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कागज पर नहीं, व्‍यवहार में अपनानी होगी हिंदी : विमल

राष्ट्रभाषा हिंदी के हितैषी अगर सचमुच में इसकी उन्नति देखना चाहते हैं तो इसे कागजी नहीं बल्कि व्यवहार में इसे अपनाना होगा। चंडीगढ़ में हुए हिंदी भाषा के राष्ट्रीय विचार गोष्ठी में यही निष्कर्ष के तौर पर सामने आया। सेक्टर 46 के गवर्नमेंट कालेज स्नातकोत्तर कालेज के मल्टीमीडिया सभागार में यह आयोजन हुआ। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा आयोजित इस विचार गोष्ठी में देश के विभिन्न राज्यों से हिंदी के जाने-माने विद्वानों ने हिस्सा लिया। ‘वैश्वीकरण और हिंदी का प्रचार, प्रसार तथा प्रयोग की व्यावहारिकता, समस्याएं और समाधान’ विषय पर वक्ताओं ने अपनी-अपनी बात रखी। इसमें पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और महाराष्ट्र के 120 से ज्यादा हिंदी विद्वानों ने शिरकत की। कार्यक्रम के मुख्‍य अतिथि हिंदी के विख्‍यात विद्वान गंगाप्रसाद विमल थे। मुख्‍य मेहमान के तौर पर चंडीगढ़ दूरदर्शन के निदेशक केके रत्तू थे।

राष्ट्रभाषा हिंदी के हितैषी अगर सचमुच में इसकी उन्नति देखना चाहते हैं तो इसे कागजी नहीं बल्कि व्यवहार में इसे अपनाना होगा। चंडीगढ़ में हुए हिंदी भाषा के राष्ट्रीय विचार गोष्ठी में यही निष्कर्ष के तौर पर सामने आया। सेक्टर 46 के गवर्नमेंट कालेज स्नातकोत्तर कालेज के मल्टीमीडिया सभागार में यह आयोजन हुआ। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा आयोजित इस विचार गोष्ठी में देश के विभिन्न राज्यों से हिंदी के जाने-माने विद्वानों ने हिस्सा लिया। ‘वैश्वीकरण और हिंदी का प्रचार, प्रसार तथा प्रयोग की व्यावहारिकता, समस्याएं और समाधान’ विषय पर वक्ताओं ने अपनी-अपनी बात रखी। इसमें पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और महाराष्ट्र के 120 से ज्यादा हिंदी विद्वानों ने शिरकत की। कार्यक्रम के मुख्‍य अतिथि हिंदी के विख्‍यात विद्वान गंगाप्रसाद विमल थे। मुख्‍य मेहमान के तौर पर चंडीगढ़ दूरदर्शन के निदेशक केके रत्तू थे।

गंगाप्रसाद विमल ने कहा कि हिंदी राष्ट्रभाषा है और इस नाते जितना प्रचार और प्रसार इसका होना चाहिए था नहीं हो सका है। व्यवहार में कुछ समस्याएं हैं लेकिन इसमें ज्यादा अड़चनें नहीं है, बस कुछ सार्थक करने की इच्छाशक्ति की जरूरत है। जब यह पैदा हो जाएगी तो हिंदी भी जन-जन की भाषा बन सकती है। केके रत्तू ने कहा कि हिंदी आज विश्व के हर कोने में पहुंच रही है, संवाद की भाषा बन रही है। कहा अपनी मातृभाषा के प्रयोग में किसी तरह की शर्म क्यों हो, पर अंग्रेजियत इस कदर हावी हो चली है कि बहुसंख्‍यक लोग झिझक महसूस करते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार के प्रयास ही इस दिशा में पर्याप्त नहीं है, लोगों को सामने आना होगा और इसे अपनाना होगा। कालेज के हिंदी विभाग के अध्यक्ष सुखदेव मिन्हास ने कहा कि इस तरह से राष्ट्रीय आयोजनों से हिंदी का प्रचार और प्रसार तो होता है लेकिन जरूरत इससे ज्यादा करने की है।

राष्ट्रीय विचार गोष्ठी के सुबह के सत्र की अध्यक्षता पंजाब विश्वविद्यालय के पूर्व विभागाध्यक्ष जयप्रकाश सिंह ने की जबकि मुख्‍य मेहमानों के तौर पर मुंबई विश्वविद्यालय के एमपी सिंह, महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय, रोहतक के नरेश मिश्र थे। शाम के सत्र की अध्यक्षता पंजाब विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के अध्यक्ष सत्यपाल सहगल थे। विशेष मेहमान के तौर पर हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के जगत पाल सिंह और गवर्नमेंट कालेज जंडियाला (पंजाब) के प्रिंसीपल विनोद शाही थे।

महेंद्र सिंह राठौड़ की रिपोर्ट.

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0 Comments

  1. dilzala

    February 7, 2011 at 8:02 am

    aap apni hindi zara theek kar lain to mehrbani hogi

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