इंडियन न्यूजपेपर सोसाइटी (आईएनएस) ने श्रमजीवी पत्रकारों के लिए वेतन बोर्ड की सिफारिशों पर आश्चर्य और निराशा जताया है. आईएनएस ने सरकार से इसे तत्काल रद्द करने की मांग की है. इस मुद्दे पर चर्चा के लिए आईएनएस ने मुंबई में एक बैठक की थी. अध्यक्ष कुंदन आर व्यास ने कहा कि अगर सरकार वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू करती है तो कई समाचार पत्र प्रतिष्ठान कारोबार से बाहर हो जाएंगे.
एक वक्तव्य में व्यास ने कहा कि वेतन बोर्ड की रिपोर्ट में कई खामियां हैं. यह सिफारिश एकतरफा है. वेतन बोर्ड का गठन सही तरीके से नहीं किया गया है. कई नियमों को ताक पर रखकर रिपोर्ट तैयार की गई है. वर्तमान वेतन बोर्ड ने सदस्यों से उनकी राय जाने बिना अपनी रिपोर्ट तैयार की है. वेतन आयोग ने ऐसी सिफारिशें दी हैं जो उसके वैधानिक दायरे से बाहर हैं.
व्यास ने कहा कि बोर्ड ने भुगतान करने की क्षमता का आकलन करने के लिए स्थापित सिद्धांतों की अनदेखी की. साथ ही इससे समाचार पत्र उद्योग पर पड़ने वाले बोझ को भी समझने का कोई प्रयास नहीं किया. वेतन बोर्ड ने शुरुआती प्रस्तावों को प्रकाशित करने का दायित्व भी नहीं निभाया, जिससे सभी को समान अवसर और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का सम्मान किया जा सके.
व्यास ने कहा कि समय के अनुसार इन वेतन बोर्डों का अस्तित्व का मायने नहीं रह गया है. राष्ट्रीय श्रम आयोग भी यह सुझाव दे चुका है कि किसी भी उद्योग में वेतन तय करने के लिए किसी भी तरह के वेतन बोर्ड की कोई जरूरत नहीं है.











