: हिंदी वेब ब्लॉगिंग कार्यशाला में ब्लॉगरों ने की मांग : हिन्दी का प्रयोग न करने को देश में क्राइम घोषित कर दिया जाना चाहिए और आज मैं इस मंच से पूरा एक दशक हिन्दी ब्लॉगिंग के नाम करने की घोषणा करता हूं। इस एक दशक में आप देखेंगे कि हिन्दी ब्लॉगिंग सबसे शक्तिशाली विधा बन गई है। जिस प्रकार मोबाइल फोन सभी तकनीक से युक्त हो गया है, उसी प्रकार हिन्दी ब्लॉगिंग सभी प्रकार के संचार का वाहक बन जाएगी। प्रख्यात व्यंग्यकार और चर्चित ब्लॉग नुक्कड़ के मॉडरेटर अविनाश वाचस्पति ने जब यह आवाह्न किया तो पूरा सभागार तालियों की करतल ध्वनि से गूंज उठा।
उन्होंने कहा कि मीडियाकर्मियों और हिन्दी ब्लागरों का समन्वयन अवश्य ही इस क्षेत्र में सकारात्मक क्रांति का वाहक बनेगा। जिस प्रकार हिन्दी ब्लॉगर और मीडियाकर्मी एक साथ मिले हैं, उसी प्रकार यह परचम सभी क्षेत्रों में लहराना चाहिये। प्रत्येक क्षेत्र में से हिन्दी ब्लॉगर बनें और अपने अपने क्षेत्र की उपलब्धियों को सामने लायें। हिंदी मन की भाषा है और इस भाषा की जो शक्ति है वो हिन्दी के राष्ट्रभाषा न बनने से भी कम होने वाली नहीं है। वे राजधानी के आदर्श नगर में आयोजित हिन्दी ब्लॉगिंग की कार्यशाला और ब्लॉगर सम्मेलन के मौके पर उपस्थित लोगों को संबोधित कर रहे थे।
आईबीएन7 के अनिल अत्री ने कहा कि हिंदी भाषा सम्पूर्ण राष्ट्र को जोड़ने की क्षमता रखती है.. विश्व मंच पर राष्ट्र का गौरव भाषा बन सकती है.. हिंदी खुद में एक संस्कृति और संस्कार है.. दिल से बोली जाने और दिल से सुनी जाने वाली इस भाषा को पढ़ने और लिखने वालों की संख्या देशभर में कम नहीं है।
इस कार्यशाला की उपलब्धि उत्तराखंड खटीमा से पधारे डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’ और चित्तौड़गढ़ से पधारी इंदुपुरी गोस्वामी रहीं। दिल्ली में प्रिंट और इलेक्ट्रोनिक मीडिया से भी भारी
संख्या में पत्रकारों ने शिरकत कर वेब पत्रकारिता के गुर भी सीखे और यह अनुभव किया कि आज हिंदी किस मुकाम पर है और इसे शिखर पर पहुंचाया जा सकता है। इस कार्यशाला में शिरकत कर रहे मीडियाकर्मियों ने अपने अपने ब्लॉग बनाये और संकल्प किया कि वे भी अब नियमित रूप से ब्लॉग लिखा करेंगे।
उपस्थित लोगों में उल्लेखनीय चर्चित ब्लॉगर अजय कुमार झा, पवन चंदन, सुरेश यादव, पाखी पत्रिका की उप संपादक प्रतिभा कुशवाहा, संगीता स्वरूप, वंदना गुप्ता, शिशिर शुक्ला, राजीव तनेजा, शोभना वेलफेयर सोसायटी के सुमित तोमर, हिन्दी ब्लॉगिंग में पीएचडी कर रहे केवल राम, अनिल अत्री, विनोद पाराशर, उपदेश सक्सेना, संजीव शर्मा, सुनील कुमार इत्यादि के नाम उल्लेखनीय हैं। मीडियाकर्मियों में इंडिया न्यूज के वीके शर्मा, सहारा टीवी के रजनीकांत तिवारी, आजतक के आनंद कुमार, सतीश शर्मा, संजय राय, राजेश खत्री, योगेश खत्री, हर्षित, दीपक शरमा, राजेंदर स्वामी ने अपने-अपने ब्लॉग बनाये।
ब्लॉग लिखने की तकनीकी जानकारी पद्मावली ब्लॉग के पद्म सिंह, ब्लॉगप्रहरी के कनिष्क कश्यप और अविनाश वाचस्पति ने सामूहिक रूप से दी। इस कार्यशाला का आयोजन और संचालन अनिल अत्री ने किया। आदर्श नगर में करीब सुबह 11 बजे से शुरू हुई हिन्दी ब्लॉगिग की यह कार्यशाला शाम 5 बजे तक निरंतर चलती रही। इस कार्यशाला में देश के कई नामी साहित्यकार, लेखक और दिल्ली के हिंदी पत्रकारों ने भाग लिया.












