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हिंदुस्तान, रांची से अशोक पांडेय का इस्तीफा

: हिंदुस्तान में उलटफेर का दौर फिर शुरू : दिनेश मिश्रा को रांची भेजे जाने की चर्चा : सुबह कयास की खबर छपी और दोपहर बीतते बीतते सच हो गई. हिंदुस्तान, रांची से अशोक पांडेय ने इस्तीफा दे दिया है. सूत्रों का कहना है कि अशोक पांडेय ने हिंदुस्तान के संपादकों की दिल्ली-गुड़गांव में 2 फरवरी को हुई बैठक के दौरान ही कोर ग्रुप की बैठक में इस्तीफा दे दिया था. पर उस समय उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं किया गया. अब ताजी सूचना है कि अशोक पांडेय के इस्तीफे पर अड़े रहने के कारण प्रबंधन ने इस्तीफा स्वीकार कर लिया है.

: हिंदुस्तान में उलटफेर का दौर फिर शुरू : दिनेश मिश्रा को रांची भेजे जाने की चर्चा : सुबह कयास की खबर छपी और दोपहर बीतते बीतते सच हो गई. हिंदुस्तान, रांची से अशोक पांडेय ने इस्तीफा दे दिया है. सूत्रों का कहना है कि अशोक पांडेय ने हिंदुस्तान के संपादकों की दिल्ली-गुड़गांव में 2 फरवरी को हुई बैठक के दौरान ही कोर ग्रुप की बैठक में इस्तीफा दे दिया था. पर उस समय उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं किया गया. अब ताजी सूचना है कि अशोक पांडेय के इस्तीफे पर अड़े रहने के कारण प्रबंधन ने इस्तीफा स्वीकार कर लिया है.

सूत्रों के मुताबिक दिल्ली-गुड़गांव में संपादकों की हुई बैठक में शशिशेखर को टारगेट करने के लिए अशोक पांडेय को निशाना बनाया गया. इससे क्षुब्ध होकर अशोक पांडेय ने इस्तीफा दे दिया. कहा जा रहा है कि अशोक पांडेय भास्कर में लौट रहे हैं. वे पहले भी भास्कर में काम कर चुके हैं. हालांकि भास्कर में उनके जाने की अभी पुष्टि नहीं हो पाई है. उधर, रांची में दिनेश मिश्रा को भेजे जाने की अपुष्ट सूचना मिल रही है. दिनेश चंद मिश्रा इन दिनों हिंदुस्तान, आगरा के स्थानीय संपादक हैं. अशोक पांडेय के इस्तीफे के बाद हिंदुस्तान में शशि शेखर समर्थकों और विरोधियों के बीच चल रही रस्साकस्सी सामने आ गई है. माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में कुछ और उलटफेर हो सकते हैं.

भड़ास4मीडिया पर हिंदुस्तान के संपादकों की दिल्ली में हुई बैठक के दौरान बड़े उलटफेर की खबर प्रकाशित हुई थी लेकिन उस समय बातें बाहर नहीं आ सकीं. अब धीरे-धीरे एक-एक कर उलटफेर के घटनाक्रम शुरू हो चुके हैं. अभी तक सभी यह मान रहे थे कि अशोक पांडेय का रांची से तबादला होगा. लेकिन उनके इस्तीफा देने से अब यह चर्चा तेज हो गई है कि हिंदुस्तान में शशि शेखर का प्रभाव कम होने लगा है और देर-सबेर शशि शेखर भी निशाने पर आ सकते हैं. शशि शेखर के करीबी कुछ लोगों का कहना है कि हिंदुस्तान में आंतरिक हालात अब ठीक नहीं हैं. संभव है कि बहुत जल्द कुछ और बड़े निर्णयों के बारे में जानकारी बाहर आए.

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0 Comments

  1. sunita

    February 11, 2011 at 2:15 pm

    मैने जो पहले वाली खबर के कमेंट में कहा था, वह सही निकली। अच्छे खासे चल रहे हिंदुस्तान की किस्मत नए प्रधान संपादक के आने के साथ ही खराब होनी शुरू हो गई। प्रभात खबर वालों की किस्मत खुल गई है। भास्कर को पटका, बिहार में दो जगहों पर हिंदुस्तान को पटका और अब हिंदुस्तान में घटिया संपादक भी आ गए। लिहाजा राह आसान हो गई, भास्कर ने अपना बिहार कार्यक्रम एक-डेढ़ साल के लिए स्थगित कर दिया है। कोई ताज्जुब नहीं यदि प्रभात इतने समय में बिहार का भी नंबर एक बन जाए।

  2. pct

    February 11, 2011 at 3:55 pm

    yashwant ji aap sathia gaye hai.kisi aadmi ko nishana banakar jo aap likhtein hai kya wo sahi patrakarita kahi jaa sakti hai.aap apne ko patrakaro k adhikaro ka rakhshak batatein hai aur 1 asampadak vishesh ko lekar jo aap gaand me gooda wali baat kahtein ussasse apki chivi kharab ho rahi hai.shadshi ji ne 1 baar apko naukri pe nahi rakha to apne bhadas kholkar unhi pe bhadas nikalne lage.aap naveen joshi k chamche ho.jo wo kahta hai wahi aap chapte ho.aap patrakar nahi,patrakar k naam pe kalank ho

