ी इस मशीन में सभी कर्मचारियों की ऊँगली का नमूना फीड है. सभी कर्मचारियों को सुबह ड्यूटी पर आने के साथ ही इस मशीन में ऊँगली डालकर हाजिरी दर्ज करनी होगी और फिर रात को घर जाने से पहले भी इसी तरह मशीन में ऊँगली डालकर हाजिरी देनी होगी. मशीन नेट से जुड़ी है, लेकिन नेट ख़राब होने पर भी यह हाजिरी लेती रहेगी और महीने में जब भी नेट कनेक्‍ट होगा मशीन महीने भर की हाजिरी का डाटा मुख्यालय को ट्रांसफर कर देगी.

इस नयी व्यवस्था के लागू होने से प्रिंटिग यूनिट के कर्मचारी तो परेशान हैं ही, सबसे ज्यादा परेशान हैं ब्यूरो ऑफिस के कर्मचारी, क्योंकि अब तक वह हाजिरी से मुक्त थे. कभी शाम को दफ्तर पहुंचकर काम निपटा दिया तो कभी दफ्तर से गोल हो गए, लेकिन अब तो दस बजे से पहले ही दफ्तर पहुंचना पड़ता है और फिर रात दस बजे तक दफ्तर के ही होकर रहना मज़बूरी.

हाजिरी से मुक्ति किसी को भी नहीं है चाहे वह प्रिंटिंग सेंटर के समाचार संपादक हों या फिर मैनेजर. इस हालत में सुबह शाम मशीन में ऊँगली डालकर हाजिरी देते समय जागरण के कर्मचारी ना जाने क्या-क्या बदबदाते रहते हैं. अब बेचारे कर भी क्या सकते हैं, नौकरी करनी है तो मालिक के बनाये नियम कायदों का पालन तो करना ही पड़ेगा.

मुरादाबाद से भीष्‍म सिंह देवल की रिपोर्ट.

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0 Comments

  1. RAJESH KUMAR

    January 22, 2011 at 3:55 am

    जागरण वाले तो अपने कर्मचारियों को बंधुआ मजदूर बनाने पर तुले हैं, काम का ढेर सारा बोझ और तनख्वाह बेहद कम, क्या करें परिवार का पेट पलने के लिए सब सहन करना पड़ेगा –राजेश कुमार

  2. manish

    January 21, 2011 at 12:58 pm

    ismen bura kya hai dewal…….chavnni hat gyi kya

  3. hani

    January 21, 2011 at 11:01 am

    सर जी आपकी तीसरी आख का कमाल में में अक्सर बडाश फौर मीडया और ibn7 पर देखता रहता हू सर जी इससे पहले पोलिस और पत्रकार की पिटाई ,शराब में पोलिस ,हिरासत में मौत ,नजाने कितनी अतभुत खबरों से हमको रूबरो कराया हे लकिन आज जो आप खबर लेकर आये हे वह देश की सब से बड़ी खबर हे और समाज को दर्पण हे कियुकी समस्त देश राज नेता a.i.s pc.s ने ही देश कोखोकला कर के रख दिया हे अगर मान्यवर भीष्‍म सिंह देवलजी आप की यह “मशीन में ऊँगली डालकर हाजिर दर्ज करनी और फिर रात को घर जाने से पहले भी इसी तरह मशीन में ऊँगली डालकर हाजिरी देनी होगी. मशीन नेट से जुड़ी है, लेकिन नेट ख़राब होने अ पर भी यह जिरी लेती रहेगी और महीने में जब भी नेट कनेक्‍ट होगा मशीन महीने भर की हाजिरी का डाटा मुख्यालय को ट्रांसफर कर देगी”.में इस मशीन को हर जनता के साथ और m p , mla हो या फिर इस मशीन को अथिकरी ओ और जनता के साथ घर घर से इस का कनेक्शन जोड़ दिया जाये तो भीर किसी आम नागरिक का कोई काम नहीं रोकेगा देश में हर तरफ जे जे जे कर के नारा होगा जिस किसी अधिकारी को तलाश न हो भीष्‍म सिंह देवल जी “मशीन में ऊँगली वाली मशीन की भबकी देनी हो की उगली वाली मशीन हाज़िर हो ,बस भीर किया अधिकारी हाज़िर ही जनाब में यहा हो न उतर प्रदेश की मुखावती मायावती को —–” ऊँगली वाली मशीन——लेनी जाहिए —उगली डाली -जिसको जहा जहा किसी की जरूरत होई mla ho यहा फिर अधिकारी हजिर हो जनाब —उतर प्रदेश में विकास ही विकास –कियु की उगली वाली मशीन जो आरही ही जनाब ————जिंदाबाद -जिंदाबाद —– भीष्‍म सिंह देवल जी की “मशीन में ऊँगली–यह उगली में मशीन –जोभी हा खूब ही भीष्‍म सिंह देवल जी “मशीन में ऊँगली नमस्कार जे हिंद ———————–hani———-uni—————reporter——
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  4. RAJESH KUMAR

    January 21, 2011 at 8:21 am

    जागरण वाले तो अपने कर्मचारियों को बंधुआ मजदूर बनाने पर तुले हैं, काम का ढेर सारा बोझ और तनख्वाह बेहद कम, क्या करें परिवार का पेट पलने के लिए सब सहन करना पड़ेगा –राजेश कुमार

  5. rajesh

    January 22, 2011 at 11:07 am

    बहुत ही अच्‍छी बात है अब जागरण के पतरकारों के लिए जो बडे बडे पतरकार बनते है उनके लिए अच्‍दी बात है दिन भर मस्‍ती करते थे लेकिन अब सुबह शाम अंगुली के चक्‍कर में बेचारे दैडे दौडे आपिफस आते है चाहे ठंड हो या बारिश बेचारों को नौकरी बचाने के लिए जागरण्‍ा को उंगली देनी ही पडती हैण

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