विवेक शर्मा
January 24, 2011 at 6:41 am
इन ब्लॉगरों का वश चले तो ये देश के कई टुकड़े करवा दें। अब बताईये कि अगर कोई तमिल या कन्नड़ हिंदी नहीं सीखना चाहता या इसके बिना उसका काम बड़े मजे में चल रहा है तो आप उसे जेल भेज देंगे? कोई आदमी पहले से ही दो भाषाओं का बोझ उठा रहा है, उसे आप तीसरी हिंदी भी जबरन सिखाना क्यों चाहते हैं? मैं यहां जबरन शब्द का इस्तेमाल कर रहा हूं, वजाय इसके कि आप हिंदी का प्रचार-प्रसार करें, उसमें अच्छे कंटेट लाएं, बेहतरीन अनवाद करें या सरकार पर इसके लिए दवाब डालें-आप चाहते हैं कि इसे कानून अपराध घोषित कर दिया जाए? आप जरा इतिहास के पन्नों को उलटाईये, पंडित नेहरु और गांधी को कितनी मशक्कत करनी पड़ी थी देश को एक रखने में। जबकि उस वक्त भी हिंदीवादी चाहते थे कि तालिबान की तरह उसे पूरे देश पर थोप दिया जाए। हिंदी इस देश की सबसे बड़ी बोली और समझी जानेवाली भाषा है। लेकिन वो इसलिए की इसकी आबादी बड़ी है और इस भाषा में कई दूसरे भाषाभाषी में अभिव्यक्ति पा लेते हैं। लेकिन कंटेंट के स्तर पर यह कितनी खाली है, इसका अंदाज आपको हिंदी के अखबार और पत्रिकाओं को पढ़कर हो जाता होगा। हिंदी में कला, विज्ञान, कारोबार, अर्थव्यवस्था और शोध से संबंधित कोई भी ढ़ंग की जानकारी नहीं है। फिर भी आप चाहते हैं कि हिंदी को थोप दें। आप इसके लिए प्रयास करिये कि हिंदी मजबूत हो, हिंन्दी किताब पढ़कर भी कोई एमबीबीएस बन जाए या इंजिनियर बन जाए। आप चाहते हैं कि हम सिर्फ मुंशी प्रेमचंद ही पढ़ते रहें? प्रेमचंद भी आज जिंदा होते तो होरी महतों को अच्छी अंग्रेजी और अच्छी हिंदी सीखने की नसीहत देते। बल्कि मैं तो कहता हूं कि वे दस-बीस अच्छे किताबों का अनुवाद हिंदी में कर देते।
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
January 24, 2011 at 8:45 am
इत्यादि में हम भी शामिल थे!
madan kumar tiwary
January 24, 2011 at 9:08 am
मंयक जी मैने तो आपको नही देखा वैसे मैं भी नही गया था । अब समाचार पढकर खुशी हो रही है । मैं रहता तो रंग में भंग हो जाता , इतनी बेतुकी बात पर जहां तालियां बजती हों , उसे कर्मशाला की बजाय माफ़िया की मिटिंग कहा जाय तो अतिश्यो्क्ति नही होगी । अपने ब्लाग को ऐसा बनाओ की लोग पढें । यह तो गुंडागर्दी की हद होगी की अगर कोई हिंदी का प्रयोग न करे तो उसे अपराधी माना जाय । सब भाजपाई थे क्या वहां।
संजय कुमार सिंह
January 24, 2011 at 10:26 am
हिन्दी में जब अच्छा खासा अपराध शब्द है तब भी आप क्राइम लिखें और दूसरों को हिन्दी का उपयोग न करने पर अपराधी बना दें। कौन सी हिन्दी की बात हो रही है क्राइम वाली या एनबीटी वाली ?