  3. pct

    February 11, 2011 at 3:56 pm

    sunita ji lagta hai apko naveen joshi ji se pyar ho gaya hai

  4. titun1234

    February 11, 2011 at 4:15 pm

    sunita madam…. bhaskar walo ne ranchi me prabhat kabar ke jo band baja kar rahe hai ye kisi se chupa nai hai….abhi prabhat kabar ko ranchi dekhna chiea…. baad me bhake ka tension lena chaea…….

  5. hirdesh

    February 11, 2011 at 5:37 pm

    ये बड़े दुःख की बात है की हिंदी अखबारों में गुटबाजी चरम पर है.छोटे जिले से लेकर मुख्यालय स्तर पर ये सब हो रहा है.अपने ही अख़बार का सर्कुलेशन गिराने और उसकी गुणवत्ता को गिराने में गुटबाज़ी का प्रभाव रहता है.संपादकों के लिए यही सबसे बड़ी चुनोती बन गयी है.इसके चलते संस्थान ब्यूरो चीफ से लेकर प्रधान संम्पादकों की क़ाबलियत का सही उपभोग नहीं कर पते.अंततः दोनो को ही नुकसान उठाना पड़ता है.
    हृदेश .मैनपुरी

  6. antu

    February 12, 2011 at 5:11 am

    Rajniti jis sansthan mein ghus jati hai uska band to bajna tai hai, dukh to is bat ka hai ki yai sab hindustan jaisai akhbar mein ho raha hai, jismain kam karnai ki har kisi ki icha hua karti thi. par ab yahan kuch bhi nischit nahin hai. ayaram gayaram bana diya gaya hai ranchi unit ko.

  7. manish

    February 12, 2011 at 11:03 am

    kya batayen achche log hindustan ko by kar rahe hain. Dehradun ke resident editor Dinesh Pathak Jaise dalal jame huye hain. ineh bharhtachar shiromani shashi shekhar ka saath mil raha hai. kuch din pahle Pathak ne shekhar ki C.M Nishank se mulakat karai. isme lenden ki baten bhi samne aa rahi hain.

  8. rajesh

    February 12, 2011 at 11:05 am

    shobhna ji aap kahan chali gaee. Dehradun unit ko is dalal resident editoe Dinesh pathak se mukti dilaoo.

  9. khushi

    February 13, 2011 at 7:36 am

    अरे भाई पांडे जी, अपने चेलों को भी अपने उन्नाव वाले कालेज में लगा लेते। बेचारे-बेचारी कानपुर से रांची, रांची से मेरठ और उसके आगे जाने कहां-कहां मारे-मारे फिरना पड़ेगा। आपको जिनको कानपुर ले गए वे बेचारे संकट में हैं, जिनको रांची लाए वे बेचारे आपके रणछोड़ बनने के कारण मेरठ ठेले गए।
    एक बात बताएंगे…आप तो खुलकर कहा करते थे कि आप लखनऊ में नवीन जोशी की जगह लेने वाले हैं, कइयों की नौकरियां आपने पक्की कर रखी थीं। आखिर इस्तीफा क्यों दिया। आप तो शशि जी के खास टुल्ले हैं फिर क्या हुआ। कहीं ऐसा तो नहीं कि शशिजी भी इस्तीफा देने का मन बना रहे हों, आपके कालेज में प्रिसिपल बनने के लिए।
    वैसे आप अपने टुल्लो व शशिजी को अपने कालेज में काम दे देवें तो पत्रकारिता जगत आपका ऋणी रहेगा। पत्रकारिता में तो आपने कालिख ही पोती, कम से कम जाते-जाते हिंदी पत्रकारिता पर एक एहसान कर सकते हैं, अपने टुल्लों-चिंटुओं-शशिजी को हिंदी पत्रकारिता से बाहर खींचकर। और हां, अमित चोपड़ा को अपने कालेज का बिजनेस हेड बना लेना।

    शुभकामनाएं

  10. Rakesh Ranjan

    February 13, 2011 at 5:04 pm

    Jharkhand me to charcha hai ki Ashok Pandey ko Jiteshwar le duba. Pandey ji ke jane ke bad ab jamshedpur me jo unke chele hai, enme se eak to varisht pad per hai, unme bhi dahshad hai. abe age dekhiye yaha kya hota hai.

    rakesh.

  11. Rakesh Ranjan

    February 13, 2011 at 5:07 pm

    Jharkhand me to charcha hai ki Ashok Pandey ko Jiteshwar le duba. Pandey ji ke jane ke bad ab jamshedpur me jo unke chele hai, enme se eak to varisht pad per hai, unme bhi dahshad hai. abe age dekhiye yaha kya hota hai.

    rakesh.

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