जानकारी के मुताबिक अमरोहा के रजकपुर के रहने वाले मूलचंद प्रभाकर के गांव का एक मामला था, जिसको सुलझाने के लिए उन्होंने पुलिस को कुछ पैसे दिए थे. इसी बीच खबर अखबार में छप जाने के बाद पुलिस ने मामले से अपना हाथ खींच लिया. पैसे भी मूलचंद को वापस कर दिए गए. इस दौरान मूलचंद पर आरोप लगा कि उन्होंने वसूली की है. इस पूरे प्रकरण की शिकायत किसी ने अमर उजाला, मुरादाबाद कर दी, यहां से कोई कार्रवाई न होने पर इसकी जानकारी अमर उजाला के हेड आफिस नोएडा तक पहुंचा दी गई. इस मामले में मूलचंद प्रभाकर से पूछताछ भी की गई. पैसा लेने-देने की बात सही पाए जाने पर मूलचंद का हिसाब किताब कर हटा दिया गया. इसी प्रकरण में जिला प्रभारी सुनील पवार को भी इस्तीफा देने का फरमान जारी कर दिया गया.
इस संदर्भ में जब सुनील से बात की गई तो उन्होंने कहा कि मैं देहरादून के रहने वाला हूं, मेरा परिवार वहीं रहता है. मैंने प्रबंधन से अपना तबादला किए जाने की बात कही थी, परन्तु उसे माना नहीं गया जिसके बाद मैंने अपना इस्तीफा दे दिया. मूलचंद ने कहा कि हां मैंने अपना हिसाब किताब आज ही कर लिया है. मुझे आपसी राजनीति के चक्कर में फंसाया गया. मैंने तो सिर्फ अपने गांव वाले एक व्यक्ति की मदद करने की कोशिश की थी. जिसको दूसरा रूप दे दिया गया. इस संदर्भ में जब मुरादाबाद के संपादक नीरजकांत राही से बात की गई तो पहले तो उन्होंने कहा कि मैं बाहर हूं, गाड़ी ड्राइव कर रहा हूं. फिर उन्होंने कहा कि सुनील पवार नाम का कोई व्यक्ति मेरे यहां काम नहीं करता.












neeraj
February 9, 2011 at 5:34 am
jila prabhari ka naam sunil panvar nahi hai. unka naam sudesh panvar hai. mool chand prabhakar pahle se hi vasuli ka kaam karte aaye hai. sirf ek saal me shri prabhakar ne 15 lakh ki keemat se amroha ki pash colony mein makan bhi banaya hai.
prasoon
February 9, 2011 at 5:55 pm
ye sunil nahi sudesh panwar jai hai. inka pura parivar hi vasuly mein laga hua hai.